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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 भगवान हनुमान (रुद्रावतार)

श्री हनुमान वडवानल स्तोत्रम

लंकापति विभीषण द्वारा लंका के घोर संकट के समय रचा गया यह हनुमान वडवानल स्तोत्र अग्नि की प्रचंड ज्वाला के समान शक्तिशाली है। यह असाध्य रोगों, भूत-प्रेत, तांत्रिक बंधन और मारण-उच्चाटन जैसे घोर अभिचारों को भी भस्म कर देता है।

रचयिता विभीषण जी
स्रोत / ग्रन्थ सुदर्शन संहिता / मंत्र महोदधि
शुभ दिन / तिथि मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती
जप माला रुद्राक्ष अथवा लाल मूंगा माला - 1, 3 अथवा 11 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
ॐ अस्य श्री हनुमद्वडवानल स्तोत्र मन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीहनुमान् वडवानल देवता, मारुतात्मज इति बीजम्, अञ्जनीसूनुरिति शक्तिः, लक्ष्मणप्राणदाता इति कीलकम्, मम सर्वोपद्रव निवारणार्थे जपे विनियोगः ॥
हिंदी भावार्थ: श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र (श्लोक 1): विनियोग: इस श्रीहनुमद्वडवानल स्तोत्र के ऋषि श्रीरामचन्द्र हैं, अनुष्टुप छन्द है, हनुमान जी देवता हैं। समस्त विघ्नों की शांति के लिए इसका पाठ किया जाता है।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो हनुमत् प्रचोदयात् ॥
हिंदी भावार्थ: श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र (श्लोक 2): ध्यान एवं गायत्री: पवनपुत्र श्रीहनुमान जी हमारे अंतःकरण को ज्ञान और पराक्रम से आलोकित करें।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
ॐ नमो भगवते श्रीहनुमते, वज्रदेहाय, वज्रतुण्डाय, वज्रमुखाय, वज्रदन्ताय, वज्रनखाय, वज्ररोम्णे, वज्रनेत्राय, वज्रदन्ताय, वज्रकराय, वज्रभक्ताय, रामदूताय स्वाहा ॥
हिंदी भावार्थ: श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र (श्लोक 3): वज्र के समान देह, वज्रमुख, वज्रनख और वज्रहस्त वाले, भगवान श्रीराम के परम भक्त श्रीहनुमान जी को नमस्कार है।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
ॐ नमो हनुमते, पवनपुत्राय, वैश्वानरमुखाय, हनुमते, दुष्टग्रह-भूत-प्रेत-पिशाच-शाकिनी-डाकिनी-यक्ष-राक्षस-विनाशकाय स्वाहा ॥
हिंदी भावार्थ: श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र (श्लोक 4): पवनपुत्र, अग्निमुख हनुमान जी जो दुष्टग्रह, भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी और राक्षसों का संहार करने वाले हैं, उन्हें नमस्कार है।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
ॐ नमो हनुमते, सर्वशत्रुसंहारकाय, महारुद्राय, वायुपुत्राय, अंजनीगर्भसम्भूताय, श्रीरामलक्ष्मणानन्दकराय, कपिसैन्यप्रणेत्रे स्वाहा ॥
हिंदी भावार्थ: श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र (श्लोक 5): समस्त शत्रुओं का संहार करने वाले, महारुद्र, श्रीराम-लक्ष्मण को आनंद देने वाले तथा वानर सेना के सेनापति हनुमान जी को स्वाहा।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
ॐ नमो हनुमते, सुग्रीवसाहाय्यकराय, लङ्कादहनाय, द्रोणाचलहरणाय, लक्ष्मणप्राणरक्षकाय, जलधिउल्लङ्घनाय स्वाहा ॥
हिंदी भावार्थ: श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र (श्लोक 6): सुग्रीव की सहायता करने वाले, लंका को भस्म करने वाले, द्रोणाचल पर्वत उठाने वाले और समुद्र लांघने वाले हनुमान जी को नमस्कार।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
ॐ नमो हनुमते, सर्वग्रहानुग्रहकराय, सूर्य-चन्द्र-मङ्गल-बुध-गुरु-शुक्र-शनि-राहु-केतु-दोषनिवारकाय स्वाहा ॥
हिंदी भावार्थ: श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र (श्लोक 7): समस्त नवग्रहों को अनुकूल करने वाले तथा सूर्य, शनि, राहु, केतु आदि के दोषों का शमन करने वाले हनुमान जी को नमस्कार है।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
ॐ नमो हनुमते, सर्वज्वरनिवारकाय, एकाहिक-द्व्याहिक-त्र्याहिक-चातुर्थिक-ज्वरनाशकाय, सर्वव्याधिप्रशमनाय स्वाहा ॥
हिंदी भावार्थ: श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र (श्लोक 8): समस्त प्रकार के ज्वर, असाध्य रोग, ताप और शारीरिक व्याधियों को दूर करने वाले प्रभु को नमस्कार।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
ॐ नमो हनुमते, सर्वविषभञ्जनाय, स्थावर-जङ्गम-कृत्रिम-विषनिवारकाय, सर्वभयविनाशकाय स्वाहा ॥
हिंदी भावार्थ: श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र (श्लोक 9): समस्त प्रकार के विष, कृत्रिम दोष और समस्त प्रकार के भयों का नाश करने वाले हनुमान जी को नमस्कार है।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
ॐ नमो हनुमते, परकृत-यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र-नाशकाय, सर्वकार्यसिद्धिप्रदाय, सर्वसम्पत्कराय स्वाहा ॥
हिंदी भावार्थ: श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र (श्लोक 10): शत्रुओं द्वारा किए गए तंत्र-मंत्र और अभिचार कर्मों का नाश करने वाले तथा सभी कार्यों में सफलता देने वाले प्रभु को स्वाहा।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
ॐ नमो हनुमते, ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं फट् घे घे स्वाहा, ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं फट् स्वाहा ॥
हिंदी भावार्थ: श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र (श्लोक 11): बीज मन्त्रों से युक्त यह महामन्त्र जीवन में विजय और प्रचंड सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
ॐ नमो हनुमते, सर्वबन्धविमोचनाय, कारागृहमुक्तिप्रदाय, सर्वसंकटनिवारकाय स्वाहा ॥
हिंदी भावार्थ: श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र (श्लोक 12): समस्त बंधनों से मुक्ति दिलाने वाले, कारागार से मुक्त कराने वाले और संकटों को हरने वाले हनुमान जी को नमस्कार है।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
ॐ नमो हनुमते, रामचन्द्रकृपापात्राय, सीतान्वेषणतत्पराय, अशोकवनविदारकाय, अक्षयकुमारवधकारकाय स्वाहा ॥
हिंदी भावार्थ: श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र (श्लोक 13): श्रीराम के कृपापात्र, सीता जी की खोज करने वाले और अशोक वाटिका को तहस-नहस करने वाले श्रीहनुमान जी को नमस्कार।
श्लोक संख्या 14 ॥ श्री ॥
यः पठेत् पाठयेद्वापि शृणुयाच्छ्रावयेत्तथा । सर्वपापविनिर्मुक्तः स याति परमां गतिम् ॥ १४ ॥ ॥ इति श्री हनुमद्वडवानल स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ: श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र (श्लोक 14): जो मनुष्य इस हनुमद्वडवानल स्तोत्र का पाठ करता है या सुनता है, वह समस्त पापों व भय से मुक्त होकर परम पद को प्राप्त करता है।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ असाध्य शारीरिक रोग, तेज ज्वर और गंभीर व्याधियों से तत्काल मुक्ति
  • ✓ काला जादू, भूत-प्रेत, डाकिनी-शाकिनी और तांत्रिक बंधन का समूल नाश
  • ✓ कठिन से कठिन मुकदमे और कारागार भय से मुक्ति
  • ✓ हनुमान जी की साक्षात रक्षा और शत्रुओं का पूर्ण पराभव
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
पवित्रता व शुद्धि
स्नान कर स्वच्छ लाल अथवा नारंगी (केसरिया) वस्त्र धारण करें।
2
दिशा व दीप
दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर मुख करें। चमेली के तेल या शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
3
सिंदूर व भोग अर्पण
हनुमान जी को चमेली का तेल मिश्रित सिंदूर, लाल पुष्प और बूंदी/लड्डू या गुड़-चने का भोग अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल लेकर अपने संकट और भय निवारण का संकल्प करें तथा ओजस्वी व स्पष्ट वाणी में पाठ करें।
5
आरती व रक्षा सूत्र
पाठ उपरांत कपूर से आरती करें और सिंदूर का तिलक अपने मस्तक पर लगाएं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री हनुमान वडवानल स्तोत्रम का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▼

प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके रुद्राक्ष अथवा लाल मूंगा माला - 1, 3 अथवा 11 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।

इस स्तोत्र पाठ के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।