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BHAKTI KI SHAKTI
🕉️ माता पृथिवी अथर्ववेद (कांड 12, सूक्त 1) ऋषि: अथर्वा ऋषि छंद: त्रिष्टुप् / अनुष्टुप्

भूमि सूक्तं

Bhumi Suktam

विश्व का प्रथम पर्यावरण एवं राष्ट्रप्रेम का महासूक्त, जो 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः' का अमर संदेश देता है।

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॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥

भूमि सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ

ऋचा 1 वेदमंत्र
Bhumi Suktam सत्यं बृहदृतमुग्रं दी॒क्षा तपो ब्रह्म यज्ञः पृथिवीं धारयन्ति । सा नो भूतस्य भव्यस्य पत्न्युरुं लोकं पृथिवी नः कृणोतु ॥१॥
सरल भावार्थ: सत्यकर्मी, सत्यज्ञानी, जितेन्द्रिय, ईश्वर और विद्वानों से प्रीति करनेवाले चतुर पुरुष पृथिवी पर उन्नति करते हैं। यह नियम भूत और भविष्यत् के लिये समान है ॥१॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 1): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 2 वेदमंत्र
असबाध बध्यतो मानवाना यस्या उद्वतः प्रवतः समं बहु । नानावीर्या ओषधीर्या बिभर्ति पृथिवी नः प्रथता राध्यतां नः ॥२॥
सरल भावार्थ: विचारशील मनुष्य पृथिवी पर ऊँचे, नीचे और सम स्थानों में विघ्नों को मिटाकर अन्न आदि पदार्थ प्राप्त करके कार्यसिद्धि करते जाते हैं ॥२॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 2): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 3 वेदमंत्र
यस्या समुद्र उत सिन्धुरापो यस्यामन्न कृष्टयः संबभूवुः । यस्यामिदं जिन्वति प्राणदेजत्सा नो भूमिः पूर्वपेये दधातु ॥३॥
सरल भावार्थ: जो मनुष्य समुद्र, नदी, कूप और वृष्टि के जल तथा अन्य खेती आदि से नौका, यान, कलायन्त्र आदि में अनेक प्रकार उपकार लेते हैं, वे सब जगत् को आनन्द देकर श्रेष्ठ पद पाते हैं ॥३॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 3): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 4 वेदमंत्र
यस्याश्चतस्रः प्रदिशः पृथिव्या यस्यामन्न कृष्टयः संबभूवुः । या बिभर्ति बहुधा प्राणदेजत्सा नो भूमिर्गोष्वप्यन्ने दधातु ॥४॥
सरल भावार्थ: जो मनुष्य सब ओर दृष्टि फैलाकर अन्न आदि पदार्थ प्राप्त करके सब प्राणियों की रक्षा करते हैं, वे इस भूमि पर गौ, बैल, अश्व आदि और अन्न आदि पदार्थों से परिपूर्ण रहते हैं ॥४॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 4): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 5 वेदमंत्र
यस्या पूर्वे पूर्वजना विचक्रिरे यस्या देवा असुरानभ्यवर्तयन् । गवामश्वानां वयसश्च विष्ठा भगं वर्चः पृथिवी नो दधातु ॥५॥
सरल भावार्थ: जिस प्रकार पूर्वजों ने विघ्नों को हटाकर कर्तव्य करके ऐश्वर्य पाया है, इसी प्रकार मनुष्य पुरुषार्थ करके ऐश्वर्यवान् और प्रतापवान् होवें ॥५॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 5): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 6 वेदमंत्र
विश्वभरा वसुधानी प्रतिष्ठा हिरण्यवक्षा जगतो निवेशनी ।
सरल भावार्थ: जो मनुष्य उद्योग करते हैं, वे भूपति होकर इस वसुधा पृथिवी पर सोना-चाँदी आदि की प्राप्ति से बली और धनी होकर सुख पाते हैं ॥६॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 6): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 7 वेदमंत्र
या रक्षन्त्यस्वप्ना विश्वदानी देवा भूमिं पृथिवीमप्रमादम् । सा नो मधु प्रिय दुहामथो उक्षतु॒ वर्चसा ॥७॥
सरल भावार्थ: जो मनुष्य निरालसी और अप्रमादी होकर भूमि की रक्षा करते हैं, वे इस पृथिवी पर विज्ञानी और तेजस्वी होते हैं ॥७॥- भूमि  सूक्तम्
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 7): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 8 वेदमंत्र
यार्णवेऽधि सलिलमग्र आसीद्या मायाभिरन्वचरन्मनी॒षिणः । यस्या हृदयं परमे व्योमन्त्सत्येनावृतममृतं पृथिव्याः ।
सरल भावार्थ: सृष्टि के आदि में जल के मध्य यह पृथिवी बुदबुदे के समान थी, वह आकाश में ईश्वरनियम से दृढ़ होकर अनेक रत्नों की खानि है। पहिले विचारवानों के समान सब मनुष्य पराक्रम से पृथिवी की सेवा करके बड़े राज्य के भीतर तेजस्वी और बली होकर बढ़ती करें ॥८॥- Bhumi Suktam
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 8): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 9 वेदमंत्र
यस्यामापः परिचराः समानीरहोरात्रे अप्रमादं॒ क्षरन्ति ।
सरल भावार्थ: मनुष्यों को योग्य है कि समदर्शी परोपकारी महात्माओं के समान दृढ़चित्त होकर परस्पर सेवा करते हुए पृथिवी पर अन्न आदि के लाभ से बल वीर्य बढ़ावें ॥९॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 9): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 10 वेदमंत्र
यामश्विनावमिमातां विष्णुर्यस्या विचक्रमे । इन्द्रो यां चक्र आत्मनेऽनमित्रा शचीपतिः ।
सरल भावार्थ: जिस पृथिवी को दिन और राति अपने गुणों से उपजाऊ बनाते हैं, जिस को सूर्य अपने आकर्षण, प्रकाश और वृष्टि आदि कर्म से स्थिर रखता है, और जिस पर यथार्थवक्ता, यथार्थकर्मा और यथार्थज्ञाता पुरुष विजय पाते हैं, उस पृथिवी को उपयोगी बनाकर प्रत्येक मनुष्य सब का हित करे ॥१०॥- Bhumi Suktam
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 10): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 11 वेदमंत्र
गिरयस्ते पर्वता हिमवन्तोऽरण्यं ते पृथिवि स्योनमस्तु । बभ्रु कृष्णा रोहिणी विश्वरूपा ध्रु॒वा भूमि पृथिवीमिन्द्रगुप्ताम् । अजीतोऽहतो अक्षतोऽध्यष्ठां पृथिवीमहम् ॥११॥
सरल भावार्थ: मनुष्य कला, यन्त्र, यान, विमान आदि से दुर्गम्य स्थानों में निर्विघ्न पहुँचकर पृथिवी को उपजाऊ बनावें ॥११॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 11): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 12 वेदमंत्र
यत्ते मध्य पृथिवि यच्च नभ्य यास्त ऊर्जस्तन्वः सबभू॒वुः। तासु नो धेह्यभि नः पवस्व माता भूमिः पुत्रो अह पृथिव्याः पर्जन्यः पिता स उ नः पिपर्तु ॥१२॥
सरल भावार्थ: मनुष्य नीतिविद्या, भूगर्भविद्या, भूतलविद्या और मेघविद्या आदि में निपुण होकर पृथिवी को उपकारी और सुखदायक बनावें ॥१२॥- Bhumi Suktam
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 12): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 13 वेदमंत्र
यस्या वेदि परिगृह्णन्ति भूम्या यस्या यज्ञ तन्वते विश्वकर्माणः । यस्या मीयन्ते स्वरवः पृथिव्यामूर्ध्वाः शुक्रा आहुत्याः पुरस्तात् ।
सरल भावार्थ: मनुष्यों को उचित है कि कर्मकुशल लोगों के समान अपना कर्त्तव्य पूरा करके संसार में दृढ़ कीर्ति स्थापित करें ॥१३॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 13): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 14 वेदमंत्र
यो नो द्वेषत्पृथिवि यः पृतन्याद्योभिदासान्मनसा यो वधेन॑ । त नो भूमे रन्धय पूर्वकृत्वरि ॥१४॥
सरल भावार्थ: जो मनुष्य धर्म से सत्कारपूर्वक पृथिवी की रक्षा करते हैं, वे शत्रुओं को नाश कर सकते हैं ॥१४॥ – Bhumi Suktam
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 14): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 15 वेदमंत्र
त्वज्जातास्त्वयि चरन्ति मर्त्यास्त्वं बिभर्षि द्विपद॒स्त्वं चतुष्पदः । तवेमे पृथिवि पञ्च मानवा येभ्यो ज्योतिरमृत मर्त्येभ्य उद्यन्त्सूर्यो रश्मिभिरातनोति ॥१५॥
सरल भावार्थ: जो मनुष्य पृथिवी पर उत्पन्न होकर उद्योग करते हैं, वे सब प्राणियों की रक्षा करके सूर्य की पुष्टिकारक किरणों से वृष्टि आदि द्वारा सदा आनन्द पाते हैं ॥१५॥ – Bhumi Suktam
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 15): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 16 वेदमंत्र
ता नः प्रजाः सं दुह्रतां समग्रा वाचो मधु पृथिवि धेहि मह्यम् ॥१६॥
सरल भावार्थ: जो मनुष्य वाणी की मधुरता अर्थात् सत्य वचन आदि से सब प्राणियों से उपकार लेते हैं, वे सुख पाते हैं ॥१६॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 16): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 17 वेदमंत्र
विश्वस्वं मातरमोषधीना ध्रुवा भूमिं पृथिवीं धर्मणा धृताम् ।
सरल भावार्थ: मनुष्य धर्म के साथ भूमि का शासन करके समस्त उत्तम गुणों और पदार्थों से सुख प्राप्त करें ॥१७॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 17): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 18 वेदमंत्र
महत्सधस्थ महती बभूविथ महान्वेग एजथुर्वेपथुष्टे । महास्त्वेन्द्रो रक्षत्यप्रमादम् ।
सरल भावार्थ: पुरुषार्थी पुरुष अनेक प्रयत्नों के साथ पृथिवी पर सब से मिलकर विद्या द्वारा सुवर्ण आदि धन प्राप्त करके तेजस्वी होते हैं ॥१८॥ – Bhumi Suktam
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 18): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 19 वेदमंत्र
अग्निर्भूम्यामोषधीष्वग्निमापो बिभ्रत्यग्निरश्मसु । अग्निरन्तः पुरुषेषु गोष्वश्वेष्वग्नयः ॥१९॥
सरल भावार्थ: ईश्वर नियम से पृथिवी में का अग्निताप अन्न आदि पदार्थों और प्राणियों में प्रवेश करके उन में बढ़ने तथा पुष्ट होने का सामर्थ्य देता है ॥१९॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 19): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 20 वेदमंत्र
अग्निर्दिव आ तपत्यग्नेर्देवस्योर्वन्तरिक्षम् ।
सरल भावार्थ: वह अग्नि ताप भूमि में सूर्य से आता है, तथा आकाश के पदार्थों में प्रवेश करके उन्हें बलयुक्त करता है। उस अग्नि को मनुष्य आदि प्राणी भोजन आदि से शरीर में बढ़ा कर पुष्ट और बलवान् होते हैं। तथा उसी अग्नि को हव्यद्रव्यों से प्रज्वलित करके मनुष्य वायु, जल और अन्न को शुद्ध निर्दोष करते हैं ॥२०॥ – Bhumi Suktam
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 20): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 21 वेदमंत्र
भूम्या देवेभ्यो ददति यज्ञं हव्यमरकृतम् । भूम्या मनुष्या जीवन्ति स्वधयान्नेन मर्त्याः । सा नो भूमिः प्राणमायुर्दधातु जरदष्टिं मा पृथिवी कृणोतु ॥२२॥
सरल भावार्थ: जिस प्रकार मनुष्य उत्तम पुरुषों से मिलकर श्रेष्ठ-श्रेष्ठ गुण प्राप्त करते और दूसरों को प्राप्त कराते हैं, उसी प्रकार हम उत्तम गुण प्राप्त करके अपना जीवन श्रेष्ठ बनावें ॥२२॥ –  Bhumi Suktam
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 21): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 22 वेदमंत्र
यस्ते गन्धः पृथिवि सबभूव य बिभ्रत्योषधयो यमापः ।
सरल भावार्थ: गन्धवती पृथिवी का आश्रय लेकर अनेक प्रकार से सब प्राणी और सब लोक आकार धारण करके ठहरते हैं। मनुष्य उस पृथिवी के तत्त्वज्ञान से सब कार्य सिद्ध करके ऐश्वर्यवान् होवें ॥२३॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 22): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 23 वेदमंत्र
यस्ते गन्धः पुष्करमाविवेश य सजभ्रुः सूर्याया विवाहे ।
सरल भावार्थ: पृथिवी का गन्ध अर्थात् अंश प्रविष्ट होकर पदार्थों को पुष्ट करता और सूर्य के ताप द्वारा देश-देशान्तरों में पहुँचता है। उस पृथिवी से तत्त्ववेत्ता लोग उपकार लेकर प्रसन्न होते हैं ॥२४॥- भूमि  सूक्तम्
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 23): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 24 वेदमंत्र
यस्ते गन्धः पुरुषेषु स्त्रीषु पुसु भगो रुचिः । यो अश्वे॑षु वीरेषु यो मृगेषूत हस्तिषु ।
सरल भावार्थ: पृथिवी का आश्रय लेकर संसार के देहधारी मनुष्य आदि सब प्राणी और अन्तरिक्ष के तारागण आदि सब लोक स्थित हैं, वैसे ही मनुष्य सब प्रकार उपकारी और तेजस्वी होकर विघ्नों का नाश करें ॥२५॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 24): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 25 वेदमंत्र
शिला भूमिरश्मा पासुः सा भूमिः संधृता धृता । तस्यै हिरण्यवक्षसे पृथिव्या अकर नमः ॥२६॥
सरल भावार्थ: जिस भूमि पर अनेक बड़े-छोटे पदार्थ हैं और जिस में अनेक रत्न भरे हैं, उस पृथिवी के हित के लिये मनुष्य अन्न जल आदि पदार्थ खावें ॥२६॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 25): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 26 वेदमंत्र
यस्यां वृक्षा वानस्पत्या ध्रुवास्तिष्ठन्ति विश्वहा । पृथिवी विश्वधायस धृतामच्छावदामसि ॥२७॥
सरल भावार्थ: जिस पृथिवी पर हमारे उपकार के लिये फल फूल पत्र आदिवाले वृक्ष उत्पन्न होते हैं, उसकी सावधानी हम सदा करते रहें ॥२७॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 26): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 27 वेदमंत्र
उ॒दीराणा उतासीनास्तिष्ठन्तः प्रक्रामन्तः । पद्भ्या दक्षिणसव्याभ्या मा व्यथिष्महि भूम्याम् ॥२८॥
सरल भावार्थ: मनुष्य पृथिवी पर सावधान और स्वस्थ रहकर सदा सब को सुख देवें ॥२८॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 27): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 28 वेदमंत्र
विमृग्वरीं पृथिवीमा वदामि क्षमा भूमि ब्रह्मणा वावृधानाम् । ऊर्जं पुष्ट बिभ्रतीमन्नभागं घृतं त्वाभि नि षीदेम भूमे ॥२९॥
सरल भावार्थ: विज्ञानी लोग भूगर्भविद्या, भूतलविद्या आदि द्वारा भूमि को खोजकर अनेक प्रकार के उपकारी पदार्थ प्राप्त करके स्वस्थ पुष्ट होवें ॥२९॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 28): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 29 वेदमंत्र
शुद्धा न आपस्तन्वे क्षरन्तु यो नः सेदुरप्रिये तं नि दध्मः । पवित्रे॑ण पृथिवि मोत्पुनामि ॥३०॥
सरल भावार्थ: जैसे निर्मल जल से शरीर शुद्ध करके मल का नाश करते हैं, वैसे ही मनुष्य अन्तःकरण का मल दूर करके पृथिवी पर धार्मिक व्यवहार से आत्मा की शुद्धि करें ॥३०॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 29): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 30 वेदमंत्र
यास्ते प्राचीः प्रदिशो या उदीचीर्यास्ते भूमे अधराद्याश्च पश्चात् । स्योनास्ता मह्य चरते भवन्तु मा नि पप्तं भुवने शिश्रियाणः ॥३१॥
सरल भावार्थ: जो मनुष्य चलते-फिरते रहकर पुरुषार्थ करते रहते हैं, वे पृथिवी पर सब दिशाओं में सुख भोगते हैं ॥३१॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 30): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 31 वेदमंत्र
मा नः पश्चान्मा पुरस्तान्नुदिष्ठा मोत्तरादधरादुत । स्वस्ति भूमे नो भव मा विदन्परिपन्थिनो वरीयो यावया वधम् ॥३२॥
सरल भावार्थ: मनुष्य सब दिशाओं में सावधान रहकर दुराचारियों के फन्दों से बचें ॥३२॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 31): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 32 वेदमंत्र
यावत्तेऽभि विपश्यामि भूमे सूर्येण मेदिना । तावन्मे चक्षुर्मा मेष्टोत्तरामुत्तरां समाम् ॥३३॥
सरल भावार्थ: मनुष्य ऐसा प्रयत्न करें कि विद्यायत्नपूर्वक ईश्वर की अद्भुत रचनाओं से सदा उत्तम-उत्तम क्रियाएँ करते रहें, जैसे सूर्य प्रकाश आदि से उपकार करता है ॥३३॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 32): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 33 वेदमंत्र
यच्छयानः पर्यावर्ते दक्षिणं सख्यमभि भूमे पार्श्वम् । उत्तानास्त्वा प्रतीचीं यत्पृष्टीभिरधिशेमहे । मा हिसीस्तत्र नो भूमे सर्वस्य प्रतिशीवरि ॥३४॥
सरल भावार्थ: जो मनुष्य पृथिवी को समचौरस बनाकर रहते हैं, वे सुख पाते हैं ॥३४॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 33): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 34 वेदमंत्र
यत्ते भूमे विखनामि क्षिप्रं तदपि रोहतु । मा ते मर्म विमृग्वरि मा ते हृदयमर्पिपम् ॥३५॥
सरल भावार्थ: भूतलविद्या और भूगर्भविद्या में चतुर लोग भूमि को उचित रीति से खोदकर और हल से जोतकर रत्न और अन्न आदि पदार्थ प्राप्त करें ॥३५॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 34): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 35 वेदमंत्र
ग्रीष्मस्ते भूमे वर्षाणि शरद्धे॑मन्तः शिशिरो वसन्तः । ऋतवस्ते विहिता हायनीरहोरात्रे पृथिवि नो दुहाताम् ॥३६॥
सरल भावार्थ: मनुष्यों को उचित है कि पृथिवी पर सब ऋतुओं में उचित कर्म करके पूर्ण आयु भागें ॥३६॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 35): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 36 वेदमंत्र
याप सर्पं विजमाना विमृग्वरी यस्यामासन्नग्नयो ये अप्स्वन्तः । परा दस्यून्ददती देवपीयूनिन्द्र वृणाना पृथिवी न वृत्रम् । शक्राय दध्रे वृषभाय वृष्णे ॥३७॥
सरल भावार्थ: जो मनुष्य आगे की चलती हुई पृथिवी को खोजकर अपने भीतर पुरुषार्थरूप तेज धारण करते हैं, उन विघ्ननाशक वीरों के लिये यह पृथिवी सुखदायिनी और दुराचारी दुष्टों को दुःखदायिनी होती है ॥३७॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 36): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 37 वेदमंत्र
यस्या सदोहविर्धाने यूपो यस्या निमीयते॑ । ब्रह्माणो यस्यामर्चन्त्यृग्भिः साम्ना यजुर्विदः । युज्यन्ते यस्यामृत्विजः सोममिन्द्राय पातवे ॥३८॥
सरल भावार्थ: जिस भूमि पर जितेन्द्रिय वीर पुरुष शत्रुओं को जीतते हैं, और वेदज्ञानी, योगीन्द्र परमात्मा के तत्त्वज्ञान से मोक्ष आनन्द भोगते हैं, उस भूमि पर हम अपना इष्ट सिद्ध करें।
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 37): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 38 वेदमंत्र
यस्यां पूर्वे भूतकृत ऋषयो गा उदानृचुः । सप्त सत्रेण वेधसो यज्ञेन तपसा सह ॥३९॥
सरल भावार्थ: जिस भूमि पर मनुष्य अपने शरीर की इन्द्रियों द्वारा वेदज्ञान प्राप्त करके आत्मोन्नति करते हैं, उस भूमि पर हम पुरुषार्थ करके सुख प्राप्त करें ॥३९॥ यजुर्वेद ३४।५५। में वर्णन है−(सप्त ऋषयः प्रतिहिताः शरीरे) सात ऋषि अर्थात् शब्द आदि विषय को प्राप्त करनेवाले पाँच ज्ञानेन्द्रिय, मन और बुद्धि शरीर में प्रतीति के सात ठहरे हुए हैं ॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 38): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 39 वेदमंत्र
सा नो भूमिरा दिशतु यद्धन कामयामहे । भगो अनुप्रयुङ्क्तामिन्द्र एतु पुरोगवः ॥४०॥
सरल भावार्थ: मनुष्य पृथिवी पर वीर, महात्मा, ब्राह्मणों, योगियों के अनुकरण से वेदविद्या प्राप्त करके ऐश्वर्यवान् होकर अग्रगामी होवें ॥४०॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 39): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 40 वेदमंत्र
यस्या गायन्ति नृत्यन्ति भूम्या मर्त्या व्यैलबाः । युध्यन्ते यस्यामाक्रन्दो यस्या वदति दुन्दुभिः । सा नो भूमिः प्रणुदतां सपत्नानसपत्न मा पृथिवी कृणोतु ॥४१॥
सरल भावार्थ: जिस पृथिवी पर मनुष्य ऊँचे, नीचे और मध्यम स्वर से गाते, नाचते और बाजे बजाकर युद्ध करते हैं, वहाँ पर धर्मात्मा लोग निर्विघ्न होकर सुख प्राप्त करें ॥४१॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 40): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 41 वेदमंत्र
यस्यामन्नं व्रीहियवौ यस्या इमाः पञ्च कृष्टयः । भूम्यै॑ पर्जन्यपत्न्यै नमोऽस्तु वर्षमे॑दसे ॥४२॥
सरल भावार्थ: मनुष्य पृथिवी के हित के लिये पृथिवी आदि पाँच तत्त्वों से उपकार लेकर अन्न आदि प्राप्त करें ॥४२॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 41): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 42 वेदमंत्र
यस्याः पुरो देवकृताः क्षेत्रे यस्या विकुर्वते॑ । प्रजापतिः पृथिवीं विश्वगर्भामाशामाशा रण्या नः कृणोतु ॥४३॥
सरल भावार्थ: जिस भूमि पर धर्मात्मा पुरुष राजभवन, कार्यालय आदि बनाकर अनेक प्रकार से उन्नति के काम करते हैं और जिस में से अनेक रत्न उत्पन्न होते हैं, उस पर परमात्मा हमें धर्म में स्थिर रखकर सर्वत्र प्रसन्न रक्खे ॥४३॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 42): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 43 वेदमंत्र
निधि बिभ्रती बहुधा गुहा वसु मणिं हिरण्य पृथिवी ददातु मे । वसूनि नो वसुदा रासमाना देवी दधातु सुमनस्यमाना ॥४४॥
सरल भावार्थ: जो विद्वान् मनुष्य पृथिवी को खोजते हैं, वे खानों में से अनेक रत्न और सुवर्ण आदि पाकर प्रसन्नचित्त होते हैं ॥४४॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 43): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 44 वेदमंत्र
जन बिभ्रती बहुधा विवाचस नानाधर्माणं पृथिवी यथौकसम् । सहस्र धारा द्रविणस्य मे दुहा ध्रु॒वेव धेनुरनपस्फुरन्ती ॥४५॥
सरल भावार्थ: जैसे गौ अल्पमूल्य तृण आदि खाकर गोपाल की चतुराई के अनुसार बहुमूल्य दूध देती है, वैसे ही मनुष्य परिश्रम से अनेक विद्याएँ और अनेक गुण प्राप्त करके पृथिवी पर अपनी योग्यता के अनुसार बहुत प्रकार से धनवान् होवें ॥४५॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 44): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 45 वेदमंत्र
यस्ते सर्पो वृश्चिकस्तृष्टदश्मा हेमन्तजब्धो भृमलो गुहा शये । क्रिमिर्जिन्वत्पृथिवि यद्यदेजति प्रावृषि तन्नः सर्पन्मोप सृपद्यच्छिव तेन नो मृड ॥४६॥
सरल भावार्थ: मनुष्य सदा सावधान रहें कि सब ऋतुओं में दुष्ट जीव-जन्तुओं से उन्हें क्लेश न होवे ॥४६॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 45): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 46 वेदमंत्र
ये ते पन्थानो बहवो जनायना रथस्य वर्त्मानसश्च यातवे । यैः सचरन्त्युभये॑ भद्रपापास्त पन्थान जयेमानमित्रमतस्कर यच्छिव तेन नो मृड ॥४७॥
सरल भावार्थ: जो मनुष्य पृथिवी पर ऊँचे-नीचे, भले-बुरे मार्गो का विचार करके सुमार्ग पर चलते हैं, वे कुमार्गियों से बचकर सदा सुखी रहते हैं ॥४७॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 46): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 47 वेदमंत्र
मल्व बिभ्रती गुरुभृद्भद्रपापस्य निधन तितिक्षुः । वराहेण पृथिवी सविदाना सूकराय वि जिहीते मृगाय ॥४८॥
सरल भावार्थ: पृथिवी अपने धारण आकर्षण से सब पदार्थों को अपने पर रखती है और सूर्य के सन्मुख चलने से जल आकाश में चढ़ता और बरसता है। उस पृथिवी को उपयोगी बनाने में मनुष्य प्रयत्न करें ॥४८॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 47): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 48 वेदमंत्र
ये त आरण्याः पशवो मृगा वने हिताः सिंहा व्याघ्राः पुरुषादश्चरन्ति । उल वृक पृथिवि दुच्छुनामित ऋक्षीकां रक्षो अप बाधयास्मत् ॥४९॥
सरल भावार्थ: मनुष्यों को उचित है कि हितकारी पशुओं की रक्षा करके हिंसक प्राणियों का नाश करें ॥४९॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 48): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 49 वेदमंत्र
ये गन्धर्वा अप्सरसो ये चारायाः किमीदिनः । पिशाचान्त्सर्वा रक्षासि तानस्मद्भूमे यावय ॥५०॥
सरल भावार्थ: विवेकी मनुष्यों को योग्य है कि पृथिवी पर के दुष्ट प्राणियों और रोगों का नाश करके धर्मात्माओं को सुखी रक्खें ॥५०॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 49): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 50 वेदमंत्र
या द्विपादः पक्षिणः सपतन्ति हसाः सुपर्णाः शकुना वयासि । यस्या वातो मातरिश्वेयते रजासि कृण्वंश्च्यावयश्च वृक्षान् । वातस्य प्रवामुपवामनु वात्यर्चिः ॥५१॥
सरल भावार्थ: मनुष्य पक्षियों, वायु, मेघ, प्रकाश आदि के ज्ञान और गुणों से लाभ उठाकर आनन्दित होवें ॥५१॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 50): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 51 वेदमंत्र
यस्या कृष्णमरुण च संहिते अहोरात्रे विहिते भूम्यामधि । वर्षेण भूमिः पृथिवी वृतावृता सा नो दधातु भद्रया प्रिये धामनिधामनि ॥५२॥
सरल भावार्थ: ईश्वरनियम से जिस प्रकार दिन-राति मिले हुए हैं और पृथिवी मेघमण्डल से छायी है, वैसे ही मनुष्य पृथिवी पर उत्तम बुद्धि के साथ रहकर सब स्थानों में आनन्द करें ॥५२॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 51): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 52 वेदमंत्र
द्यौश्च म इदं पृथिवी चान्तरिक्ष च मे व्यचः । अग्निः सूर्य आपो मेधां विश्वे देवाश्च सं ददुः ॥५३॥
सरल भावार्थ: जो मनुष्य संसार के पदार्थों में विज्ञानपूर्वक फैलते चले जाते हैं, वे ही विज्ञानी बुद्धि बढ़ाकर संसार को सुख देते हैं ॥५३॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 52): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 53 वेदमंत्र
अहमस्मि सहमान उत्तरो नाम भूम्याम् । अभीषाडस्मि विश्वाषाडाशामाशां विषासहिः ॥५४॥
सरल भावार्थ: जब मनुष्य योग्यता प्राप्त करके आगे बढ़ता जाता है, तब संसार में कीर्ति बढ़ाकर सब में उच्च पद पाता है ॥५४॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 53): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 54 वेदमंत्र
अदो यद्दे॑वि प्रथमाना पुरस्ताद्देवैरुक्ता व्यसर्पो महित्वम् । आ त्वा सुभूतमविशत्तदानीमकल्पयथाः प्रदिशश्चतस्रः ॥५५॥
सरल भावार्थ: जब मनुष्य पृथिवी की विस्तृत महिमा को खोजते हुए आगे बढ़ते हैं, वे ऐश्वर्यवान् होकर सब दिशाओं से समर्थ होते हैं ॥५५॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 54): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 55 वेदमंत्र
ये ग्रामा यदरण्यं याः सभा अधि भूम्याम् । ये सं॑ग्रामाः समितयस्तेषु चारु वदेम ते ॥५६॥
सरल भावार्थ: मनुष्यों को उचित है कि सब स्थानों, सब अवस्थाओं और राजसभा, न्यायसभा, धर्मसभा आदि में पृथिवी के गुणों की महिमा जानकर और बखानकर देशभक्ति करें ॥५६॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 55): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 56 वेदमंत्र
अश्व इव रजो॑ दुधुवे वि ताञ्जनान्य आक्षियन्पृथिवी यादजायत । मन्द्राग्रेत्वरी भुवनस्य गोपा वनस्पती॑ना गृभिरोषधीनाम् ॥५७॥
सरल भावार्थ: जिन अभिमानियों ने पृथिवी पर अत्याचार करके मस्तक उठाया है, वे ईश्वरनियम से सदा नष्ट हुए हैं, जैसे घोड़ा थकावट उतारने को पृथिवी पर लोटकर शरीर की मलिन धूलि हिलाकर गिरा देता है ॥५७॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 56): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 57 वेदमंत्र
यद्वदामि मधुमत्तद्वदामि यदीक्षे तद्वनन्ति मा । त्विषी॑मानस्मि जूतिमानवान्यान्हन्मि दोधतः ॥५८॥
सरल भावार्थ: जो मनुष्य समझ-बूझकर बोलते, देखते और काम करते हैं, वे ईश्वरनियम से प्रतापी और फुरतीले होकर विघ्नों को मिटाते हैं ॥५८॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 57): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 58 वेदमंत्र
शन्तिवा सुरभिः स्योना कीलालोध्नी पयस्वती । भूमिरधि ब्रवीतु मे पृथिवी पयसा सह ॥१.५९॥
सरल भावार्थ: उद्योगी पुरुष परस्पर उपदेश करके पृथिवी से अनेक सुख प्राप्त करते और कराते हैं ॥५९॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 58): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 59 वेदमंत्र
यामन्वैच्छद्धविषा विश्वकर्मान्तरर्णवे रजसि प्रविष्टाम् । भुजिष्य पात्र निहित गुहा यदाविर्भोगे अभवन्मातृमद्भ्यः ॥६०॥
सरल भावार्थ: जैसे-जैसे मनुष्य मेघमण्डल से घिरी पृथिवी को खोजते जाते हैं, उसमें अधिक-अधिक पालनशक्तियों को पाते हैं, जैसे माताओं में प्राणियों के पालन के लिये दुग्ध प्रकट होता है ॥६०॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 59): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 60 वेदमंत्र
त्वमस्यावपनी जनानामदितिः कामदुघा पप्रथाना । यत्त ऊनं तत्त आ पूरयाति प्रजापतिः प्रथमजा ऋतस्य ॥६१॥
सरल भावार्थ: जैसे परमेश्वर ने पृथिवी में अन्न आदि से प्राणियों की पालन शक्ति दी है, वैसे ही प्राणी जो कुछ खाते-पीते हैं, वह न्यूनता ईश्वरनियम से वृष्टि आदि द्वारा पूर्ण हो जाती है ॥६१॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 60): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 61 वेदमंत्र
उपस्थास्ते अनमीवा अयक्ष्मा अस्मभ्य सन्तु पृथिवि प्रसूताः । दीर्घं न आयुः प्रतिबुध्यमाना वयं तुभ्य बलिहृतः स्याम ॥६२॥
सरल भावार्थ: मनुष्य प्रयत्नपूर्वक पृथिवी पर स्वस्थ और चेतन्य रहकर धर्म के साथ परस्पर पालन करें ॥६२॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 61): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 62 वेदमंत्र
भूमे मातर्नि धेहि मा भद्रया सुप्रतिष्ठितम् । सविदाना दिवा कवे श्रियां मा धेहि भूत्याम् ॥६३॥
सरल भावार्थ: जो मनुष्य उत्तम भाव से पृथिवी पर अपना कर्तव्य पालते हैं, वे बड़ी प्रतिष्ठा पाकर ऐश्वर्यवान् और श्रीमान् होते हैं ॥६३॥
English Translation: भूमि सूक्तं (ऋचा 62): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

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सर्वोत्तम शुभ समय: प्रतिदिन, पर्यावरण दिवस, गृहप्रवेश

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. प्रातः उठकर धरती पर पैर रखने से पूर्व धरती माता से क्षमा मांगें।
  2. भूमि सूक्त की ऋचाओं का पाठ करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:

  • ✔ प्रकृति और पर्यावरण के साथ सामंजस्य स्थापित होता है।
  • ✔ समस्त प्रकार के भूमि दोष और भय समाप्त होते हैं।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भूमि सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
भूमि सूक्तं का पाठ सामान्यतः प्रतिदिन, पर्यावरण दिवस, गृहप्रवेश के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
भूमि सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
भूमि सूक्तं का पावन स्रोत अथर्ववेद (कांड 12, सूक्त 1) है। इसके ऋषि अथर्वा ऋषि तथा छंद त्रिष्टुप् / अनुष्टुप् है।
भूमि सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से प्रकृति और पर्यावरण के साथ सामंजस्य स्थापित होता है। तथा समस्त प्रकार के भूमि दोष और भय समाप्त होते हैं। होती है।

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