ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्... ऋग्वेद का यह पावन श्री सूक्तम देवी लक्ष्मी का आदि वैदिक स्तोत्र है। इसके पाठ और हवन से दरिद्रता, भूख, ऋण और अभाव का समूल विनाश होता है।
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प्रातः काल या संध्या काल में शुद्ध होकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके कमलगट्टे की माला - 1, 3 अथवा 16 पाठ पाठ करना सर्वोत्तम माना गया है।
यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।
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