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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 भगवान श्री कृष्ण

श्री कृष्ण द्वादशनाम स्तोत्र

श्री कृष्ण द्वादशनाम स्तोत्र सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। सनातन आगम व उपनिषद में वर्णित यह स्तुति भगवान श्री कृष्ण के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता वैदिक महर्षि
स्रोत / ग्रन्थ सनातन आगम व उपनिषद
शुभ दिन / तिथि गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा
जप माला तुलसी माला - 1 अथवा 3 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
श्रीकृष्ण उवाच – किं ते नामसहस्रेण विज्ञातेन तवाऽर्जुन । तानि नामानि विज्ञाय नरः पापैः प्रमुच्यते ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कृष्ण द्वादशनाम स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
प्रथमं तु हरिं विन्द्याद् द्वितीयं केशवं तथा । तृतीयं पद्मनाभं च चतुर्थं वामनं स्मरेत् ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कृष्ण द्वादशनाम स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
पञ्चमं वेदगर्भं तु षष्ठं च मधुसूदनम् । सप्तमं वासुदेवं च वराहं चाऽष्टमं तथा ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कृष्ण द्वादशनाम स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
नवमं पुण्डरीकाक्षं दशमं तु जनार्दनम् । कृष्णमेकादशं विन्द्याद् द्वादशं श्रीधरं तथा ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कृष्ण द्वादशनाम स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
एतानि द्वादश नामानि विष्णुप्रोक्ते विधीयते । सायं-प्रातः पठेन्नित्यं तस्य पुण्यफलं शृणु ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कृष्ण द्वादशनाम स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
चान्द्रायण-सहस्राणि कन्यादानशतानि च । अश्वमेधसहस्राणि फलं प्राप्नोत्यसंशयः ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कृष्ण द्वादशनाम स्तोत्र (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
अमायां पौर्णमास्यां च द्वादश्यां तु विशेषतः । प्रातःकाले पठेन्नित्यं सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कृष्ण द्वादशनाम स्तोत्र (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
श्रीकृष्ण द्वादशनाम स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ: श्री कृष्ण द्वादशनाम स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ भगवान श्री कृष्ण की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
भगवान श्री कृष्ण का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री कृष्ण द्वादशनाम स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।