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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 भगवान श्री हरि विष्णु

चतुश्लोकी भागवत

चतुश्लोकी भागवत सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। महाभारत / पुराण महाकोश में वर्णित यह स्तुति भगवान श्री हरि विष्णु के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता महर्षि वेदव्यास
स्रोत / ग्रन्थ महाभारत / पुराण महाकोश
शुभ दिन / तिथि गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा
जप माला तुलसी माला - 1 अथवा 3 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
करिष्यति स एवास्मदैहिकं पारलौकिकम् ।। 1 ।।
हिंदी भावार्थ: चतुश्लोकी भागवत (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
अन्याश्रयो न कर्तव्य: सर्वथा बाधकस्तु स: । स्वकीये स्वात्मभावश्च कर्तव्य: सर्वथा सदा ।। 2 ।।
हिंदी भावार्थ: चतुश्लोकी भागवत (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
सदा सर्वात्मना कृष्ण: सेव्य: कालादिदोषनुत् । तद्भक्त्तेषु च निर्दोषभावेन स्थेयमादरात् ।। 3 ।।
हिंदी भावार्थ: चतुश्लोकी भागवत (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
भगवत्येव सततं स्थापनीयं मन: स्वयम् । कालोऽयं कठिनोऽपि श्रीकृष्णभक्तान्न बाधते ।। 4 ।।
हिंदी भावार्थ: चतुश्लोकी भागवत (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
।। इति चतु:श्लोकी स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।
हिंदी भावार्थ: चतुश्लोकी भागवत (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ भगवान श्री हरि विष्णु की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
भगवान श्री हरि विष्णु का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चतुश्लोकी भागवत का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।