श्लोक संख्या 1
॥ श्री ॥
आस्फालितस्वकभुजस्फुटिताद्रिकाण्डं द्राङ्मैथिलीनयननन्दनमद्य वन्दे ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2
॥ श्री ॥
मध्येनिशाचरमहाभयदुर्विषह्यं घोराद्भुतव्रतमिदं यददश्चचार ।
पत्ये तदस्य बहुधापरिणामदूतं सीतापुरस्कृततनुं हनुमन्तमीडे ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3
॥ श्री ॥
यः पादपङ्कजयुगं रघुनाथपत्न्या नैराश्यरूषितविरक्तमपि स्वरागैः ।
प्रागेव रागि विदधे बहु वन्दमानो वन्देऽञ्जनाजनुषमेव विशेषतुष्ट्यै ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4
॥ श्री ॥
ताञ्जानकीविरहवेदनहेतुभूतान् द्रागाकलय्य सदशोकवनीयवृक्षान् ।
लङ्कालकानिव घनानुदपाटयद्य-स्तं हेमसुन्दरकपिं प्रणमामि पुष्ट्यै ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5
॥ श्री ॥
घोषप्रतिध्वनितशैलगुहासहस्र-संभ्रान्तनादितवलन्मृगनाथयूथम् ।
अक्षक्षयक्षणविलक्षितराक्षसेन्द्र-मिन्द्रं कपीन्द्रपृतनावलयस्य वन्दे ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6
॥ श्री ॥
हेलाविलङ्घितमहार्णवमप्यमन्दं घूर्णद्गदाविहतिविक्षतराक्षसेषु ।
स्वम्मोदवारिधिमपारमिवेक्षमाणं वन्देऽहमक्षयकुमारकमारकेशम् ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7
॥ श्री ॥
जम्भारिजित्प्रसभलम्बितपाशबन्धं ब्रह्मानुरोधमिव तत्क्षणमुद्वहन्तम् ।
रौद्रावतारमपि रावणदीर्घदृष्टि-सङ्कोचकारणमुदारहरिं भजामि ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8
॥ श्री ॥
दर्पोन्नमन्निशिचरेश्वरमूर्धचञ्च-त्कोटीरचुम्बि निजबिम्बमुदीक्ष्य हृष्टम् ।
पश्यन्तमात्मभुजयन्त्रणपिष्यमाण-तत्कायशोणितनिपातमपेक्षि वक्षः ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9
॥ श्री ॥
अक्षप्रभृत्यमरविक्रमवीरनाश-क्रोधादिव द्रुतमुदञ्चितचन्द्रहासाम् ।
निद्रापिताभ्रघनगर्जनघोरघोषैः संस्थम्भयन्तमभिनौमि दशास्यमूर्तिम् ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10
॥ श्री ॥
आशंस्यमानविजयं रघुनाथधाम शंसन्तमात्मकृतभूरिपराक्रमेण ।
दौत्ये समागमसमन्वयमादिशन्तं वन्दे हरेः क्षितिभृतः पृतनाप्रधानम् ॥ १० ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11
॥ श्री ॥
यस्यौचितीं समुपदिष्टवतोऽधिपुच्छं दम्भान्धितां धियमपेक्ष्य विवर्धमानः ।
नक्तञ्चराधिपतिरोषहिरण्यरेता लङ्कां दिधक्षुरपतत्तमहं वृणोमि ॥ ११ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12
॥ श्री ॥
क्रन्दन्निशाचरकुलां ज्वलनावलीढैः साक्षाद्गृहैरिव बहिः परिदेवमानाम् ।
स्तब्धस्वपुच्छतटलग्नकृपीटयोनि-दन्दह्यमाननगरीं परिगाहमानाम् ॥ १२ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13
॥ श्री ॥
मूर्तैर्गृहासुभिरिव द्युपुरं व्रजद्भि-र्व्योम्नि क्षणं परिगतं पतगैर्ज्वलद्भिः ।
पीताम्बरं दधतुमुच्छ्रितदीप्ति पुच्छं सेनां वहद्विहगराजमिवाहमीडे ॥ १३ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14
॥ श्री ॥
स्थम्भीभवत्स्वगुरुवालधिलग्नवह्नि-ज्वालोल्ललद्ध्वजपटामिव देवतुष्ट्यै ।
वन्दे यथोपरि पुरो दिवि दर्शयन्त-मद्यैव रामविजयाजिकवैजयन्तीम् ॥ १४ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15
॥ श्री ॥
रक्षक्षयैकचितकक्षकपूश्चितौ यः सीताशुचो निजविलोकनतो मृतायाः ।
दाहं व्यधादिव तदन्त्यविधेयभूतं लाङ्गूलदत्तदहनेन मुदे स नोऽस्तु ॥ १५ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
न्यासः
॥ श्री ॥
आशुद्धये रघुपतिप्रणयैकसाक्ष्ये वैदेहराजदुहितुः सरिदीश्वराय ।
न्यासं ददानमिव पावकमापतन्त-मब्धौ प्रभञ्जनतनूजनुषं भजामि ॥ १६ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक न्यासः): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 17
॥ श्री ॥
रक्षस्स्वतृप्तिरुडशान्तिविशेषशोण-मक्षक्षयक्षणविधानुमितात्मदाक्ष्यम् ।
भास्वत्प्रभातरविभानुभरावभासं लङ्काभयङ्करममुं भगवन्तमीडे ॥ १७ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 17): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 18
॥ श्री ॥
तीर्त्वोदधिं जनकजार्पितमाप्य चूडा-रत्नं रिपोरपि पुरं परमस्य दग्ध्वा ।
श्रीरामहर्षगलदश्र्वभिषिच्यमानं तं ब्रह्मचारिवरवानरमाश्रयेऽहम् ॥ १८ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 18): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 19
॥ श्री ॥
यः प्राणवायुजनितो गिरिशस्य शान्तः शिष्योऽपि गौतमगुरुर्मुनिशंकरात्मा ।
हृद्यो हरस्य हरिवद्धरितां गतोऽपि धीधैर्यशास्त्रविभवेऽतुलमाश्रये तं ॥ १९ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 19): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 20
॥ श्री ॥
स्कन्धेऽधिवाह्य जगदुत्तरगीतिरीत्या यः पार्वतीश्वरमतोषयदाशुतोषम् ।
तस्मादवाप च वरानपरानवाप्यान् तं वानरं परमवैष्णवमीशमीडे ॥ २० ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 20): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 21
॥ श्री ॥
उमापतेः कविपतेः स्तुतिर्बाल्यविजृम्भिता ।
हनूमतस्तुष्टयेऽस्तु वीरविंशतिकाभिधा ॥ २१ ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक 21): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति
॥ श्री ॥
॥ इति श्री वीरविंशतिकाव्यं श्रीहनुमत्स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
हिंदी भावार्थ:
वीरा विम्सती काव्यं हनुमान स्तोत्रं (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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