अङ्कं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती... एक निर्धन ब्राह्मणी की दारिद्र्य व्यथा देखकर आदि शंकराचार्य ने मां लक्ष्मी की स्तुति में यह स्तोत्र रचा, जिसके प्रभाव से स्वर्ण के आंवलों की वर्षा हुई थी।
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प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके कमलगट्टे अथवा स्फटिक माला - 1 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।
यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।
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