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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 भगवान श्री हनुमान

श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं

श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। सुदर्शन संहिता व पुराण परंपरा में वर्णित यह स्तुति भगवान श्री हनुमान के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता गोस्वामी तुलसीदास / महर्षि वाल्मीकि
स्रोत / ग्रन्थ सुदर्शन संहिता व पुराण परंपरा
शुभ दिन / तिथि मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती
जप माला रुद्राक्ष अथवा लाल मूंगा माला - 1, 3 अथवा 7 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
आञ्जनेयं शङ्खचक्रपाणिं चेतसि धीमहि ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
श्रीयोगपीठविन्यस्तव्यत्यस्तचरणाम्बुजम् । दरार्यभयमुद्राक्षमालापट्टिकया युतम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
ध्यानम् ॥ श्री ॥
पारिजाततरोर्मूलवासिनं वनवासिनम् । पश्चिमाभिमुखं बालं नृहरेर्ध्यानसंस्थितम् ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक ध्यानम्): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
सर्वाभीष्टप्रदं नॄणां हनुमन्तमुपास्महे । नारद उवाच – स्थानानामुत्तमं स्थानं किं स्थानं वद मे पितः । ब्रह्मोवाच ब्रह्मन् पुरा विवादोऽभून्नारायणकपीशयोः ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
तत्तेऽहं सम्प्रवक्ष्यामि सावधानमनाः शृणु । एकमासाद्वरदः साक्षात् द्विमासाद्रङ्गनायकः ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
मासार्धेन प्रवक्ष्यमि तथा वै वेङ्कटेश्वरः । अर्धमासेन दास्यामि कृतं तु परमं शिवम् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
घटिकाचलसंस्थानाद्धटिकाचलवल्लभः । हनुमानञ्जनासूनू रामभक्तो जितेन्द्रियः ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
घटिकादेव काम्यानां कामदाता भवाम्यहम् । शङ्खचक्रप्रदो येन प्रदास्यामि हरेः पदम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
घटिकाचलसंस्थाने घटिकां वसते यदि । स मुक्तः सर्वलोकेषु वायुपुत्रप्रसादतः ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
ब्रह्मतीर्थस्य निकटे राघवेन्द्रस्य सन्निधौ । वायुपुत्रं समालोक्य न भयं विद्यते नरे ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
तस्माद्वायुसुतस्थानं पवित्रमतिदुलर्भम् । पूर्वाब्धेः पश्चिमे भागे दक्षिणाब्धेस्तथोत्तरे ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
वेङ्कटाद्दक्षिणे भागे पर्वते घटिकाचले । तत्रैव ऋषयः सर्वे तपस्तप्यन्ति सादरम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
पञ्चाक्षरमहामन्त्रं द्विषट्कं च द्विजातिनाम् । नाममन्त्रं ततः श्रीमन् स्त्रीशूद्राणामुदाहृतम् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
तत्र स्नात्वा ब्रह्मतीर्थे नत्वा तं वायुमन्दिरे । वायुपुत्रं भजेन्नित्यं सर्वारिष्टविवर्जितः ॥ १०॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
सेवते मण्डलं नित्यं तथा वै ह्यर्धमण्डलम् । वाञ्छितं विन्दते नित्यं वायुपुत्रप्रसादतः । तस्मात्त्वमपि भोः पुत्र निवासं घटिकाचले ॥ ११ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
कथं वासः प्रकर्तव्यो घटिकाचलमस्तके । केन मन्त्रेण बलवानाञ्जनेयः प्रसीदति ॥ १२ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
विधानं तस्य मन्त्रस्य होमं चैव विशेषतः । कियत्कालं तत्र वासं कर्तव्यं तन्ममावद ॥ १३ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14 ॥ श्री ॥
ब्रह्मतीर्थे ततः स्नत्वा हनुमत्संमुखे स्थितः । द्वादशाक्षरमन्त्रं तु नित्यमष्टसहस्रकम् ॥ १४ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15 ॥ श्री ॥
जपेन्नियमतः शुद्धस्तद्भक्तस्तु परायणः । निराहारः फलाहारो ब्रह्मचर्यव्रते स्थितः ॥ १५ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
ध्यानम् ॥ श्री ॥
मण्डलं तत्र वस्तव्यं भक्तियुक्तेन चेतसा । ध्यानश्लोकं प्रवक्ष्यामि शृणु नारद तत्वतः ॥ १६ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक ध्यानम्): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 17 ॥ श्री ॥
तमञ्जनानन्दनमिन्दुबिम्बनिभाननं सुन्दरमप्रमेयम् । सीतासुतं सूक्ष्मगुणस्वदेहं श्रीरामपादार्पणचित्तवृत्तिम् ॥ १७ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 17): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 18 ॥ श्री ॥
एवं ध्यात्वा सदा भक्त्या तत्पादजलजं मुदा । चतुर्थांशेन होमं वा कर्तव्यं पायसेन च ॥ १८ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 18): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 19 ॥ श्री ॥
विधिना विधियुक्तस्तु विदित्वा घटिकाचलम् । जगाम जयमन्विच्छन्निन्द्रियाणां महामनाः ॥ १९ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 19): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 20 ॥ श्री ॥
एवं नियमयुक्तः सन् यः करोति हरेः प्रियम् । विजयं विन्दते देही वायुपुत्रप्रसादतः ॥ २० ॥
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक 20): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
।। इति श्री घटिकाचल हनुमत्स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ।।
हिंदी भावार्थ: श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ भगवान श्री हनुमान की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
भगवान श्री हनुमान का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री घटिकचाला हनुमत स्तोत्रं का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।