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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 भगवान श्री गणेश

श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं

श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। श्री गणेश पुराण / मुद्गल पुराण में वर्णित यह स्तुति भगवान श्री गणेश के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता भगवान सदाशिव / देवर्षि नारद
स्रोत / ग्रन्थ श्री गणेश पुराण / मुद्गल पुराण
शुभ दिन / तिथि बुधवार, संकष्टी चतुर्थी, विनायक चतुर्थी
जप माला रुद्राक्ष अथवा लाल चंदन माला - 1 अथवा 3 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
अधुना शृणु देवस्य साधनं योगदं परम् । साधयित्वा स्वयं योगी भविष्यसि न संशयः ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
स्वानन्दः स्वविहारेण संयुक्तश्च विशेषतः । सर्वसंयोगकारित्वाद् गणेशो मायया युतः ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
विहारेण विहीनश्चाऽयोगो निर्मायिकः स्मृतः । संयोगाभेद हीनत्वाद् भवहा गणनायकः ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
संयोगाऽयोगयोर्योगः पूर्णयोगस्त्वयोगिनः । प्रह्लाद गणनाथस्तु पूर्णो ब्रह्ममयः परः ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
योगेन तं गणाधीशं प्राप्नुवन्तश्च दैत्यप । बुद्धिः सा पञ्चधा जाता चित्तरूपा स्वभावतः ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
तस्य माया द्विधा प्रोक्ता प्राप्नुवन्तीह योगिनः । तं विद्धि पूर्णभावेन संयोगाऽयोगर्वजितः ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
क्षिप्तं मूढं च विक्षिप्तमेकाग्रं च निरोधकम् । पञ्चधा चित्तवृत्तिश्च सा माया गणपस्य वै ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
क्षिप्तं मूढं च चित्तं च यत्कर्मणि च विकर्मणि । संस्थितं तेन विश्वं वै चलति स्व-स्वभावतः ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
अकर्मणि च विक्षिप्तं चित्तं जानीहि मानद । तेन मोक्षमवाप्नोति शुक्लगत्या न संशयः ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
एकाग्रमष्टधा चित्तं तदेवैकात्मधारकम् । सम्प्रज्ञात समाधिस्थम् जानीहि साधुसत्तम ॥ १० ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
निरोधसंज्ञितं चित्तं निवृत्तिरूपधारकम् । असम्प्रज्ञातयोगस्थं जानीहि योगसेवया ॥ ११ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
सिद्धिर्नानाविधा प्रोक्ता भ्रान्तिदा तत्र सम्मता । माया सा गणनाथस्य त्यक्तव्या योगसेवया ॥ १२ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
पञ्चधा चित्तवृत्तिश्च बुद्धिरूपा प्रकीर्तिता । सिद्ध्यर्थं सर्वलोकाश्च भ्रमयुक्ता भवन्त्यतः ॥ १३ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14 ॥ श्री ॥
धर्मा-ऽर्थ-काम-मोक्षाणां सिद्धिर्भिन्ना प्रकीर्तिता । ब्रह्मभूतकरी सिद्धिस्त्यक्तव्या पंचधा सदा ॥ १४ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15 ॥ श्री ॥
मोहदा सिद्धिरत्यन्तमोहधारकतां गता । बुद्धिश्चैव स सर्वत्र ताभ्यां खेलति विघ्नपः ॥ १५ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 16 ॥ श्री ॥
बुद्ध्या यद् बुद्ध्यते तत्र पश्चान् मोहः प्रवर्तते । अतो गणेशभक्त्या स मायया वर्जितो भवेत् ॥ १६ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 16): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 17 ॥ श्री ॥
पञ्चधा चित्तवृत्तिश्च पञ्चधा सिद्धिमादरात् । त्यक्वा गणेशयोगेन गणेशं भज भावतः ॥ १७ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 17): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 18 ॥ श्री ॥
ततः स गणराजस्य मन्त्रं तस्मै ददौ स्वयम् । गणानां त्वेति वेदोक्तं स विधिं मुनिसत्तम ॥ १८ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 18): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 19 ॥ श्री ॥
तेन सम्पूजितो योगी प्रह्लादेन महात्मना । ययौ गृत्समदो दक्षः स्वर्गलोकं विहायसा ॥ १९ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 19): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 20 ॥ श्री ॥
प्रह्लादश्च तथा साधुः साधयित्वा विशेषतः । योगं योगीन्द्रमुख्यं स शान्तिसद्धारकोऽभवत् ॥ २० ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 20): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 21 ॥ श्री ॥
विरोचनाय राज्यं स ददौ पुत्राय दैत्यपः । गणेशभजने योगी स सक्तः सर्वदाऽभवत् ॥ २१ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 21): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 22 ॥ श्री ॥
सगुणं विष्णु रूपं च निर्गुणं ब्रह्मवाचकम् । गणेशेन धृतं सर्वं कलांशेन न संशयः ॥ २२ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 22): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 23 ॥ श्री ॥
एवं ज्ञात्वा महायोगी प्रह्लादोऽभेदमाश्रितः । हृदि चिन्तामणिम् ज्ञात्वाऽभजदनन्यभावनः ॥ २३ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 23): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 24 ॥ श्री ॥
स्वल्पकालेन दैत्येन्द्रः शान्तियोगपरायणः । शान्तिं प्राप्तो गणेशेनैकभावोऽभवतत्परः ॥ २४ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 24): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 25 ॥ श्री ॥
शापश्चैव गणेशेन प्रह्लादस्य निराकृतः । न पुनर्दुष्टसंगेन भ्रान्तोऽभून्मयि मानद ॥ २५ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 25): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 26 ॥ श्री ॥
एवं मदं परित्यज ह्येकदन्तसमाश्रयात् । असुरोऽपि महायोगी प्रह्लादः स बभूव ह ॥ २६ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 26): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 27 ॥ श्री ॥
एतत् प्रह्लादमाहात्म्यं यः शृणोति नरोत्तमः । पठेद् वा तस्य सततं भवेदोप्सितदायकम् ॥ २७ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक 27): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
॥ इति श्रीप्रहलाद कृत गणेश स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ: श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ भगवान श्री गणेश की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
भगवान श्री गणेश का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री प्रह्लाद कृतं गणेशा स्तोत्रं का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर बुधवार, संकष्टी चतुर्थी, विनायक चतुर्थी पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।