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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 भगवान श्री नृसिंह देव

ऋण मोचन नरसिंह स्तोत्र

ऋण मोचन नरसिंह स्तोत्र सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। सनातन आगम व उपनिषद में वर्णित यह स्तुति भगवान श्री नृसिंह देव के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता वैदिक महर्षि
स्रोत / ग्रन्थ सनातन आगम व उपनिषद
शुभ दिन / तिथि गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा
जप माला तुलसी माला - 1 अथवा 3 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
देवकार्य सिध्यर्थं सभस्तंभं समुद् भवम । श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ 1 ॥
हिंदी भावार्थ: ऋण मोचन नरसिंह स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
लक्ष्म्यालिन्गितं वामांगं, भक्ताम्ना वरदायकं । श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ 2 ॥
हिंदी भावार्थ: ऋण मोचन नरसिंह स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
अन्त्रांलादरं शंखं, गदाचक्रयुध धरम् । श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ 3 ॥
हिंदी भावार्थ: ऋण मोचन नरसिंह स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
स्मरणात् सर्व पापघ्नं वरदं मनोवाञ्छितं । श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ 4 ॥
हिंदी भावार्थ: ऋण मोचन नरसिंह स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
सिहंनादेनाहतं, दारिद्र्यं बंद मोचनं । श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ 5 ॥
हिंदी भावार्थ: ऋण मोचन नरसिंह स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
प्रल्हाद वरदं श्रीशं, धनः कोषः परिपुर्तये । श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ 6 ॥
हिंदी भावार्थ: ऋण मोचन नरसिंह स्तोत्र (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
क्रूरग्रह पीडा नाशं, कुरुते मंगलं शुभम् । श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ 7 ॥
हिंदी भावार्थ: ऋण मोचन नरसिंह स्तोत्र (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
वेदवेदांगं यद्न्येशं, रुद्र ब्रम्हादि वंदितम् । श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ 8 ॥
हिंदी भावार्थ: ऋण मोचन नरसिंह स्तोत्र (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
व्याधी दुखं परिहारं, समूल शत्रु निखं दनम् । श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ 9 ॥
हिंदी भावार्थ: ऋण मोचन नरसिंह स्तोत्र (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
विद्या विजय दायकं, पुत्र पोत्रादि वर्धनम् । श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ 10 ॥
हिंदी भावार्थ: ऋण मोचन नरसिंह स्तोत्र (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
भुक्ति मुक्ति प्रदायकं, सर्व सिद्धिकर नृणां । श्री नृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये ॥ 11 ॥
हिंदी भावार्थ: ऋण मोचन नरसिंह स्तोत्र (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
उर्ग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तम् सर्वतोमुखं । नृसिंह भीषणं भद्रं मृत्य मृत्युं नमाम्यहम ॥ 12 ॥
हिंदी भावार्थ: ऋण मोचन नरसिंह स्तोत्र (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
य: पठेत् इंद् नित्यं संकट मुक्तये । अरुणि विजयी नित्यं, धनं शीघ्रं माप्नुयात् ॥ 13 ॥
हिंदी भावार्थ: ऋण मोचन नरसिंह स्तोत्र (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
। इति श्रीनृसिंहपुराणे ऋणमोचनस्तोत्रं सम्पूर्णम ।
हिंदी भावार्थ: ऋण मोचन नरसिंह स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ भगवान श्री नृसिंह देव की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
भगवान श्री नृसिंह देव का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऋण मोचन नरसिंह स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।