श्लोक संख्या 1
॥ श्री ॥
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 1
॥ श्री ॥
अधुना शृणु देवस्य साधनं योगदं परम् ।
साधयित्वा स्वयं योगी भविष्यसि न संशयः ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2
॥ श्री ॥
स्वानन्दः स्वविहारेण संयुक्तश्च विशेषतः ।
सर्वसंयोगकारित्वाद् गणेशो मायया युतः ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3
॥ श्री ॥
विहारेण विहीनश्चाऽयोगो निर्मायिकः स्मृतः ।
संयोगाभेद हीनत्वाद् भवहा गणनायकः ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4
॥ श्री ॥
संयोगाऽयोगयोर्योगः पूर्णयोगस्त्वयोगिनः ।
प्रह्लाद गणनाथस्तु पूर्णो ब्रह्ममयः परः ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5
॥ श्री ॥
योगेन तं गणाधीशं प्राप्नुवन्तश्च दैत्यप ।
बुद्धिः सा पञ्चधा जाता चित्तरूपा स्वभावतः ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6
॥ श्री ॥
तस्य माया द्विधा प्रोक्ता प्राप्नुवन्तीह योगिनः ।
तं विद्धि पूर्णभावेन संयोगाऽयोगर्वजितः ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7
॥ श्री ॥
क्षिप्तं मूढं च विक्षिप्तमेकाग्रं च निरोधकम् ।
पञ्चधा चित्तवृत्तिश्च सा माया गणपस्य वै ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8
॥ श्री ॥
क्षिप्तं मूढं च चित्तं च यत्कर्मणि च विकर्मणि ।
संस्थितं तेन विश्वं वै चलति स्व-स्वभावतः ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9
॥ श्री ॥
अकर्मणि च विक्षिप्तं चित्तं जानीहि मानद ।
तेन मोक्षमवाप्नोति शुक्लगत्या न संशयः ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10
॥ श्री ॥
एकाग्रमष्टधा चित्तं तदेवैकात्मधारकम् ।
सम्प्रज्ञात समाधिस्थम् जानीहि साधुसत्तम ॥ १० ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11
॥ श्री ॥
निरोधसंज्ञितं चित्तं निवृत्तिरूपधारकम् ।
असम्प्रज्ञातयोगस्थं जानीहि योगसेवया ॥ ११ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12
॥ श्री ॥
सिद्धिर्नानाविधा प्रोक्ता भ्रान्तिदा तत्र सम्मता ।
माया सा गणनाथस्य त्यक्तव्या योगसेवया ॥ १२ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13
॥ श्री ॥
पञ्चधा चित्तवृत्तिश्च बुद्धिरूपा प्रकीर्तिता ।
सिद्ध्यर्थं सर्वलोकाश्च भ्रमयुक्ता भवन्त्यतः ॥ १३ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14
॥ श्री ॥
धर्मा-ऽर्थ-काम-मोक्षाणां सिद्धिर्भिन्ना प्रकीर्तिता ।
ब्रह्मभूतकरी सिद्धिस्त्यक्तव्या पंचधा सदा ॥ १४ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15
॥ श्री ॥
मोहदा सिद्धिरत्यन्तमोहधारकतां गता ।
बुद्धिश्चैव स सर्वत्र ताभ्यां खेलति विघ्नपः ॥ १५ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 16
॥ श्री ॥
बुद्ध्या यद् बुद्ध्यते तत्र पश्चान् मोहः प्रवर्तते ।
अतो गणेशभक्त्या स मायया वर्जितो भवेत् ॥ १६ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 16): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 17
॥ श्री ॥
पञ्चधा चित्तवृत्तिश्च पञ्चधा सिद्धिमादरात् ।
त्यक्वा गणेशयोगेन गणेशं भज भावतः ॥ १७ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 17): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 18
॥ श्री ॥
ततः स गणराजस्य मन्त्रं तस्मै ददौ स्वयम् ।
गणानां त्वेति वेदोक्तं स विधिं मुनिसत्तम ॥ १८ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 18): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 19
॥ श्री ॥
तेन सम्पूजितो योगी प्रह्लादेन महात्मना ।
ययौ गृत्समदो दक्षः स्वर्गलोकं विहायसा ॥ १९ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 19): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 20
॥ श्री ॥
प्रह्लादश्च तथा साधुः साधयित्वा विशेषतः ।
योगं योगीन्द्रमुख्यं स शान्तिसद्धारकोऽभवत् ॥ २० ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 20): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 21
॥ श्री ॥
विरोचनाय राज्यं स ददौ पुत्राय दैत्यपः ।
गणेशभजने योगी स सक्तः सर्वदाऽभवत् ॥ २१ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 21): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 22
॥ श्री ॥
सगुणं विष्णु रूपं च निर्गुणं ब्रह्मवाचकम् ।
गणेशेन धृतं सर्वं कलांशेन न संशयः ॥ २२ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 22): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 23
॥ श्री ॥
एवं ज्ञात्वा महायोगी प्रह्लादोऽभेदमाश्रितः ।
हृदि चिन्तामणिम् ज्ञात्वाऽभजदनन्यभावनः ॥ २३ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 23): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 24
॥ श्री ॥
स्वल्पकालेन दैत्येन्द्रः शान्तियोगपरायणः ।
शान्तिं प्राप्तो गणेशेनैकभावोऽभवतत्परः ॥ २४ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 24): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 25
॥ श्री ॥
शापश्चैव गणेशेन प्रह्लादस्य निराकृतः ।
न पुनर्दुष्टसंगेन भ्रान्तोऽभून्मयि मानद ॥ २५ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 25): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 26
॥ श्री ॥
एवं मदं परित्यज ह्येकदन्तसमाश्रयात् ।
असुरोऽपि महायोगी प्रह्लादः स बभूव ह ॥ २६ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 26): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 27
॥ श्री ॥
एतत् प्रह्लादमाहात्म्यं यः शृणोति नरोत्तमः ।
पठेद् वा तस्य सततं भवेदोप्सितदायकम् ॥ २७ ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 27): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति
॥ श्री ॥
॥ इति श्रीप्रहलाद कृत गणेश स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ:
श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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