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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 मां महालक्ष्मी

श्री कनकधारा स्तोत्रम

अङ्कं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती... एक निर्धन ब्राह्मणी की दारिद्र्य व्यथा देखकर आदि शंकराचार्य ने मां लक्ष्मी की स्तुति में यह स्तोत्र रचा, जिसके प्रभाव से स्वर्ण के आंवलों की वर्षा हुई थी।

रचयिता आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य
स्रोत / ग्रन्थ शंकराचार्य स्तोत्ररत्न
शुभ दिन / तिथि शुक्रवार, पूर्णिमा, धनतेरस
जप माला कमलगट्टे अथवा स्फटिक माला - 1 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
माङ्गल्यदास्तु मम मङ्गलदेवतायाः ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
मुग्धा मुहुर्विदधती वदने मुरारे: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि । माला दृशोर्मधुकरीव महोत्पले या सा मे श्रियं दिशतु सागरसम्भवायाः ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्ष- मानन्दहेतुरधिकं मुरविद्विषोऽपि । ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्ध- मिन्दीवरोदरसहोदरमिन्दिरायाः ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्द- मानन्दकन्दमनिमेषमनङ्गतन्त्रम् । आकेकरस्थितकनीनिकपक्ष्मनेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजङ्गशयाङ्गनायाः ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
बाह्वन्तरे मधुजितः श्रितकौस्तुभे या हारावलीव हरिनीलमयी विभाति । कामप्रदा भगवतोऽपि कटाक्षमाला कल्याणमावहतु मे कमलालयायाः ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
कालाम्बुदालिललितोरसि कैटभारे- र्धाराधरे स्फुरति या तडिदङ्गनेव । मातुः समस्तजगतां महनीयमूर्ति- र्भद्राणि मे दिशतु भार्गवनन्दनायाः ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
प्राप्तं पदं प्रथमतः किल यत्प्रभावान् माङ्गल्यभाजि मधुमाथिनि मन्मथेन । मय्यापतेत्तदिह मन्थरमीक्षणार्धं मन्दालसं च मकरालयकन्यकायाः ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
दद्याद् दयानुपवनो द्रविणाम्बुधारा मस्मिन्नकिञ्चनविहङ्गशिशौ विषण्णे । दुष्कर्मघर्ममपनीय चिराय दूरं नारायणप्रणयिनीनयनाम्बुवाहः ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
इष्टा विशिष्टमतयोऽपि यया दयार्द्र- दृष्ट्या त्रिविष्टपपदं सुलभं लभन्ते । दृष्टिः प्रहृष्टकमलोदरदीप्तिरिष्टां पुष्टिं कृषीष्ट मम पुष्करविष्टरायाः ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
गीर्देवतेति गरुडध्वजसुन्दरीति शाकम्भरीति शशिशेखरवल्लभेति । सृष्टिस्थितिप्रलयकेलिषु संस्थितायै तस्यै नमस्त्रिभुवनैकगुरोस्तरुण्यै ॥ १० ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
श्रुत्यै नमोऽस्तु शुभकर्मफलप्रसूत्यै रत्यै नमोऽस्तु रमणीयगुणार्णवायै । शक्त्यै नमोऽस्तु शतपत्रनिकेतनायै पुष्ट्यै नमोऽस्तु पुरुषोत्तमवल्लभायै ॥ ११ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
नमोऽस्तु नालीकनिभाननायै नमोऽस्तु दुग्धोदधिजन्मभूत्यै । नमोऽस्तु सोमामृतसोदरायै नमोऽस्तु नारायणवल्लभायै ॥ १२ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
सम्पत्कराणि सकलेन्द्रियनन्दनानि साम्राज्यदानविभवानि सरोरुहाक्षि । त्वद्वन्दनानि दुरिताहरणोद्यतानि मामेव मातरनिशं कलयन्तु मान्ये ॥ १३ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14 ॥ श्री ॥
यत्कटाक्षसमुपासनाविधिः सेवकस्य सकलार्थसम्पदः । संतनोति वचनाङ्गमानसै स्त्वां मुरारिहृदयेश्वरीं भजे ॥ १४ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15 ॥ श्री ॥
सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवलतमांशुकगन्धमाल्यशोभे भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम् ॥ १५ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 16 ॥ श्री ॥
दिग्घस्तिभिः कनककुम्भमुखावसृष्ट- स्वर्वाहिनीविमलचारुजलप्लुताङ्गीम् । प्रातर्नमामि जगतां जननीमशेष लोकाधिनाथगृहिणीममृताब्धिपुत्रीम् ॥ १६ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 16): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 17 ॥ श्री ॥
कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरङ्गितैरपाङ्गैः । अवलोकय मामकिञ्चनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः ॥ १७ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 17): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 18 ॥ श्री ॥
स्तुवन्ति ये स्तुतिभिरमूभिरन्वहं त्रयीमयीं त्रिभुवनमातरं रमाम् । गुणाधिका गुरुतरभाग्यभागिनो भवन्ति ते भुवि बुधभाविताशयाः ॥ १८ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 18): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 19 ॥ श्री ॥
सुवर्णधारास्तोत्रं यच्छङ्कराचार्य-निर्मितम् । त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नित्यं स कुबेरसमो भवेत् ॥ १९ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक 19): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
॥ श्री कनकधारा स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कनकधारा स्तोत्रम (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ घोर दरिद्रता, कंगाली और आर्थिक विपत्ति का तत्काल अंत
  • ✓ व्यापार, शेयर बाजार व कार्यक्षेत्र में अकस्मात अप्रत्याशित धन लाभ
  • ✓ ऋण और कर्ज के बोझ से मुक्ति
  • ✓ मां लक्ष्मी की प्रसन्नता और घर में स्वर्ण-समृद्धि का आगमन
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व वस्त्र
संध्या समय या प्रातः काल स्नान कर गुलाबी, लाल या पीले स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
दिशा व दीप
उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करें। शुद्ध गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करें।
3
लक्ष्मी व कुबेर पूजन
कमलगट्टा, अक्षत, रोली, गुलाब के पुष्प और खीर या बताशे का नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में कमलगट्टा या अक्षत लेकर दारिद्र्य नाश व स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति का संकल्प कर पाठ करें।
5
आरती व समर्पण
पाठ उपरांत महालक्ष्मी की आरती करें और कमलगट्टे को अपनी तिजोरी में रखें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री कनकधारा स्तोत्रम का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▼

प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके कमलगट्टे अथवा स्फटिक माला - 1 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।

इस स्तोत्र पाठ के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।