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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 भगवान श्री गणेश

श्री गणेशा पंच्रालाम स्तोत्रं

श्री गणेशा पंच्रालाम स्तोत्रं सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। श्री गणेश पुराण / मुद्गल पुराण में वर्णित यह स्तुति भगवान श्री गणेश के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता भगवान सदाशिव / देवर्षि नारद
स्रोत / ग्रन्थ श्री गणेश पुराण / मुद्गल पुराण
शुभ दिन / तिथि बुधवार, संकष्टी चतुर्थी, विनायक चतुर्थी
जप माला रुद्राक्ष अथवा लाल चंदन माला - 1 अथवा 3 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
मुदा करात्त मोदकं सदा विमुक्ति साधकम् । कलाधरावतंसकं विलासिलोक रक्षकम् । अनायकैक नायकं विनाशितेभ दैत्यकम् । नताशुभाशु नाशकं नमामि तं विनायकम् ॥ 1 ॥
हिंदी भावार्थ: श्री गणेशा पंच्रालाम स्तोत्रं (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
नतेतराति भीकरं नवोदितार्क भास्वरम् । नमत्सुरारि निर्जरं नताधिकापदुद्ढरम् । सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरम् । महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम् ॥ 2 ॥
हिंदी भावार्थ: श्री गणेशा पंच्रालाम स्तोत्रं (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
समस्त लोक शङ्करं निरस्त दैत्य कुञ्जरम् । दरेतरोदरं वरं वरेभ वक्त्रमक्षरम् । कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करम् । मनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम् ॥ 3 ॥
हिंदी भावार्थ: श्री गणेशा पंच्रालाम स्तोत्रं (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
अकिञ्चनार्ति मार्जनं चिरन्तनोक्ति भाजनम् । पुरारि पूर्व नन्दनं सुरारि गर्व चर्वणम् । प्रपञ्च नाश भीषणं धनञ्जयादि भूषणम् । कपोल दानवारणं भजे पुराण वारणम् ॥ 4 ॥
हिंदी भावार्थ: श्री गणेशा पंच्रालाम स्तोत्रं (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
नितान्त कान्ति दन्त कान्ति मन्त कान्ति कात्मजम् । अचिन्त्य रूपमन्त हीन मन्तराय कृन्तनम् । हृदन्तरे निरन्तरं वसन्तमेव योगिनाम् । तमेकदन्तमेव तं विचिन्तयामि सन्ततम् ॥ 5 ॥
हिंदी भावार्थ: श्री गणेशा पंच्रालाम स्तोत्रं (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
महागणेश पञ्चरत्नमादरेण यॊ‌உन्वहम् । प्रजल्पति प्रभातके हृदि स्मरन् गणेश्वरम् । अरोगतामदोषतां सुसाहितीं सुपुत्रताम् । समाहितायु रष्टभूति मभ्युपैति सोஉचिरात् ॥ 6 ॥
हिंदी भावार्थ: श्री गणेशा पंच्रालाम स्तोत्रं (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
॥ इति श्री गणेश स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ: श्री गणेशा पंच्रालाम स्तोत्रं (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ भगवान श्री गणेश की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
भगवान श्री गणेश का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री गणेशा पंच्रालाम स्तोत्रं का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर बुधवार, संकष्टी चतुर्थी, विनायक चतुर्थी पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।