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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 भगवान कालभैरव / बटुक भैरव

श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र

श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। शिव महापुराण में वर्णित यह स्तुति भगवान कालभैरव / बटुक भैरव के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता भगवान सदाशिव / महर्षि वेदव्यास
स्रोत / ग्रन्थ शिव महापुराण
शुभ दिन / तिथि सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि
जप माला रुद्राक्ष माला - 1, 3 अथवा 11 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
मूल-मन्त्रः- “ॐ ऐं क्लां क्लीं क्लूं ह्रां ह्रीं ह्रूंसः वं आपदुद्धारणाय अजामल-बद्धायलोकेश्वराय स्वर्णाकर्षण-भैरवाय ममदारिद्र्य-विद्वेषणायश्रींमहा-भैरवायनमः ।” ।। श्री मार्कण्डेय उवाच ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
भगवन् ! प्रमथाधीश ! शिव-तुल्य-पराक्रम । पूर्वमुक्तस्त्वयामन्त्रं, भैरवस्यमहात्मनः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
इदानींश्रोतुमिच्छामि, तस्यस्तोत्रमनुत्तमं । तत्केनोक्तंपुरास्तोत्रं, पठनात्तस्यकिंफलम् ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
तत्सर्वंश्रोतुमिच्छामि, ब्रूहिमेनन्दिकेश्वर ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
।। श्री नन्दिकेश्वर उवाच ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
इदंब्रह्मन् ! महा-भाग, लोकानामुपकारक । स्तोत्रंवटुक-नाथस्य, दुर्लभंभुवन-त्रये ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
सर्व-पाप-प्रशमनं, सर्व-सम्पत्ति-दायकम् । दारिद्र्य-शमनंपुंसामापदा-भय-हारकम् ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
अष्टैश्वर्य-प्रदंनृणां, पराजय-विनाशनम् । महा-कान्ति-प्रदंचैव, सोम-सौन्दर्य-दायकम् ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
महा-कीर्ति-प्रदंस्तोत्रं, भैरवस्यमहात्मनः । नवक्तव्यंनिराचारे, हिपुत्रायचसर्वथा ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
शुचयेगुरु-भक्ताय, शुचयेऽपितपस्विने । महा-भैरव-भक्ताय, सेवितेनिर्धनायच ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
निज-भक्तायवक्तव्यमन्यथाशापमाप्नुयात् । स्तोत्रमेतत्भैरवस्य, ब्रह्म-विष्णु-शिवात्मनः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
श्रृणुष्वब्रूहितोब्रह्मन् ! सर्व-काम-प्रदायकम् ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
विनियोगः ॥ श्री ॥
विनियोगः- सीधे हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़कर जल भूमि पर छोड़ दे । ॐअस्यश्रीस्वर्णाकर्षण-भैरव-स्तोत्रस्यब्रह्माऋषिः, अनुष्टुप्छन्दः, श्रीस्वर्णाकर्षण-भैरव-देवता, ह्रींबीजं, क्लींशक्ति, सःकीलकम्, मम-सर्व-काम-सिद्धयर्थेपाठेविनियोगः । ध्यानः- मन्दार-द्रुम-मूल-भाजिविजितेरत्नासनेसंस्थिते । दिव्यंचारुण-चञ्चुकाधर-रुचादेव्याकृतालिंगनः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक विनियोगः): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
भक्तेभ्यःकर-रत्न-पात्र-भरितंस्वर्णदधानोभृशम् । स्वर्णाकर्षण-भैरवोभवतुमेस्वर्गापवर्ग-प्रदः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14 ॥ श्री ॥
।। स्तोत्र-पाठ ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15 ॥ श्री ॥
ॐनमस्तेऽस्तुभैरवाय, ब्रह्म-विष्णु-शिवात्मने, नमःत्रैलोक्य-वन्द्याय, वरदायपरात्मने ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 16 ॥ श्री ॥
रत्न-सिंहासनस्थाय, दिव्याभरण-शोभिने । नमस्तेऽनेक-हस्ताय, ह्यनेक-शिरसेनमः । नमस्तेऽनेक-नेत्राय, ह्यनेक-विभवेनमः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 16): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 17 ॥ श्री ॥
नमस्तेऽनेक-कण्ठाय, ह्यनेकान्तायतेनमः । नमोस्त्वनेकैश्वर्याय, ह्यनेक-दिव्य-तेजसे ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 17): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 18 ॥ श्री ॥
अनेकायुध-युक्ताय, ह्यनेक-सुर-सेविने । अनेक-गुण-युक्ताय, महा-देवायतेनमः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 18): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 19 ॥ श्री ॥
नमोदारिद्रय-कालाय, महा-सम्पत्-प्रदायिने । श्रीभैरवी-प्रयुक्ताय, त्रिलोकेशायतेनमः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 19): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 20 ॥ श्री ॥
दिगम्बर ! नमस्तुभ्यं, दिगीशायनमोनमः । नमोऽस्तुदैत्य-कालाय, पाप-कालायतेनमः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 20): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 21 ॥ श्री ॥
सर्वज्ञायनमस्तुभ्यं, नमस्तेदिव्य-चक्षुषे । अजितायनमस्तुभ्यं, जितामित्रायतेनमः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 21): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 22 ॥ श्री ॥
नमस्तेरुद्र-पुत्राय, गण-नाथायतेनमः । नमस्तेवीर-वीराय, महा-वीरायतेनमः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 22): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 23 ॥ श्री ॥
नमोऽस्त्वनन्त-वीर्याय, महा-घोरायतेनमः । नमस्तेघोर-घोराय, विश्व-घोरायतेनमः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 23): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 24 ॥ श्री ॥
नमःउग्रायशान्ताय, भक्तेभ्यःशान्ति-दायिने । गुरवेसर्व-लोकानां, नमःप्रणव-रुपिणे ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 24): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 25 ॥ श्री ॥
नमस्तेवाग्-भवाख्याय, दीर्घ-कामायतेनमः । नमस्तेकाम-राजाय, योषित्कामायतेनमः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 25): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 26 ॥ श्री ॥
दीर्घ-माया-स्वरुपाय, महा-माया-पतेनमः । सृष्टि-माया-स्वरुपाय, विसर्गायसम्यायिने ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 26): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 27 ॥ श्री ॥
रुद्र-लोकेश-पूज्याय, ह्यापदुद्धारणायच । नमोऽजामल-बद्धाय, सुवर्णाकर्षणायते ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 27): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 28 ॥ श्री ॥
नमोनमोभैरवाय, महा-दारिद्रय-नाशिने । उन्मूलन-कर्मठाय, ह्यलक्ष्म्यासर्वदानमः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 28): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 29 ॥ श्री ॥
नमोलोक-त्रेशाय, स्वानन्द-निहितायते । नमःश्रीबीज-रुपाय, सर्व-काम-प्रदायिने ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 29): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 30 ॥ श्री ॥
नमोमहा-भैरवाय, श्रीरुपायनमोनमः । धनाध्यक्ष ! नमस्तुभ्यं, शरण्यायनमोनमः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 30): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 31 ॥ श्री ॥
नमःप्रसन्न-रुपाय, ह्यादि-देवायतेनमः । नमस्तेमन्त्र-रुपाय, नमस्तेरत्न-रुपिणे ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 31): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 32 ॥ श्री ॥
नमस्तेस्वर्ण-रुपाय, सुवर्णायनमोनमः । नमःसुवर्ण-वर्णाय, महा-पुण्यायतेनमः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 32): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 33 ॥ श्री ॥
नमःशुद्धायबुद्धाय, नमःसंसार-तारिणे । नमोदेवायगुह्याय, प्रबलायनमोनमः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 33): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 34 ॥ श्री ॥
नमस्तेबल-रुपाय, परेषांबल-नाशिने । नमस्तेस्वर्ग-संस्थाय, नमोभूर्लोक-वासिने ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 34): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 35 ॥ श्री ॥
नमःपाताल-वासाय, निराधारायतेनमः । नमोनमःस्वतन्त्राय, ह्यनन्तायनमोनमः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 35): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 36 ॥ श्री ॥
द्वि-भुजायनमस्तुभ्यं, भुज-त्रय-सुशोभिने । नमोऽणिमादि-सिद्धाय, स्वर्ण-हस्तायतेनमः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 36): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 37 ॥ श्री ॥
पूर्ण-चन्द्र-प्रतीकाश-वदनाम्भोज-शोभिने । नमस्तेस्वर्ण-रुपाय, स्वर्णालंकार-शोभिने ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 37): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 38 ॥ श्री ॥
नमःस्वर्णाकर्षणाय, स्वर्णाभायचतेनमः । नमस्तेस्वर्ण-कण्ठाय, स्वर्णालंकार-धारिणे ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 38): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 39 ॥ श्री ॥
स्वर्ण-सिंहासनस्थाय, स्वर्ण-पादायतेनमः । नमःस्वर्णाभ-पाराय, स्वर्ण-काञ्ची-सुशोभिने ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 39): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 40 ॥ श्री ॥
नमस्तेस्वर्ण-जंघाय, भक्त-काम-दुघात्मने । नमस्तेस्वर्ण-भक्तानां, कल्प-वृक्ष-स्वरुपिणे ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 40): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 41 ॥ श्री ॥
चिन्तामणि-स्वरुपाय, नमोब्रह्मादि-सेविने । कल्पद्रुमाधः-संस्थाय, बहु-स्वर्ण-प्रदायिने ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 41): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 42 ॥ श्री ॥
भय-कालायभक्तेभ्यः, सर्वाभीष्ट-प्रदायिने । नमोहेमादि-कर्षाय, भैरवायनमोनमः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 42): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 43 ॥ श्री ॥
स्तवेनानेनसन्तुष्टो, भवलोकेश-भैरव । पश्यमांकरुणाविष्ट, शरणागत-वत्सल । श्रीभैरवधनाध्यक्ष, शरणंत्वांभजाम्यहम् । प्रसीदसकलान्कामान्, प्रयच्छममसर्वदा ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 43): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 44 ॥ श्री ॥
।। फल-श्रुति ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 44): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 45 ॥ श्री ॥
श्रीमहा-भैरवस्येदं, स्तोत्रसूक्तंसु-दुर्लभम् । मन्त्रात्मकंमहा-पुण्यं, सर्वैश्वर्य-प्रदायकम् ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 45): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 46 ॥ श्री ॥
यःपठेन्नित्यमेकाग्रं, पातकैःसविमुच्यते । लभतेचामला-लक्ष्मीमष्टैश्वर्यमवाप्नुयात् ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 46): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 47 ॥ श्री ॥
चिन्तामणिमवाप्नोति, धेनुंकल्पतरुंध्रुवम् । स्वर्ण-राशिमवाप्नोति, सिद्धिमेवसमानवः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 47): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 48 ॥ श्री ॥
संध्याययःपठेत्स्तोत्र, दशावृत्त्यानरोत्तमैः । स्वप्नेश्रीभैरवस्तस्य, साक्षाद्भूतोजगद्-गुरुः । स्वर्ण-राशिददात्येव, तत्क्षणान्नास्तिसंशयः । सर्वदायःपठेत्स्तोत्रं, भैरवस्यमहात्मनः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 48): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 49 ॥ श्री ॥
लोक-त्रयंवशीकुर्यात्, अचलांश्रियंचाप्नुयात् । नभयंलभतेक्वापि, विघ्न-भूतादि-सम्भव ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 49): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 50 ॥ श्री ॥
म्रियन्तेशत्रवोऽवश्यमलक्ष्मी-नाशमाप्नुयात् । अक्षयंलभतेसौख्यं, सर्वदामानवोत्तमः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 50): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 51 ॥ श्री ॥
अष्ट-पञ्चाशताणढ्यो, मन्त्र-राजःप्रकीर्तितः । दारिद्र्य-दुःख-शमनं, स्वर्णाकर्षण-कारकः ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 51): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 52 ॥ श्री ॥
ययेनसंजपेत्धीमान्, स्तोत्रवाप्रपठेत्सदा । महा-भैरव-सायुज्यं, स्वान्त-कालेभवेद्ध्रुवं ।।
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक 52): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
। इति स्वर्णाकर्षण भैरव स्तोत्र सम्पूर्णम्
हिंदी भावार्थ: श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ भगवान कालभैरव / बटुक भैरव की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
भगवान कालभैरव / बटुक भैरव का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
❓

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री सर्वाकर्षण भैरव स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।