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भूदेवी (पृथ्वी देवी)
यजुर्वेद (तैत्तिरीय ब्राह्मण)
ऋषि: वैदिक ऋषि
छंद: अनुष्टुप्
भू सूक्तं
Bhu Suktam
भूमि देवी की दिव्य कृपा, भूमि-भवन लाभ और वास्तु दोष शांति हेतु पूजित पावन सूक्त।
फॉन्ट आकार:
॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥
भू सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ
ऋचा 1
वेदमंत्र
भूमि॑र्भू॒म्ना द्यौर्म॑हि॒नान्तरि॑क्षं महि॒त्वा ।
उप॑स्थे ते देव्यदिते॒ऽग्निम॑न्ना॒दम॑न्ना॒द्याया॑दधे ॥ १ ॥
Bhūmirbhūmnā dyaurmahināntarikṣaṃ mahitvā |
Upasthe te devyadite'gnimannādamannādyāyādadhe || 1 ||
सरल भावार्थ:
हे भूदेवी! आप अपने विस्तार से महान हैं, द्युलोक अपनी महत्ता से और अंतरिक्ष अपनी महिमा से परिपूर्ण है। मैं आपकी गोद में अन्न की वृद्धि के लिए अग्नि को स्थापित करता हूँ।
English Translation:
O Earth, great in your expanse, heaven in its glory, and atmosphere in its vastness; on your lap, O divine Aditi, I place the fire to ensure perpetual sustenance.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
भूमि पूजन, गृह निर्माण, मंगलवार, शुक्रवार
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- भूमि पर जल, रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
- भू सूक्त का पाठ कर पृथ्वी माता को प्रणाम करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:
- ✔ भूमि, मकान और अचल संपत्ति के क्रय-विक्रय में लाभ होता है।
- ✔ वास्तु दोष समाप्त होते हैं।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भू सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
भू सूक्तं का पाठ सामान्यतः भूमि पूजन, गृह निर्माण, मंगलवार, शुक्रवार के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
भू सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
भू सूक्तं का पावन स्रोत यजुर्वेद (तैत्तिरीय ब्राह्मण) है। इसके ऋषि वैदिक ऋषि तथा छंद अनुष्टुप् है।
भू सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से भूमि, मकान और अचल संपत्ति के क्रय-विक्रय में लाभ होता है। तथा वास्तु दोष समाप्त होते हैं। होती है।