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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 देवाधिदेव महादेव शिव

श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम्

श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। शिव महापुराण में वर्णित यह स्तुति देवाधिदेव महादेव शिव के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता भगवान सदाशिव / महर्षि वेदव्यास
स्रोत / ग्रन्थ शिव महापुराण
शुभ दिन / तिथि सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि
जप माला रुद्राक्ष माला - 1, 3 अथवा 11 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
शिव हरे शिव राम सखे प्रभो त्रिविधतापनिवारण हे विभो । अज जनेश्वर यादव पाहि मां शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ।। 1 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
कमललोचन राम दयानिधे हरगुरो गजररक्षक गोपते । शिवतनो भव शंकर पाहि मां शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ।। 2 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
सुजनरञ्जन मंगलमन्दिरं भजति ते पुरुष: परमं पदम् । भवति तस्य सुखं परमद्भुतं शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ।। 3 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
जय युधिष्ठिरवल्लभ भूपते जय जयार्जितपुण्यपयोनिधे । जय कृपामय कृष्ण नमोऽस्तु ते शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ।। 4 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
भवविमोचन माधव मापते सुकविमानसहंस शिवारते । जनकजारत राघव रक्ष मां शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ।। 5 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
अवनिमण्डलमंगल मापते जलदसुंदर राम रमापते । निगमकीर्तिगुणार्णव गोपते शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ।। 6 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
पतितपावन नाममयी लता तवयशो विमलं परिगीयते । तदपि माधव मां किमुपेक्षसे शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ।। 7 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
अमरतापरदेव रमापते विजयतस्तव नामधनोपमा । मयि कथं करुणार्णव जायते शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ।। 8 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
हनुमत: प्रिय चापकर प्रभो सुरसरिद्धृतशेखर हे गुरो । मम विभो किमु विस्मरणं कृतं शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ।। 9 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
अहरहर्जनरञ्जनसुन्दरं पठति य: शिवरामकृतं स्तवम् । विशति रामरमाचरणाम्बुजे शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ।। 10 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
प्रातरुत्थाय यो भक्त्या पठेदेकाग्रमानस: । विजयो जायते तस्य विष्णुमाराध्यमाप्नुयात् ।। 11 ।।
हिंदी भावार्थ: श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
।। इति श्री शिवरामअष्टकम स्तोत्र संपूर्णम् ।।
हिंदी भावार्थ: श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
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हिंदी भावार्थ: श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ देवाधिदेव महादेव शिव की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
देवाधिदेव महादेव शिव का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
❓

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री शिवरामाष्टक स्तोत्रम् का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर सोमवार, प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।