Bhakti Ki Shakti Vedic Lotus Logo
BHAKTI KI SHAKTI
🔱 परमेश्वर व वैदिक ऋषि

न्यासदशकम्

न्यासदशकम् सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। सनातन आगम व उपनिषद में वर्णित यह स्तुति परमेश्वर व वैदिक ऋषि के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता वैदिक महर्षि
स्रोत / ग्रन्थ सनातन आगम व उपनिषद
शुभ दिन / तिथि नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त
जप माला रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला - 1 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
श्रीमन्नभीष्टवरद त्वामस्मि शरणं गतः । एतद्देहावसाने मां त्वत्पादं प्रापय प्रभो ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: न्यासदशकम् (श्लोक 1): हे समस्त अभीष्ट वर देने वाले श्रीमन नारायण! मैं आपकी शरण में आया हूँ। इस देह के अंत में मुझे अपने चरणकमलों का परम धाम प्रदान कीजिए।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
अहं मद्राक्षणभरो मद्रक्षणफलं तथा । न मम श्रीपतेरेवेत्यात्मानं निक्षिपेद्बुधः ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: न्यासदशकम् (श्लोक 2): मैं स्वयं, मेरी रक्षा का भार और मेरी रक्षा का फल—यह सब मेरा नहीं, केवल श्रीपति भगवान का है; ऐसा मानकर ज्ञानी जन स्वयं को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देते हैं।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
न्यस्याम्यकिञ्चनः श्रीमान् त्वत्पादे भारमात्मनः । त्वमेव गोप्ता मे भूयाः प्रार्थयेऽहं जगत्पते ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: न्यासदशकम् (श्लोक 3): हे जगत्पति! मैं सर्वथा असहाय होकर अपने जीवन का समस्त भार आपके पावन चरणों में समर्पित करता हूँ, आप ही मेरी रक्षा करें।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
त्वमेव सर्वलोकेषु शरण्यो भक्तवत्सलः । इति मत्वा मया न्यस्तो भारस्त्वयि दयानिधौ ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: न्यासदशकम् (श्लोक 4): समस्त लोकों में एकमात्र आप ही शरणागतवत्सल और परम रक्षक हैं, यह जानकर मैंने अपना भार आप दयानिधान पर छोड़ दिया है।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
कृपापारे समामग्नो विमुक्तोऽहं भयैस्तथा । त्वदेकाश्रयणं कृत्वा कृतकृत्योऽस्म्यहं सदा ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: न्यासदशकम् (श्लोक 5): आपकी अगाध कृपादृष्टि में मग्न होकर मैं समस्त सांसारिक भयों से मुक्त हो गया हूँ। केवल आपका आश्रय पाकर मैं धन्य हो गया हूँ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
अज्ञानादथवा ज्ञानात् कृतं यद् दुष्कृतं मया । तत्सर्वं क्षम्यतां देव नारायण नमोऽस्तु ते ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: न्यासदशकम् (श्लोक 6): अज्ञानवश अथवा जानबूझकर जो भी पाप मुझसे हुए हों, हे देवाधिदेव नारायण! उन सबको क्षमा कीजिए। आपको नमस्कार है।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव । त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देवदेव ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: न्यासदशकम् (श्लोक 7): आप ही मेरे माता हैं, आप ही पिता हैं, आप ही बन्धु हैं, आप ही सखा हैं, आप ही विद्या हैं, आप ही धन हैं। हे देवों के देव! आप ही मेरे सर्वस्व हैं।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
प्रपन्नपारिजाताय तोत्रवेत्रैकपाणये । ज्ञानमुद्राय कृष्णाय गीतामृतदुहे नमः ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: न्यासदशकम् (श्लोक 8): शरणागतों के लिए कल्पवृक्ष सदृश, चाबुक और ज्ञानमुद्रा धारण करने वाले, गीता का अमृत देने वाले भगवान श्रीकृष्ण को नमस्कार है।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
न्यासमेतं पठेन्नित्यं यो भक्त्या पुरुषोत्तमम् । स याति परमां सिद्धिं विष्णोः पदमनामयम् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: न्यासदशकम् (श्लोक 9): जो मनुष्य भक्तिपूर्वक इस न्यासदशकम् का नित्य पाठ करता है, वह श्रीविष्णु के परम अमय पद को प्राप्त करता है।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
वेदान्तदेशिककृता कृतिरेषा मनोहरा । सर्वश्रेयस्करी नॄणां मुक्तिदा भवबन्धनात् ॥ १० ॥ ॥ इति श्रीमद्वेदान्तदेशिकविरचितं न्यासदशकं सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ: न्यासदशकम् (श्लोक 10): स्वामी वेदान्त देशिक द्वारा रचित यह न्यासदशकम् मानव मात्र का कल्याण करने वाला और भवबंधन से मुक्ति देने वाला है।
🕉️

संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

✨

पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ परमेश्वर व वैदिक ऋषि की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
📜

स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
परमेश्वर व वैदिक ऋषि का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
❓

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

न्यासदशकम् का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।