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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 भगवान श्रीकृष्ण / अच्युत

अच्युताष्टकम

अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्... आदि शंकराचार्य द्वारा रचित यह आठ पदों का स्तोत्र भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण के मधुरतम नामों की अमृत-धारा है।

रचयिता आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य
स्रोत / ग्रन्थ शंकराचार्य स्तोत्ररत्न
शुभ दिन / तिथि गुरुवार, बुधवार, एकादशी
जप माला तुलसी माला - 1 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम् । श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचंद्रं भजे ॥१॥
हिंदी भावार्थ: अच्युत, केशव, राम, नारायण, कृष्ण, दामोदर, वासुदेव, हरि, श्रीधर, माधव, गोपियों के प्रियतम और जानकी के स्वामी प्रभु रामचंद्र जी का मैं भजन करता हूँ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम् । इन्दिरामन्दिरं चेतसा सुन्दरं देवकीनन्दनं नन्दजं संदधे ॥२॥
हिंदी भावार्थ: सत्यभामा के पति, माधव, श्रीधर, श्रीराधा जी द्वारा आराधित, लक्ष्मी जी के निवास स्थान, हृदय में परम सुंदर, देवकीनंदन और नंद के लाल अच्युत-केशव का मैं अपने चित्त में ध्यान करता हूँ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ मन की अशांति, तनाव और कलह का तत्काल शमन
  • ✓ भगवान श्रीकृष्ण के प्रति निष्काम भक्ति और प्रेम की जागृति
  • ✓ घर में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार
  • ✓ प्रातः स्मरण से पूरे दिन प्रभु कृपा और रक्षा का अनुभव
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ पीले या श्वेत वस्त्र धारण करें।
2
दिशा व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें। शुद्ध गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करें।
3
तुलसी व चंदन अर्पण
भगवान विष्णु/श्रीराम/श्रीकृष्ण को गोपीचंदन का तिलक लगाएं और तुलसी दल व पीले पुष्प अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल व तुलसी लेकर शांति, रक्षा और अभीष्ट फल की कामना का संकल्प कर प्रेमपूर्वक पाठ करें।
5
आरती व भोग
पाठ उपरांत माखन-मिश्री अथवा पंजीरी का भोग लगाएं और कर्पूर आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अच्युताष्टकम का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▼

प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके तुलसी माला - 1 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।

इस स्तोत्र पाठ के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।