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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 परमेश्वर व वैदिक ऋषि

काशी पंचकम् स्तोत्र

काशी पंचकम् स्तोत्र सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। शंकराचार्य स्तोत्ररत्न में वर्णित यह स्तुति परमेश्वर व वैदिक ऋषि के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य
स्रोत / ग्रन्थ शंकराचार्य स्तोत्ररत्न
शुभ दिन / तिथि नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त
जप माला रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला - 1 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
मनोनिवृत्तिः परमोपशान्तिः सा तीर्थवर्या मणिकर्णिका च । ज्ञानप्रवाहा विमलादिगङ्गा सा काशिकाहं निजबोधरूपा  ।। 1 ।।
हिंदी भावार्थ: काशी पंचकम् स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
यस्यामिदं कल्पितमिन्द्रजालं चराचरं भाति मनोविलासम् । सच्चित्सुखैका परमात्मरूपा सा काशिकाहं निजबोधरूपा  ।। 2 ।।
हिंदी भावार्थ: काशी पंचकम् स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
कोशेषु पञ्चस्वधिराजमाना बुद्धिर्भवानी प्रतिदेहगेहम् । साक्षी शिवः सर्वगतोऽन्तरात्मा सा काशिकाहं निजबोधरूपा ।। 3 ।।
हिंदी भावार्थ: काशी पंचकम् स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
काश्यां हि काश्यते काशी काशी सर्वप्रकाशिका । सा काशी विदिता येन तेन प्राप्ता हि काशिका ।। 4 ।।
हिंदी भावार्थ: काशी पंचकम् स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
ध्यानम् ॥ श्री ॥
काशीक्षेत्रं शरीरं त्रिभुवन-जननी व्यापिनी ज्ञानगङ्गा भक्तिः श्रद्धा गयेयं निजगुरु-चरणध्यानयोगः प्रयागः । विश्वेशोऽयं तुरीयः सकलजन-मनःसाक्षिभूतोऽन्तरात्मा देहे सर्वं मदीये यदि वसति पुनस्तीर्थमन्यत्किमस्ति ।। 5 ।।
हिंदी भावार्थ: काशी पंचकम् स्तोत्र (श्लोक ध्यानम्): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
।। इति कांशीपंचकम स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।
हिंदी भावार्थ: काशी पंचकम् स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ परमेश्वर व वैदिक ऋषि की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
परमेश्वर व वैदिक ऋषि का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काशी पंचकम् स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।