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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 मां महालक्ष्मी

श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं

श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। श्री दुर्गा सप्तशती / मार्कण्डेय पुराण में वर्णित यह स्तुति मां महालक्ष्मी के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता महर्षि मार्कण्डेय / तंत्र शास्त्र
स्रोत / ग्रन्थ श्री दुर्गा सप्तशती / मार्कण्डेय पुराण
शुभ दिन / तिथि शुक्रवार, मंगलवार, अष्टमी, नवरात्रि
जप माला कमलगट्टा अथवा स्फटिक माला - 1 या 7 पाठ
ध्यानम् ॥ श्री ॥
ध्यानम् – चक्रं विद्या वर घट गदा दर्पणम् पद्मयुग्मं दोर्भिर्बिभ्रत्सुरुचिरतनुं मेघविद्युन्निभाभम् । गाढोत्कण्ठं विवशमनिशं पुण्डरीकाक्षलक्ष्म्यो रेकीभूतं वपुरवतु वः पीतकौशेयकान्तम् ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक ध्यानम्): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
शंखचक्रगदापद्मकुंभाऽऽदर्शाब्जपुस्तकम् । बिभ्रतं मेघचपलवर्णं लक्ष्मीहरिं भजे ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
विद्युत्प्रभाश्लिष्टघनोपमानौ शुद्धाशयेबिंबितसुप्रकाशौ । चित्ते चिदाभौ कलयामि लक्ष्मी- नारायणौ सत्त्वगुणप्रधानौ ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
लोकोद्भवस्थेमलयेश्वराभ्यां शोकोरुदीनस्थितिनाशकाभ्याम् । नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी- नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
सम्पत्सुखानन्दविधायकाभ्यां भक्तावनाऽनारतदीक्षिताभ्याम् । नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी- नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
दृष्ट्वोपकारे गुरुतां च पञ्च- विंशावतारान् सरसं दधत्भ्याम् । नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
क्षीरांबुराश्यादिविराट्भवाभ्यां नारं सदा पालयितुं पराभ्याम् । नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी- नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
दारिद्र्यदुःखस्थितिदारकाभ्यां दयैवदूरीकृतदुर्गतिभ्याम् नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी- नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
भक्तव्रजाघौघविदारकाभ्यां स्वीयाशयोद्धूतरजस्तमोभ्याम् । नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी- नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
रक्तोत्पलाभ्राभवपुर्धराभ्यां पद्मारिशंखाब्जगदाधराभ्याम् । नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी- नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ १० ॥
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
अङ्घ्रिद्वयाभ्यर्चककल्पकाभ्यां मोक्षप्रदप्राक्तनदंपतीभ्याम् । नित्यं युवाभ्यां नतिरस्तु लक्ष्मी- नारायणाभ्यां जगतः पितृभ्याम् ॥ ११ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
इदं तु यः पठेत् स्तोत्रं लक्ष्मीनारयणाष्टकम् । ऐहिकामुष्मिकसुखं भुक्त्वा स लभतेऽमृतम् ॥ १२ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
।। इति श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम् संपूर्णम् ।।
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
dorbhirbibhratsuruchiratanum meghavidyunnibhabham । rakeebhutam vapuravatu vah pitakausheyakantam ।। 1 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
shankhchakragadapadmkumbha̕̕darshabjapustakam । bibhratam meghachapalavarnam lakshmiharim bhaje ।। 2 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
shuddhashayebimbitasuprakashau । narayanau sattvagunapradhanau ।। 3 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
shokorudinasthitinashakaabhyam । narayanabhyam jagatah pitrubhyam ।। 4 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
bhaktavana̕naratadikshitabhyam । narayanabhyam jagatah pitrubhyam ।। 5 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
vimshavataran sarasam dadhatbhyam । narayanabhyam jagatah pitrubhyam ।। 6 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
naram sada palayitum parabhyam । narayanabhyam jagatah pitrubhyam ।। 7 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
narayanabhyam jagatah pitrubhyam ।। 8 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
sviyaashayoddhutarajastamobhyam । narayanabhyam jagatah pitrubhyam ।। 9 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
padmarishankhabjagadadharabhyam । narayanabhyam jagatah pitrubhyam ।। 10 ।
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
mokshapradapraktanadampatibhyam । narayanabhyam jagatah pitrubhyam ।। 11 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
lakshminarayanashtakam । bhuktva sa labhate̕mrutam ।। 12 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
।। iti shri lakshmi narayan stotram sampurnam ।।
हिंदी भावार्थ: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ मां महालक्ष्मी की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
मां महालक्ष्मी का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रं का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर शुक्रवार, मंगलवार, अष्टमी, नवरात्रि पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।