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🔱 देवाधिदेव महादेव शिव

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। शिव महापुराण में वर्णित यह स्तुति देवाधिदेव महादेव शिव के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता भगवान सदाशिव / महर्षि वेदव्यास
स्रोत / ग्रन्थ शिव महापुराण
शुभ दिन / तिथि सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि
जप माला रुद्राक्ष माला - 1, 3 अथवा 11 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्‌ । उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं ममलेश्वरम्‌ ॥ 1 ॥
हिंदी भावार्थ: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
परल्यां वैजनाथं च डाकियन्यां भीमशंकरम्‌ । सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥ 2 ॥
हिंदी भावार्थ: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
वारणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे । हिमालये तु केदारं ध्रुष्णेशं च शिवालये ॥ 3 ॥
हिंदी भावार्थ: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः । सप्तजन्मकृतं पापं स्मरेण विनश्यति ॥ 4 ॥
हिंदी भावार्थ: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
॥ इति द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तुति संपूर्णम्‌ ॥
हिंदी भावार्थ: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
Dwadash Jyotirling Stotra With Lyrics | द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र आरती चालीसा स्तुतियाँ सूक्तम् अष्टकम् सहस्त्रनाम सूर्य स्तोत्रम् चन्द्र स्तोत्रम् मंगल स्तोत्रम् बुध स्तोत्रम् बृहस्पति स्तोत्रम् शुक्र स्तोत्रम् शनि स्तोत्रम् राहू स्तोत्रम् केतु स्तोत्रम् नवग्रह स्तोत्रम्
हिंदी भावार्थ: द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ देवाधिदेव महादेव शिव की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
देवाधिदेव महादेव शिव का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।