Bhakti Ki Shakti Vedic Lotus Logo
BHAKTI KI SHAKTI
🔱 परमेश्वर व वैदिक ऋषि

प्रातः स्मरणम्

प्रातः स्मरणम् सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। सनातन आगम व उपनिषद में वर्णित यह स्तुति परमेश्वर व वैदिक ऋषि के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता वैदिक महर्षि
स्रोत / ग्रन्थ सनातन आगम व उपनिषद
शुभ दिन / तिथि नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त
जप माला रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला - 1 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
प्रातः स्मरामि हृदि संस्फुरदात्मतत्त्वं सच्चित्सुखं परमहंसगतिं तुरीयम् । यत्स्वप्नजागरसुषुप्तिमवैति नित्यं तद्ब्रह्म निष्कलमहं न च भूतसङ्घः ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: प्रातः स्मरणम् (श्लोक 1): प्रातःकाल मैं हृदय में स्फुरित होने वाले आत्मतत्त्व का स्मरण करता हूँ, जो सत्-चित्-आनन्दमय, परमहंसों की परम गति और तुरीय है; जो जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति तीनों अवस्थाओं का नित्य साक्षी है। मैं वही निष्कल ब्रह्म हूँ, पंचभूतों का संघात नहीं।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
प्रातर्भजामि मनसा वचसामगम्यं वाचो विभान्ति विपुला यदनुग्रहेण । यन्नेति नेति वचनैर्निगमा अवोचं- स्तं देवदेवमजमच्युतमाहुरग्र्यम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: प्रातः स्मरणम् (श्लोक 2): प्रातःकाल मैं मन और वाणी से अगम्य उस देवाधिदेव का भजन करता हूँ, जिनकी कृपा से समस्त वाणी प्रकाशित होती है और वेद जिनका 'नेति नेति' कहकर निरूपण करते हैं; जो अजन्मा और अच्युत हैं।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
प्रातर्नमामि तमसां परमर्कवर्णं पूर्णं सनातनपदं पुरुषोत्तमाख्यम् । यस्मिन्निदं जगदशेषमशेषमूर्तौ रज्ज्वां भुजङ्गम इव प्रतिभासितं वै ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: प्रातः स्मरणम् (श्लोक 3): प्रातःकाल मैं अज्ञान रूपी अंधकार से परे, सूर्य सदृश प्रकाशवान, परिपूर्ण, सनातन पुरुषोत्तम को नमन करता हूँ; जिनमें यह सम्पूर्ण दृश्य जगत उसी प्रकार भासित हो रहा है जैसे रस्सी में सर्प।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
श्लोकत्रयमिदं पुण्यं लोकत्रयविभूषणम् । प्रातःकाले पठेद्यस्तु स गच्छेत्परमं पदम् ॥ ४ ॥ ॥ इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं प्रातःस्मरणस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ: प्रातः स्मरणम् (श्लोक 4): तीनों लोकों को पवित्र करने वाले इस पावन प्रातःस्मरण स्तोत्र का जो प्रातःकाल पाठ करता है, वह जीवन-मृत्यु के चक्र से छूटकर परम पद को प्राप्त होता है।
🕉️

संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

✨

पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ परमेश्वर व वैदिक ऋषि की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
📜

स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
परमेश्वर व वैदिक ऋषि का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
❓

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रातः स्मरणम् का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।