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BHAKTI KI SHAKTI
🕉️ भग देवता / सूर्य / ऐश्वर्य ऋग्वेद (मंडल 7, सूक्त 41) ऋषि: वसिष्ठ मैत्रावरुणि छंद: त्रिष्टुप् / जगती

भाग्य सूक्तं

Bhagya Suktam

दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने, धन-सम्पत्ति व ऐश्वर्य को आकर्षित करने वाला अति कल्याणकारी प्रातःकालीन सूक्त (प्रातरग्निं प्रातरिन्द्रं...)।

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॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥

भाग्य सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ

ऋचा 1 वेदमंत्र
Bhagya Suktam प्रातरग्निं प्रातरिन्द्रं हवामहे प्रातर्मित्रावरुणा प्रातरश्विना । प्रातर्भगं पूषणं ब्रह्मणस्पतिं प्रातः सोममुत रुद्रं हुवेम ॥१॥
सरल भावार्थ: हम प्रात :  के समय पर अग्नि , वरुण ,इन्द्र  ,मित्र ,अश्विन कुमार ,भग , पूष,ब्रह्मनास्पति ,सोम ,रूद्र का आवाहन करते हैं
English Translation: भाग्य सूक्तं (ऋचा 1): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 2 वेदमंत्र
प्रातर्जितं भगमुग्रं हुवेम वयं पुत्रमदितेर्यो विधर्ता । आध्रश्चिद्यं मन्यमानस्तुरश्चिद्राजा चिद्यं भगं भक्षीत्याह ॥२॥
सरल भावार्थ: हम शक्तिशाली , युद्ध में जीतने वाले भग का आवाहन करते हैं जिनके बारे में सोचकर राजा  भी कहते हैं की हमें भग दीजिये
English Translation: भाग्य सूक्तं (ऋचा 2): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 3 वेदमंत्र
भग प्रणेतर्भग सत्यराधो भगेमां धियमुदवा ददन्नः । भग प्र णो जनय गोभिरश्वैर्भग प्र नृभिर्नृवन्तः स्याम ॥३॥
सरल भावार्थ: हे भग हमारा मार्गदर्शन करें ,आपके उपहार अनुकूल हैं ,हमें ऐश्वर्य दीजिये हे भग ! हमें घोडे {सवारी } और योधा रिश्तेदार  दीजिये
English Translation: भाग्य सूक्तं (ऋचा 3): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 4 वेदमंत्र
उतेदानीं भगवन्तः स्यामोत प्रपित्व उत मध्ये अह्नाम् । उतोदिता मघवन्सूर्यस्य वयं देवानां सुमतौ स्याम ॥४॥
सरल भावार्थ: कृपा कीजिये कि अब हमें  सुख-चैन मिले , और जैसे जैसे दिन बढ़ता जाये , जैसे -जैसे दोपहर हो , शाम हो हम देव कृपा से प्रसन्न रहे
English Translation: भाग्य सूक्तं (ऋचा 4): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 5 वेदमंत्र
भग एव भगवाँ अस्तु देवास्तेन वयं भगवन्तः स्याम । तं त्वा भग सर्व इज्जोहवीति स नो भग पुरएता भवेह ॥५॥
सरल भावार्थ: हे भग आप परमानंद प्रदान करें और आपके द्वारा देव हमें प्रसन्नता से स्वीकार करें हे भग हम आपका आवाहन करते हैं ,आप यहाँ हमारे साथ आयें
English Translation: भाग्य सूक्तं (ऋचा 5): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 6 वेदमंत्र
समध्वरायोषसो नमन्त दधिक्रावेव शुचये पदाय । अर्वाचीनं वसुविदं भगं नो रथमिवाश्वा वाजिन आ वहन्तु ॥६॥
सरल भावार्थ: इस प्रकार प्रतिदिन भग यहाँ आयें {पवित्र स्थान जैसे दधिक्रावन }जैसे शक्तिशाली घोड़े रथ को खींचते हैं वैसे ही भग का यहाँ आवाहन  किया जाये
English Translation: भाग्य सूक्तं (ऋचा 6): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 7 वेदमंत्र
अश्वावतीर्गोमतीर्न उषासो वीरवतीः सदमुच्छन्तु भद्राः । घृतं दुहाना विश्वतः प्रपीता यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः ॥७॥
सरल भावार्थ: इस प्रकार कृतार्थ सुबह हमें प्राप्त हो हमें  हमें घोडे और योधा रिश्तेदार  प्राप्त हो हे देव हमें अपने आशीर्वाद दीजिये
English Translation: भाग्य सूक्तं (ऋचा 7): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 8 वेदमंत्र
॥ इति भाग्य सूक्तं संपूर्ण ॥ आरती
सरल भावार्थ: भाग्य सूक्तं (ऋचा 8): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: भाग्य सूक्तं (ऋचा 8): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय: प्रतिदिन प्रातःकाल, रविवार, शुक्रवार

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. सूर्योदय के समय पूर्व की ओर मुख कर तांबे के लोटे में जल लें।
  2. सूर्य को अर्घ्य देकर भाग्य सूक्त का पाठ करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:

  • ✔ भाग्य का उदय होता है और दरिद्रता समाप्त होती है।
  • ✔ समस्त कार्यों में सफलता और राज-सम्मान प्राप्त होता है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाग्य सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
भाग्य सूक्तं का पाठ सामान्यतः प्रतिदिन प्रातःकाल, रविवार, शुक्रवार के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
भाग्य सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
भाग्य सूक्तं का पावन स्रोत ऋग्वेद (मंडल 7, सूक्त 41) है। इसके ऋषि वसिष्ठ मैत्रावरुणि तथा छंद त्रिष्टुप् / जगती है।
भाग्य सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से भाग्य का उदय होता है और दरिद्रता समाप्त होती है। तथा समस्त कार्यों में सफलता और राज-सम्मान प्राप्त होता है। होती है।

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