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BHAKTI KI SHAKTI
🕉️ वागाम्भृणी / आदिशक्ति ऋग्वेद (मंडल 10, सूक्त 125) ऋषि: वागाम्भृणी (ब्रह्मविदुषी) छंद: त्रिष्टुप् / जगती

देवी सूक्तम्

Devi Suktam

वेदों का सर्वोच्च अद्वैत शक्ति सूक्त, जिसमें ब्रह्मविदुषी वाग्देवी स्वयं को संपूर्ण ब्रह्मांड की आधारभूता परब्रह्म शक्ति घोषित करती हैं।

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॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥

देवी सूक्तम् मूल पाठ व भावार्थ

ऋचा 1 वेदमंत्र
अ॒हं रु॒द्रेभि॒र्वसु॑भिश्‍चराम्य॒हमा॑दि॒त्यैरु॒त वि॒श्वदे॑वैः । अ॒हं मि॒त्रावरु॑णो॒भा बि॑भर्म्य॒हमि॑न्द्रा॒ग्नी अ॒हम॒श्विनो॒भा ॥ १ ॥
Ahaṃ rudrebhirvasubhiścarāmyahamādityairuta viśvadevaiḥ | Ahaṃ mitrāvaruṇobhā bibharmyahamindrāgnī ahamaśvinobhā || 1 ||
सरल भावार्थ: मैं ही रुद्रों, वसुओं, आदित्यों और विश्वेदेवों के रूप में विचरण करती हूँ। मैं ही मित्र और वरुण, इंद्र और अग्नि तथा दोनों अश्विनीकुमारों को धारण करती हूँ।
English Translation: I move with the Rudras, the Vasus, the Adityas, and the Vishvedevas. I sustain both Mitra and Varuna, Indra and Agni, and the twin Ashvins.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय: दुर्गाष्टमी, नवरात्रि, शुक्रवार

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. शुद्ध चित्त से देवी यंत्र या भगवती की प्रतिमा के समक्ष बैठें।
  2. पंचोपचार पूजन कर देवी सूक्त का पाठ करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:

  • ✔ वाक् सिद्धि, ज्ञान और पराशक्ति के प्रत्यक्ष संरक्षण की प्राप्ति होती है।
  • ✔ समस्त ग्रह-बाधाएं और दरिद्रता शांत हो जाती हैं।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवी सूक्तम् का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
देवी सूक्तम् का पाठ सामान्यतः दुर्गाष्टमी, नवरात्रि, शुक्रवार के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
देवी सूक्तम् का मूल वेद स्रोत क्या है?
देवी सूक्तम् का पावन स्रोत ऋग्वेद (मंडल 10, सूक्त 125) है। इसके ऋषि वागाम्भृणी (ब्रह्मविदुषी) तथा छंद त्रिष्टुप् / जगती है।
देवी सूक्तम् का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से वाक् सिद्धि, ज्ञान और पराशक्ति के प्रत्यक्ष संरक्षण की प्राप्ति होती है। तथा समस्त ग्रह-बाधाएं और दरिद्रता शांत हो जाती हैं। होती है।

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