श्लोक संख्या 1
॥ श्री ॥
।। श्री गणपति स्तोत्रम् ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 1
॥ श्री ॥
जेतुं यस्त्रिपुरं हरेण हरिणा व्याजाद्वलिं बध्नता स्त्रष्टुं वारिभवोद्भवेन भुवनं शेषेण धर्तुं धराम् ।
पार्वत्या महिषासुरप्रमथने सिद्धाधिपै: सिद्धये ध्यात: पञ्चशरेण विश्वजितये पायात्स नागानन: ।। 1 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 1): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 2
॥ श्री ॥
विघ्नध्वान्तनिवारणैकतरणिर्विघ्नाटवीहव्यवाड् विघ्नव्यालकुलाभिमानगरुडो विघ्नेभपञ्चानन: ।
विघ्नोत्तुंगगिरिप्रभेदनपविर्विघ्नाम्बुधेर्वाडवो विघ्नाघौघघनप्रचण्डपवनो विघ्नेश्वर: पातु न: ।। 2 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 2): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 3
॥ श्री ॥
खर्वं स्थूलतनुं गजेन्द्रवदनं लम्बोदरं सुन्दरं प्रस्यन्दन्मदगन्धलुब्धमधुपव्यालोलगंडस्थलम् ।
दन्ताघातविदारितारिरुधिरै: सिन्दूरशोभाकरं वन्दे शैलसुतासुतं गणपतिं सिद्धिप्रदं कामदम् ।। 3 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 3): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 4
॥ श्री ॥
गजाननाय महसे प्रत्यूहतिमिरच्छिदे ।
अपारकरुणापूरतरंगितदृशे नम: ।। 4 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 4): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 5
॥ श्री ॥
अगजाननपद्मार्कं गजाननमहर्निशम् ।
अनेकदन्तं भक्तानामेकदंतमुपास्महे ।। 5 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 5): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 6
॥ श्री ॥
श्वेतांग श्वेतवस्त्रं सितकुसुमगणै: पूजितं श्वेतगन्धै: क्षीराब्धौ रत्नदीपै: सुरनरतिलकं रत्नसिंहासनस्थम् ।
दोर्भि: पाशांगकुशाब्जाभयवरमनसं चन्द्रमौलिं त्रिनेत्रं ध्यायेच्छान्त्यर्थमीशं गणपतिममलं श्रीसमेतं प्रसन्नम् ।। 6 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 6): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 7
॥ श्री ॥
आवाहये तं गणराजदेवं रक्तोत्पलाभासमशेषवन्द्यम् ।
विघ्नान्तकं विघ्नहरं गणेशं भजामि रौद्रं सहितं च सिद्धया ।। 7 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 7): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 8
॥ श्री ॥
यं ब्रह्म वेदान्तविदो वदन्ति परं प्रधानं पुरुषं तथान्ये ।
विश्वोद्गते: कारणमीश्वरं वा तस्मै नमो विघ्नविनाशनाय ।। 8 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 8): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 9
॥ श्री ॥
विघ्नेश वीर्याणि विचित्रकाणि वंदीजनैर्मागधकै: स्मृतानि ।
श्रुत्वा समुत्तिष्ठ गजानन त्वं ब्राह्मो जगन्मंगलकं कुरुष्व ।। 9 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 9): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 10
॥ श्री ॥
गणेश हेरम्ब गजाननेति महोदर स्वानुभवप्रकाशिन् ।
वरिष्ठ सिद्धिप्रिय बुद्धिनाथ वदन्त एवं त्यजत प्रभीती: ।। 10 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 10): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 11
॥ श्री ॥
अनेकविघ्नान्तक वक्रतुंड स्वसंज्ञवासिंश्च चतुर्भुजेति ।
कवीश देवान्तकनाशकारिन् वदन्त एवं त्यजत प्रभीती: ।। 11 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 11): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 12
॥ श्री ॥
अनन्तचिद्रूपमयं गणेशं ह्राभेदभेदादिविहीनमाद्यम् ।
ह्रदि प्रकाशस्य धरं स्वधीस्थं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।। 12 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 12): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 13
॥ श्री ॥
विश्वादिभूतं ह्रदि योगिनां वै प्रत्यक्षरूपेण विभान्तमेकम् ।
सदा निरलाम्बसमाधिगम्यं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।। 13 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 13): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 14
॥ श्री ॥
यदीयवीर्येण समर्थभूता माया तया संरचितं च विश्वम् ।
नागात्मकं ह्रात्मतया प्रतीतं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।। 14 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 14): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 15
॥ श्री ॥
सर्वान्तरे संस्थितमेकगूढं यदाज्ञया सर्वमिदं विभाति ।
अनन्तरूपं ह्रदि बोधकं वै तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।। 15 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 15): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 16
॥ श्री ॥
यं योगिनी योगबलेन साध्यं कुर्वन्ति तं क: स्तवनेन नौति ।
अत: प्रणामेन सुसिद्धिदोऽस्तु तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।। 16 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 16): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 17
॥ श्री ॥
देवेन्द्रमौलिमन्दारमकरन्दकणारूणा: ।
विघ्नान् हरन्तु हेरम्बचरणाम्बुजरेणव: ।। 17 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 17): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 18
॥ श्री ॥
एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम् ।
विघ्ननाशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम् ।। 18 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 18): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
श्लोक संख्या 19
॥ श्री ॥
यदक्षरं पदं भ्रष्टं मात्राहीनं च यद्भवेत् ।
तत्सर्वं क्षम्यतां देव प्रसीद परमेश्वर ।। 19 ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक 19): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
समाप्ति
॥ श्री ॥
।। इति श्री विविध देव स्तोत्राणि सम्पूर्णम् ।।
हिंदी भावार्थ:
विविधदेवस्तोत्राणि (श्लोक समाप्ति): पावन स्तुति व मंगलकारी श्लोक पाठ।
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