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BHAKTI KI SHAKTI
🔱 परमेश्वर व वैदिक ऋषि

तन्त्र दोष शांति स्तोत्र

तन्त्र दोष शांति स्तोत्र सनातन धर्म का अत्यंत पावन और चमत्कारी वैदिक स्तोत्र है। सनातन आगम व उपनिषद में वर्णित यह स्तुति परमेश्वर व वैदिक ऋषि के परम स्वरूप, अनुग्रह और संकटमोचक सामर्थ्य का गुणगान करती है।

रचयिता वैदिक महर्षि
स्रोत / ग्रन्थ सनातन आगम व उपनिषद
शुभ दिन / तिथि नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त
जप माला रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला - 1 पाठ
श्लोक संख्या 1 ॥ श्री ॥
किसी भी शुक्रवार शाम के समय 5 से 9 के बीच या फिर किसी भी रविवार को सुबह 7 से 11 बजे के बीच लाल ऊनि आसन पर बैठ कर या खड़े होकर इस तन्त्र शान्ति मंत्र को 3 बार बोल कर 21 पढना चाहियें.. इसके पाठ मात्र से ही.. सभी विघ्न और तंत्र दोष नष्ट होकर घर की शान्ति हो जाती है । घर, दुकान और ऑफिस पर ऐसा प्रयोग दुबारा न हो.. रक्षा रहे इसके लिए… घर, दुकान ऑफिस की चौकट पर.. सिद्ध फेत्कारिणी गुटिका लाल कपडें में बांधकर किसी भी मंगलवार लगा दे। तन्त्र शान्ति नश्यन्तु प्रेतकुष्माण्डा नश्यन्तु दूष का नराः । साधकानां शिवाः सन्तु आम्नायपरिपातिनाम् ।। 1 ।।
हिंदी भावार्थ: तन्त्र दोष शांति स्तोत्र (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2 ॥ श्री ॥
जयन्ति मातरः सर्वा जयन्ति योगिनीगणाः । जयन्ति सिद्धडाकिन्यो जयन्ति गुरुपङ्क्तयः ॥ 2 ॥
हिंदी भावार्थ: तन्त्र दोष शांति स्तोत्र (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3 ॥ श्री ॥
जयन्ति साधकाः सर्वे विशुद्धाः साधकाश्च ये । जयन्ति पूज समयाचारसम्पन्ना का नराः ॥ 3 ॥
हिंदी भावार्थ: तन्त्र दोष शांति स्तोत्र (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4 ॥ श्री ॥
नन्दन्तु चाणिमासिद्धाः नन्दन्तु कुलपालकाः । देवताः सर्वे तृप्यन्तु इन्द्राद्या वास्तुदेवताः ॥ 4 ॥
हिंदी भावार्थ: तन्त्र दोष शांति स्तोत्र (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5 ॥ श्री ॥
चचन्द्रसूर्यादयो देवास्तृप्यन्तु भक्तितत: । मम नक्षत्राणि ग्रहा योगा करणा राशयश्च ये ।। 5 ।।
हिंदी भावार्थ: तन्त्र दोष शांति स्तोत्र (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6 ॥ श्री ॥
सर्वे ते सुखिनो यान्तु सर्पा नश्यन्तु पक्षिणः । पशवस्तुरगाचैव पर्वताः कन्दरा गुहाः ॥ 6 ॥
हिंदी भावार्थ: तन्त्र दोष शांति स्तोत्र (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7 ॥ श्री ॥
ऋषयो ब्राह्मणाः सर्वे शान्ति कुर्वन्तु सर्वदा । स्तुता मे विदिताः सन्तु सिद्धास्तिष्ठन्तु पूजकाः ॥ 7 ॥
हिंदी भावार्थ: तन्त्र दोष शांति स्तोत्र (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
ये ये पापधियस्सुदूषणरता मन्निन्दकाः पूजने । वेदाचारविमर्दनेष्टहृदया भ्रष्टष्य ये साधकाः ॥
हिंदी भावार्थ: तन्त्र दोष शांति स्तोत्र (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8 ॥ श्री ॥
दृष्टवा चक्रमपूर्वमन्दहृदया ये कोलिका दूषकास्ते । ते यान्तु विनाशमत्र समय श्री भैरवस्याज्ञया ।। 8 ।।
हिंदी भावार्थ: तन्त्र दोष शांति स्तोत्र (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9 ॥ श्री ॥
द्वेष्टारः साधकानां सदैवाम्नायदूषकाः । डाकिनीनां मुखे यान्तु तृप्तास्तत्पिशितैः स्तुताः ।। 9 ।।
हिंदी भावार्थ: तन्त्र दोष शांति स्तोत्र (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10 ॥ श्री ॥
ये वा शक्तिपरायणा: शिवपरा ये वैष्णवाः साधवः । सर्वस्मादखिले सुराधिपमजं सेव्यं सुरेः सन्ततम् ॥ 10 ॥
हिंदी भावार्थ: तन्त्र दोष शांति स्तोत्र (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11 ॥ श्री ॥
शक्तिं विष्णुधिया शिवं च सुधिया श्री कृष्णबुद्धया च ये । सेवन्ते त्रिपुरं त्वभेदमतयो गच्छन्तु मोक्षन्तु ते ॥ 11 ॥
हिंदी भावार्थ: तन्त्र दोष शांति स्तोत्र (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12 ॥ श्री ॥
शत्रवो नाशमायान्तु मम निन्दाकरच ये । द्वेष्टारः साधकानां च ते नश्यन्तु शिवाज्ञया ॥ 12 ॥
हिंदी भावार्थ: तन्त्र दोष शांति स्तोत्र (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13 ॥ श्री ॥
ततः परं पठेत स्तोत्रमानन्दस्तोत्रमुत्तमम् ॥
हिंदी भावार्थ: तन्त्र दोष शांति स्तोत्र (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति ॥ श्री ॥
॥ इति तन्त्र शान्ति स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ: तन्त्र दोष शांति स्तोत्र (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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संबंधित चालीसा, आरती, पूजन एवं पंचांग

इस स्तोत्र साधना के साथ संबंधित चालीसा, आरती, पूजन विधि व आज का शुभ मुहूर्त पंचांग भी अवश्य देखें:

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पाठ की दिव्य फलश्रुति व लाभ

  • ✓ परमेश्वर व वैदिक ऋषि की अविरल कृपा, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति
  • ✓ अज्ञात भय, मानसिक तनाव, कलह और गृह दोषों का निवारण
  • ✓ कार्यक्षेत्र, व्यापार और विद्या में आने वाले विघ्नों पर विजय
  • ✓ नित्य पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और सौभाग्य में वृद्धि
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स्तोत्र पाठ विधि एवं नियम

1
शुद्धि व स्नान
प्रातः काल स्नानोपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2
आसन व दीप
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
3
ध्यान व अर्पण
परमेश्वर व वैदिक ऋषि का ध्यान कर पुष्प, चंदन, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।
4
संकल्प व पाठ
हाथ में जल और अक्षत लेकर अपने मनोरथ का संकल्प करें और शांत मन से स्तोत्र का पाठ करें।
5
क्षमा प्रार्थना व समर्पण
पाठ उपरांत अज्ञानतावश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और आरती करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तन्त्र दोष शांति स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए? ▼

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त अथवा संध्या काल में शुद्ध होकर नित्य प्रातः, शुभ मुहूर्त पर पाठ करना सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

इस स्तोत्र के मुख्य लाभ क्या हैं? ▼

यह पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मबल, शांति, सुरक्षा और अभीष्ट फल प्रदान करता है।