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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 भगवान बटुक भैरव

बटुक भैरव ब्रह्म कवच

रुद्रयामल तंत्र में वर्णित भगवान बटुक भैरव का यह ब्रह्म कवच साधक के सभी अंगों की रक्षा करता है। यह शत्रु बाधा, नजर दोष, गृह क्लेश और आकस्मिक संकटों से अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

रचयिता भगवान सदाशिव
स्रोत / ग्रन्थ रुद्रयामल तंत्र
शुभ दिन / तिथि रविवार, मंगलवार, चतुर्दशी तिथि
जप माला रुद्राक्ष माला - 1 अथवा 11 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
ॐ अस्य श्रीबटुकभैरवब्रह्मकवचस्तोत्रमहामन्त्रस्य बृहदारण्यक ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीबटुकभैरवो देवता, ह्रीं बीजम्, स्वाहा शक्तिः, क्लीं कीलकम्, सर्वकार्यसिद्धये पाठे विनियोगः ॥
हिंदी भावार्थ: बटुक भैरव ब्रह्म कवच (श्लोक 1): विनियोग: इस श्रीबटुकभैरव ब्रह्म कवच के ऋषि बृहदारण्यक हैं, देवता बटुक भैरव हैं। समस्त संकटों की निवृत्ति और सर्वकार्य सिद्धि के लिए इसका पाठ किया जाता है।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
ॐ सहस्रारे शिखां पातु बटुकः सर्वकामदः । भालं पातु महाकालो भ्रुवौ पातु दिगम्बरः ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: बटुक भैरव ब्रह्म कवच (श्लोक 2): सहस्रार चक्र और शिखा की रक्षा सर्वकामदाता बटुक भैरव करें। ललाट की रक्षा महाकाल और भौंहों की रक्षा दिगम्बर भैरव करें।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
नेत्रे पातु विरूपाक्षो नासिकां कालभैरवः । कर्णौ पातु कपर्दी मे मुखं पातु त्रिलोचनः ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: बटुक भैरव ब्रह्म कवच (श्लोक 3): नेत्रों की रक्षा विरूपाक्ष, नासिका की रक्षा कालभैरव, कानों की रक्षा कपर्दी और मुख की रक्षा त्रिलोचन भैरव करें।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
दन्तान् पातु करालास्यो जिह्वां मे पातु भैरवः । कण्ठं पातु घनग्रीवः स्कन्धौ पातु वृषध्वजः ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: बटुक भैरव ब्रह्म कवच (श्लोक 4): दांतों की रक्षा करालास्य, जीभ की रक्षा भैरव, कंठ की रक्षा घनग्रीव और दोनों कंधों की रक्षा वृषध्वज करें।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
बाहू पातु गदाहस्तो हस्तौ खड्गधरः सदा । हृदयं पातु भूतेशः स्तनौ पातु महेश्वरः ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: बटुक भैरव ब्रह्म कवच (श्लोक 5): भुजाओं की रक्षा गदाधारी, हाथों की रक्षा खड्गधारी, हृदय की रक्षा भूतेश और वक्षःस्थल की रक्षा महेश्वर करें।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
उदरं पातु सर्पाङ्गो नाभिं पातु दिगम्बरः । कटिं पातु कपालस्थः सक्थिनी पातु दण्डभृत् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: बटुक भैरव ब्रह्म कवच (श्लोक 6): उदर की रक्षा सर्पांग, नाभि की रक्षा दिगम्बर, कमर की रक्षा कपालस्थ और जंघाओं की रक्षा दण्डधारी भैरव करें।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
जानुनी पातु शूली मे गुल्फौ पातु सुरारिहा । पादौ पातु च पातालभैरवः सर्वदा मम ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: बटुक भैरव ब्रह्म कवच (श्लोक 7): घुटनों की रक्षा शूलधारी, टखनों की रक्षा सुरारिहा और दोनों पैरों की रक्षा पातालभैरव सदा करें।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
पूर्वे पातु महाभीमो वह्नौ पातु शिखाधरः । दक्षिणे पातु दण्डेशो नैर्ऋत्यां पातु भीषणः ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: बटुक भैरव ब्रह्म कवच (श्लोक 8): पूर्व दिशा में महाभीम, आग्नेय कोण में शिखाधर, दक्षिण में दण्डेश और नैर्ऋत्य कोण में भीषण भैरव रक्षा करें।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
पश्चिमे पातु पाशी मे वायव्यां मारुतोपमः । उत्तरे पातु कौबेर ऐशान्यां पातु शङ्करः ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: बटुक भैरव ब्रह्म कवच (श्लोक 9): पश्चिम दिशा में पाशधारी, वायव्य में वायु सदृश वेग वाले, उत्तर में कौबेर और ईशान कोण में शंकर भैरव रक्षा करें।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
ऊर्ध्वं पातु गगनचारी पाताले कालसर्पहृत् । रणे राजकुले द्यूते दुर्गे पातु सदाशिवः ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: बटुक भैरव ब्रह्म कवच (श्लोक 10): ऊपर गगनचारी और पाताल में कालसर्पहारी रक्षा करें। युद्ध में, राजदरबार में और दुर्गम मार्ग में सदाशिव भैरव रक्षा करें।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
इतीदं कवचं दिव्यं ब्रह्मणा कथितं पुरा । सर्वसिद्धिप्रदं नॄणां सर्वशत्रुनिवारणम् ॥ १० ॥ ॥ इति श्रीबटुकभैरवब्रह्मकवचं सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ: बटुक भैरव ब्रह्म कवच (श्लोक 11): यह दिव्य ब्रह्मकवच समस्त सिद्धियों को देने वाला, शत्रुओं का नाश करने वाला और भूत-प्रेतादि भय से रक्षा करने वाला है।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ जादू-टोना, नजर दोष, ऊपरी बाधा और प्रेत भय का समूल नाश
  • ✓ शत्रुओं के षड्यंत्र निष्फल होकर रक्षा की प्राप्ति
  • ✓ व्यापार और आजीविका में अचानक आने वाले संकटों का निवारण
  • ✓ बालकों एवं परिवार के सभी सदस्यों की चौबीसों घंटे सुरक्षा
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
पवित्रता व समय
संध्या समय या रात्रि काल में, स्नान कर लाल या काले स्वच्छ वस्त्र पहनें।
2
दिशा व दीप
दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर मुख करें। सरसों के तेल अथवा तिल के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं।
3
भोग अर्पण
भगवान कालभैरव को उड़द के पकोड़े, इमरती या गुड़-चने का भोग अर्पित करें।
4
पाठ व समर्पण
भय मुक्ति, शत्रु बाधा निवारण एवं आत्मरक्षा का संकल्प लेकर एकाग्रता से पाठ करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बटुक भैरव ब्रह्म कवच का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▼

प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके रुद्राक्ष माला - 1 अथवा 11 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।

इस स्तोत्र पाठ के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।