श्लोक संख्या 1
॥ श्री ॥
आञ्जनेयं शङ्खचक्रपाणिं चेतसि धीमहि ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2
॥ श्री ॥
श्रीयोगपीठविन्यस्तव्यत्यस्तचरणाम्बुजम् ।
दरार्यभयमुद्राक्षमालापट्टिकया युतम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
ध्यानम्
॥ श्री ॥
पारिजाततरोर्मूलवासिनं वनवासिनम् ।
पश्चिमाभिमुखं बालं नृहरेर्ध्यानसंस्थितम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक ध्यानम्): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3
॥ श्री ॥
सर्वाभीष्टप्रदं नॄणां हनुमन्तमुपास्महे ।
नारद उवाच –
स्थानानामुत्तमं स्थानं किं स्थानं वद मे पितः ।
ब्रह्मोवाच ब्रह्मन् पुरा विवादोऽभून्नारायणकपीशयोः ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 1
॥ श्री ॥
तत्तेऽहं सम्प्रवक्ष्यामि सावधानमनाः शृणु ।
एकमासाद्वरदः साक्षात् द्विमासाद्रङ्गनायकः ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2
॥ श्री ॥
मासार्धेन प्रवक्ष्यमि तथा वै वेङ्कटेश्वरः ।
अर्धमासेन दास्यामि कृतं तु परमं शिवम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3
॥ श्री ॥
घटिकाचलसंस्थानाद्धटिकाचलवल्लभः ।
हनुमानञ्जनासूनू रामभक्तो जितेन्द्रियः ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4
॥ श्री ॥
घटिकादेव काम्यानां कामदाता भवाम्यहम् ।
शङ्खचक्रप्रदो येन प्रदास्यामि हरेः पदम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5
॥ श्री ॥
घटिकाचलसंस्थाने घटिकां वसते यदि ।
स मुक्तः सर्वलोकेषु वायुपुत्रप्रसादतः ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6
॥ श्री ॥
ब्रह्मतीर्थस्य निकटे राघवेन्द्रस्य सन्निधौ ।
वायुपुत्रं समालोक्य न भयं विद्यते नरे ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7
॥ श्री ॥
तस्माद्वायुसुतस्थानं पवित्रमतिदुलर्भम् ।
पूर्वाब्धेः पश्चिमे भागे दक्षिणाब्धेस्तथोत्तरे ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8
॥ श्री ॥
वेङ्कटाद्दक्षिणे भागे पर्वते घटिकाचले ।
तत्रैव ऋषयः सर्वे तपस्तप्यन्ति सादरम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9
॥ श्री ॥
पञ्चाक्षरमहामन्त्रं द्विषट्कं च द्विजातिनाम् ।
नाममन्त्रं ततः श्रीमन् स्त्रीशूद्राणामुदाहृतम् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10
॥ श्री ॥
तत्र स्नात्वा ब्रह्मतीर्थे नत्वा तं वायुमन्दिरे ।
वायुपुत्रं भजेन्नित्यं सर्वारिष्टविवर्जितः ॥ १०॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11
॥ श्री ॥
सेवते मण्डलं नित्यं तथा वै ह्यर्धमण्डलम् ।
वाञ्छितं विन्दते नित्यं वायुपुत्रप्रसादतः ।
तस्मात्त्वमपि भोः पुत्र निवासं घटिकाचले ॥ ११ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12
॥ श्री ॥
कथं वासः प्रकर्तव्यो घटिकाचलमस्तके ।
केन मन्त्रेण बलवानाञ्जनेयः प्रसीदति ॥ १२ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13
॥ श्री ॥
विधानं तस्य मन्त्रस्य होमं चैव विशेषतः ।
कियत्कालं तत्र वासं कर्तव्यं तन्ममावद ॥ १३ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14
॥ श्री ॥
ब्रह्मतीर्थे ततः स्नत्वा हनुमत्संमुखे स्थितः ।
द्वादशाक्षरमन्त्रं तु नित्यमष्टसहस्रकम् ॥ १४ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15
॥ श्री ॥
जपेन्नियमतः शुद्धस्तद्भक्तस्तु परायणः ।
निराहारः फलाहारो ब्रह्मचर्यव्रते स्थितः ॥ १५ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
ध्यानम्
॥ श्री ॥
मण्डलं तत्र वस्तव्यं भक्तियुक्तेन चेतसा ।
ध्यानश्लोकं प्रवक्ष्यामि शृणु नारद तत्वतः ॥ १६ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक ध्यानम्): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 17
॥ श्री ॥
तमञ्जनानन्दनमिन्दुबिम्बनिभाननं सुन्दरमप्रमेयम् ।
सीतासुतं सूक्ष्मगुणस्वदेहं श्रीरामपादार्पणचित्तवृत्तिम् ॥ १७ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 17): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 18
॥ श्री ॥
एवं ध्यात्वा सदा भक्त्या तत्पादजलजं मुदा ।
चतुर्थांशेन होमं वा कर्तव्यं पायसेन च ॥ १८ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 18): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 19
॥ श्री ॥
विधिना विधियुक्तस्तु विदित्वा घटिकाचलम् ।
जगाम जयमन्विच्छन्निन्द्रियाणां महामनाः ॥ १९ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 19): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 20
॥ श्री ॥
एवं नियमयुक्तः सन् यः करोति हरेः प्रियम् ।
विजयं विन्दते देही वायुपुत्रप्रसादतः ॥ २० ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 20): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति
॥ श्री ॥
।। इति श्री घटिकाचल हनुमत्स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ।।
हिंदी भावार्थ:
श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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