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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 देवाधिदेव महादेव शिव

शिवमानस पूजा स्तोत्र

शिवमानस पूजा स्तोत्र सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। शिव महापुराण में वर्णित यह स्तुति देवाधिदेव महादेव शिव के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता भगवान सदाशिव / महर्षि वेदव्यास
स्रोत / ग्रन्थ शिव महापुराण
शुभ दिन / तिथि सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि
जप माला रुद्राक्ष माला - 1, 3 अथवा 11 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः स्नानं च दिव्याम्बरं । नानारत्नविभूषितं मृगमदा मोदाङ्कितं चन्दनम् ।।
हिंदी भावार्थ: शिवमानस पूजा स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
जातीचम्पकविल्वपत्ररचितं पुष्पं च धूपं तथा । दीपं देव! दयानिधे ! पशुपते ! हृत्कल्पितं गृह्यताम् ॥ 1 ॥
हिंदी भावार्थ: शिवमानस पूजा स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
सौवर्णे नवरलखण्डरचिते पात्रे घृतं पायसं । भक्ष्यं पञ्चविधं पयोदधियुतं रम्भाफलं पानकम् ।।
हिंदी भावार्थ: शिवमानस पूजा स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
शाकानामयुतं जलं रुचिकरं कर्पूरखण्डोज्ज्वलं । ताम्बूलं मनसा मया विरचितं भक्त्या प्रभो स्वीकुरु ॥ 2 ॥
हिंदी भावार्थ: शिवमानस पूजा स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
छत्रं चामरयोर्युगं व्यजनकं चादर्शकं निर्मलं । वीणाभेरिमृदङ्गकाहलकला गीतं च नृत्यं तथा ।।
हिंदी भावार्थ: शिवमानस पूजा स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
साष्टाङ्गं प्रणतिः स्तुतिर्बहुविधा ह्येतत्समस्तं मया । संकल्पेन समर्पितं तव विभो पूजां गृहाण प्रभो ! ॥ 3 ॥
हिंदी भावार्थ: शिवमानस पूजा स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
आत्मा त्वं गिरिजा मतिः सहचराः प्राणाः शरीरं गृहं । पूजा ते विषयोपभोगरचना निद्रासमाधिस्थितिः ।।
हिंदी भावार्थ: शिवमानस पूजा स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
सञ्चारः पदयोः प्रदक्षिणविधिः स्तोत्राणि सर्वा गिरो । यद्यत्कर्म करोमि तत्तदखिलं शम्भो तवाराधनम् ।। 4 ।।
हिंदी भावार्थ: शिवमानस पूजा स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा, श्रवणनयनजं वा मानसं वाऽपराधम् । विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व, जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥ 5 ॥
हिंदी भावार्थ: शिवमानस पूजा स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
॥ इति श्रीशिवमानसपूजा सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ: शिवमानस पूजा स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ देवाधिदेव महादेव शिव की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
देवाधिदेव महादेव शिव का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवमानस पूजा स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।