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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 परमेश्वर व वैदिक ऋषि

बंदी मोचन स्तोत्र

बंदी मोचन स्तोत्र सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। सनातन आगम व उपनिषद में वर्णित यह स्तुति परमेश्वर व वैदिक ऋषि के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता वैदिक महर्षि
स्रोत / ग्रन्थ सनातन आगम व उपनिषद
शुभ दिन / तिथि नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त
जप माला रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला - 1 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
यदि आप किसी कोर्ट कचहरी के मामले मे बेवजाह फंस गये है। और सजा होने की स्थिति है। या सजा हो चुकी है। या कोई व्यक्ति जेल मे बंद हो, तो यह प्रयोग अवश्य करे। इस प्रयोग से व्यक्ति निश्चय ही सजा से मुक्त हो कर सम्मान सहित वापिस आ जायेगे। लेकिन आप इस प्रयोग को तभी करे, जब आप सामाजिक और न्यायिक दृष्टि से सही हो। दोष युक्त होने पर यह प्रयोग कोई फल नही देगा। “ॐ ह्रीं ह्रूं बन्दी देव्यै नम:” इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करे तथा इस स्तोत्र का नित्य पाठ करे। स्तोत्रम् बन्दी देव्यै नमस्कृत्य वरदाभय शोभितम् । तदाज्ञांशरणं गच्छत् शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥
हिंदी भावार्थ: बंदी मोचन स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
बन्दी कमल पत्राक्षी लौह श्रृंखला भंजिनीम् । प्रसादं कुरू मे देवि! शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥
हिंदी भावार्थ: बंदी मोचन स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
त्वं बन्दी त्वं महा माया त्वं दुर्गा त्वं सरस्वती । त्वं देवी रजनी चैव शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥
हिंदी भावार्थ: बंदी मोचन स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
त्वं ह्रीं त्वमोश्वरी देवि ब्राम्हणी ब्रम्हा वादिनी । त्वं वै कल्पक्षयं कर्त्री शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥
हिंदी भावार्थ: बंदी मोचन स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
देवी धात्री धरित्री च धर्म शास्त्रार्थ भाषिणी । दु: श्वासाम्ब रागिणी देवी शीघ्रं मोचं ददातु मे । नमोस्तुते महालक्ष्मी रत्न कुण्डल भूषिता । शिवस्यार्धाग्डिनी चैव शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥
हिंदी भावार्थ: बंदी मोचन स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
नमस्कृत्य महा-दुर्गा भयात्तु तारिणीं शिवां । महा दु:ख हरां चैव शीघ्रं मोचं ददातु मे ॥
हिंदी भावार्थ: बंदी मोचन स्तोत्र (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
इंद स्तोत्रं महा-पुण्यं य: पठेन्नित्यमेव च । सर्व बन्ध विनिर्मुक्तो मोक्षं च लभते क्षणात् ॥
हिंदी भावार्थ: बंदी मोचन स्तोत्र (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ परमेश्वर व वैदिक ऋषि की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
परमेश्वर व वैदिक ऋषि का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बंदी मोचन स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।