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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 भगवान श्री हरि विष्णु

श्री वेंकटेश स्तोत्रं

श्री वेंकटेश स्तोत्रं सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। सनातन आगम व उपनिषद में वर्णित यह स्तुति भगवान श्री हरि विष्णु के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता वैदिक महर्षि
स्रोत / ग्रन्थ सनातन आगम व उपनिषद
शुभ दिन / तिथि गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा
जप माला तुलसी माला - 1 अथवा 3 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
सङ्कर्षणोऽनिरुद्धश्च शेषाद्रिपतिरेव च ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री वेंकटेश स्तोत्रं (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
जनार्दनः पद्मनाभो वेङ्कटाचलवासनः । सृष्टिकर्ता जगन्नाथो माधवो भक्तवत्सलः ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री वेंकटेश स्तोत्रं (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
गोविन्दो गोपतिः कृष्णः केशवो गरुडध्वजः । वराहो वामनश्चैव नारायण अधोक्षजः ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री वेंकटेश स्तोत्रं (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
श्रीधरः पुण्डरीकाक्षः सर्वदेवस्तुतो हरिः । श्रीनृसिंहो महासिंहः सूत्राकारः पुरातनः ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री वेंकटेश स्तोत्रं (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
रमानाथो महीभर्ता भूधरः पुरुषोत्तमः । चोळपुत्रप्रियः शान्तो ब्रह्मादीनां वरप्रदः ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री वेंकटेश स्तोत्रं (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
श्रीनिधिः सर्वभूतानां भयकृद्भयनाशनः । श्रीरामो रामभद्रश्च भवबन्धैकमोचकः ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री वेंकटेश स्तोत्रं (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
भूतावासो गिरावासः श्रीनिवासः श्रियःपतिः । अच्युतानन्तगोविन्दो विष्णुर्वेङ्कटनायकः ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री वेंकटेश स्तोत्रं (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
सर्वदेवैकशरणं सर्वदेवैकदैवतम् । समस्तदेवकवचं सर्वदेवशिखामणिः ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री वेंकटेश स्तोत्रं (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
इतीदं कीर्तितं यस्य विष्णोरमिततेजसः । त्रिकाले यः पठेन्नित्यं पापं तस्य न विद्यते ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री वेंकटेश स्तोत्रं (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
राजद्वारे पठेद्घोरे सङ्ग्रामे रिपुसङ्कटे । भूतसर्पपिशाचादिभयं नास्ति कदाचन ॥ १० ॥
हिंदी भावार्थ: श्री वेंकटेश स्तोत्रं (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
अपुत्रो लभते पुत्रान् निर्धनो धनवान् भवेत् । रोगार्तो मुच्यते रोगाद् बद्धो मुच्येत बन्धनात् ॥ ११ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री वेंकटेश स्तोत्रं (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
यद्यदिष्टतमं लोके तत्तत्प्राप्नोत्यसंशयः । ऐश्वर्यं राजसम्मानं भक्तिमुक्तिफलप्रदम् ॥ १२ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री वेंकटेश स्तोत्रं (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
विष्णोर्लोकैकसोपानं सर्वदुःखैकनाशनम् । सर्वैश्वर्यप्रदं नॄणां सर्वमङ्गलकारकम् ॥ १३ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री वेंकटेश स्तोत्रं (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14 ॥ श्री ॥
मायावी परमानन्दं त्यक्त्वा वैङ्कुण्ठमुत्तमम् । स्वामिपुष्करिणीतीरे रमया सह मोदते ॥ १४ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री वेंकटेश स्तोत्रं (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15 ॥ श्री ॥
कल्याणाद्भुतगात्राय कामितार्थप्रदायिने । श्रीमद्वेङ्कटनाथाय श्रीनिवासाय ते नमः ॥ १५ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री वेंकटेश स्तोत्रं (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 16 ॥ श्री ॥
वेङ्कटाद्रिसमं स्थानं ब्रह्माण्डे नास्ति किञ्चन । वेङ्कटेशसमो देवो न भूतो न भविष्यति ॥ १६ ॥
हिंदी भावार्थ: श्री वेंकटेश स्तोत्रं (श्लोक 16): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
॥ इति श्री वेङ्कटेश स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ: श्री वेंकटेश स्तोत्रं (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ भगवान श्री हरि विष्णु की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
भगवान श्री हरि विष्णु का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री वेंकटेश स्तोत्रं का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।