🕉️
ध्रुव / स्थिरता व राष्ट्र-मंगल
ऋग्वेद (मंडल 10, सूक्त 173)
ऋषि: ध्रुव आंगिरस
छंद: अनुष्टुप्
ध्रुव सूक्तम्
Dhruva Suktam
राज्याधिकार, पद-प्रतिष्ठा, पारिवारिक स्थिरता और राष्ट्र की अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने वाला पावन सूक्त।
फॉन्ट आकार:
॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥
ध्रुव सूक्तम् मूल पाठ व भावार्थ
ऋचा 1
वेदमंत्र
आ त्वा॑हार्षम॒न्तरे॑धि ध्रु॒वस्ति॑ष्ठाविचाचलिः ।
विश॑स्त्वा॒ सर्वा॑ वाञ्छन्तु॒ मा त्वद्रा॒ष्ट्रमधि॑ भ्रशत् ॥ १ ॥
Ā tvāhārṣamantaredhi dhruvastiṣṭhāvicācaliḥ |
Viśastvā sarvā vāñchantu mā tvadrāṣṭramadhi bhraśat || 1 ||
सरल भावार्थ:
मैंने तुम्हें अपने मध्य स्थापित किया है; तुम अचल और स्थिर रहो। सारी प्रजा तुम्हारी चाहना करे और राज्य कभी तुम्हारे हाथ से न छूटे।
English Translation:
I have brought you into our midst; remain steadfast and unshakeable. May all people desire your leadership; may royal sovereignty never fall from you.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय:
राज्याभिषेक, पदग्रहण, विवाह अथवा किसी स्थायी कार्य के प्रारंभ पर
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- भगवान विष्णु व ध्रुव तारे का मानसिक ध्यान करें।
- स्थिर बुद्धि और राष्ट्रकल्याण का संकल्प लें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:
- ✔ पद, प्रतिष्ठा और आजीविका में स्थिरता आती है।
- ✔ चंचलता दूर होकर अचल आत्मविश्वास स्थापित होता है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ध्रुव सूक्तम् का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
ध्रुव सूक्तम् का पाठ सामान्यतः राज्याभिषेक, पदग्रहण, विवाह अथवा किसी स्थायी कार्य के प्रारंभ पर के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
ध्रुव सूक्तम् का मूल वेद स्रोत क्या है?
ध्रुव सूक्तम् का पावन स्रोत ऋग्वेद (मंडल 10, सूक्त 173) है। इसके ऋषि ध्रुव आंगिरस तथा छंद अनुष्टुप् है।
ध्रुव सूक्तम् का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से पद, प्रतिष्ठा और आजीविका में स्थिरता आती है। तथा चंचलता दूर होकर अचल आत्मविश्वास स्थापित होता है। होती है।