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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 परमेश्वर व वैदिक ऋषि

चर्पट पंजरिका स्तोत्र

चर्पट पंजरिका स्तोत्र सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। सनातन आगम व उपनिषद में वर्णित यह स्तुति परमेश्वर व वैदिक ऋषि के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता वैदिक महर्षि
स्रोत / ग्रन्थ सनातन आगम व उपनिषद
शुभ दिन / तिथि नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त
जप माला रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला - 1 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
काल: क्रीडति गच्छत्यायुस्तदपि न मुच्चत्याशावायु: ।। १ ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते । प्राप्ते संनिहिते मरणे नहि नहि रक्षति डुकृञ् करणे ।। (ध्रुवपदम्)
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
अग्रे वह्नि: पृष्ठे भानू रात्रौ चिबुकसमर्पितजानु: । करतलभिक्षा तरुतलवासस्तदपि न मुच्चत्याशापाश: ।। २ ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
यावद्वित्तोपार्जनसक्तस्तावन्निजपरिवारो रक्त: । पश्चाद्धावति जर्जरदेहे वार्तां पृच्छति कोऽपि न गेहे ।। ३ ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
जटिलो मुण्डी लुंचितकेश: काषायाम्बरबहुकृतवेष: । पश्यन्नपि च न पश्यति लोको ह्युदरनिमित्तं बहुकृतशोक: ।। ४ ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
भगवद्गीता किंचिदधीता गंगाजल लवकणिकापीता । सकृदपि यस्य मुरारिसमर्चा तस्य यम: किं कुरते चर्चाम् ।। ५ ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
अंगं गलितं पलितं मुण्डं दशनविहीनं जातं तुण्डम् । वृद्धो याति गृहीत्वा दण्डं तदपि न मुच्चत्याशा पिण्डम् ।। ६ ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
बालास्तावत्क्रीडासक्तस्तरुणस्तावत्तरुणीरक्त: । वृद्धस्तावच्चिन्तामग्न: पारे ब्रह्मणि कोऽपि न लग्न: ।। ७ ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
पुनरपि जननं पुनरपि मरणं पुनरपि जननीजठरे शयनम् । इह संसारे खलु दुस्तारे कृपयापारे पाहि मुरारे ।। ८ ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
पुनरपि रजनी पुनरपि दिवस: पुनरपि पक्ष: पुनरपि मास: । पुनरप्ययनं पुनरपि वर्षं तदपि न मुच्चत्याशामर्षम् ।। ९ ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
वयसि गते क: कामविकार: शुष्के नीरे क: कासार: । नष्टे द्रव्ये क: परिवारो ज्ञाते तत्त्वे क: संसार: ।। १० ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
नारीस्तनभरनाभिनिवेशं मिथ्यामायामोहावेशम् । एतन्मांसवसादिविकारं मनसि विचारय बारम्बारम् ।। ११ ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
कस्त्वं कोऽहं कुत आयात: का मे जननी को मे तात: । इति परिभावय सर्वमसारं विश्वं त्यक्त्वा स्वप्नविचारम् ।। १२ ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
गेयं गीतानामसहस्त्रं ध्येयं श्रीपतिरूपमजस्त्रम् । नेयं सज्जनसंगे चित्तं देयं दीनजनाय च वित्तम् ।। १३ ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14 ॥ श्री ॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14 ॥ श्री ॥
यावज्जीवो निवसति देहे कुशलं तावत्पृच्छति गेहे । गतवति वायौ देहापाये भार्या बिभ्यति तस्मिन्काये ।। १४ ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15 ॥ श्री ॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15 ॥ श्री ॥
सुखत: क्रियते रामाभोग: पश्चाद्धन्त शरीरे रोग: । यद्यपि लोके मरणं शरणं तदपि न मुच्चति पापाचरणम् ।। १५ ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 16 ॥ श्री ॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 16): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 16 ॥ श्री ॥
रथ्याचर्पटविरचितकन्थ: पुण्यापुण्यविवर्जितपन्थ: । नाहं न त्वं नायं लोकस्तदपि किमर्थं क्रियते शोक: ।। १६ ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 16): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 17 ॥ श्री ॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 17): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 17 ॥ श्री ॥
कुरुते गंगासागरगमनं व्रतपरिपालनमथवा दानम् । ज्ञानविहीन: सर्वमतेन मुक्तिं न भजति जन्मशतेन ।। १७।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 17): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 18 ॥ श्री ॥
भज गोविन्दं भज गोविन्दं भज गोविन्दं मूढमते ।।
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक 18): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
॥ श्रीशंकराचार्यविरचितं चर्पट पंजरिका स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ: चर्पट पंजरिका स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ परमेश्वर व वैदिक ऋषि की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
परमेश्वर व वैदिक ऋषि का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
❓

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चर्पट पंजरिका स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।