Bhakti Ki Shakti Vedic Lotus Logo
BHAKTI KI SHAKTI
🔱 भगवान श्री कृष्ण (मधुराधिपति)

मधुराष्टकम

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम्... वल्लभाचार्य जी द्वारा रचित मधुराष्टक भगवान श्रीकृष्ण के प्रत्येक अंग, लीला और भाव की अद्वितीय मधुरता का अमृतमय गान है।

रचयिता श्रीमद्वल्लभाचार्य जी
स्रोत / ग्रन्थ पुष्टिमार्ग / वल्लभाचार्य वाङ्मय
शुभ दिन / तिथि बुधवार, शुक्रवार, जन्माष्टमी
जप माला तुलसी माला - 1 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् । हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥१॥
हिंदी भावार्थ: जिनके होंठ मधुर हैं, मुख मधुर है, नेत्र मधुर हैं, मुस्कान मधुर है, हृदय मधुर है और चाल भी मधुर है—उन मधुरता के स्वामी श्रीकृष्ण का सब कुछ मधुर ही मधुर है।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् । चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥२॥
हिंदी भावार्थ: जिनकी वाणी मधुर है, चरित्र मधुर है, वस्त्र मधुर हैं, भंगिमा मधुर है, चलना मधुर है और घूमना भी मधुर है—उन मधुराधिपति का सब कुछ मधुर है।
🕉️

संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

✨

पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ हृदय में अगाध शांति, मधुरता, आनंद और ईश्वरीय प्रेम का प्राकट्य
  • ✓ क्रोध, चिड़चिड़ापन और नकारात्मक विचारों का पूर्ण शमन
  • ✓ वैवाहिक व पारिवारिक संबंधों में परस्पर प्रेम और मधुरता
  • ✓ प्रभु श्रीकृष्ण की असीम प्रीति और सानिध्य का अनुभव
📜

स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ पीले या श्वेत वस्त्र धारण करें।
2
दिशा व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें। शुद्ध गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करें।
3
तुलसी व चंदन अर्पण
भगवान विष्णु/श्रीराम/श्रीकृष्ण को गोपीचंदन का तिलक लगाएं और तुलसी दल व पीले पुष्प अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल व तुलसी लेकर शांति, रक्षा और अभीष्ट फल की कामना का संकल्प कर प्रेमपूर्वक पाठ करें।
5
आरती व भोग
पाठ उपरांत माखन-मिश्री अथवा पंजीरी का भोग लगाएं और कर्पूर आरती करें।
❓

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मधुराष्टकम का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▼

प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके तुलसी माला - 1 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।

इस स्तोत्र पाठ के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।