नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते... देवराज इंद्र द्वारा रचित यह अष्टक मां महालक्ष्मी के अमोघ वरदानों, अष्ट सिद्धियों और समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति का दिव्य साधन है।
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प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके कमलगट्टा अथवा स्फटिक माला - 1, 2 अथवा 3 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।
यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।
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