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BHAKTI KI SHAKTI
🕉️ गोमाता / कामधेनु ऋग्वेद (मंडल 6, सूक्त 28) ऋषि: भरद्वाज बार्हस्पत्य छंद: त्रिष्टुप् / जगती

गौ सूक्तं

Gau Suktam

समस्त 33 कोटि देवी-देवताओं के निवास स्थल गोमाता की महिमा, धन-धान्य तथा आरोग्य प्रदान करने वाला सूक्त।

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॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥

गौ सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ

ऋचा 1 वेदमंत्र
Gau Suktam माता रूद्राणां दुहिता वसूनां स्वसादित्यानाममृतस्य नाभिः । प्र नु वोचं चिकितुषे जनाय मा गामनागामदितिं वधिष्ट ॥
सरल भावार्थ: गाय रुद्रों की माता, वसुओं की पुत्री, अदिति पुत्रों की बहिन और घृत रूप अमृत का खजाना है; प्रत्येक विचारशील पुरुष को मैंने यही समझाकर कहा है कि निरपराध एवं अवध्य गौ का वध न करो ।
English Translation: गौ सूक्तं (ऋचा 1): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 2 वेदमंत्र
आ गावो अग्मन्नुत भद्रमक्रन्त्सीदन्तु गोष्ठे रणयन्त्वस्मे । प्रजावतीः पुरूरूपा इह स्युरिन्द्राय पूर्वीरूषसो दुहानाः ॥ १ ॥
सरल भावार्थ: गाय आ गयी हैं और उन्होंने कल्याण किया है। वे गोशाला में बैठें और हमें सुख दें । यहाँ उत्तम बच्चों से युक्त बहुत रूपवाली हो जायँ और परमेश्वर के यजन के लिये उष:काल के पूर्व दूध देनेवाली हों ॥ १ ॥
English Translation: गौ सूक्तं (ऋचा 2): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 3 वेदमंत्र
इन्द्रो यज्वने गृणते च शिक्षत उपेद् ददाति न स्वं मुषायति । भूयोभूयो रयिमिदस्य वर्धयन्नभिन्ने खिल्ये नि दधाति देवयुम् ॥ २ ॥
सरल भावार्थ: ईश्वर यज्ञकर्ता और सदुपदेशकर्ता को सत्य ज्ञान देता है । वह निश्चयपूर्वक धनादि देता है और अपने को नहीं छिपाता । इसके धन को अधिकाधिक बढ़ाता है और देवत्व प्राप्त करने की इच्छा करनेवाले को अपने से भिन्न नहीं ऐसे स्थिर स्थान में धारण करता है ॥ २ ॥
English Translation: गौ सूक्तं (ऋचा 3): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 4 वेदमंत्र
न ता नशन्ति न दभाति तस्करो नासामामित्रो व्यथिरा दधर्षति । देवांश्च याभिर्यजते ददाति च ज्योगित्ताभिः सचते गोपतिः सह ॥ ३ ॥
सरल भावार्थ: वह यज्ञ की गौएँ नष्ट नहीं होतीं, चौर उनको दबाता नहीं, इनको व्यथा करनेवाला शत्रु इनपर अपना अधिकार नहीं चलाता, जिनसे देवों का यज्ञ किया जाता है और दान दिया जाता है। गोपालक उनके साथ चिरकालतक रहता है ॥ ३ ॥
English Translation: गौ सूक्तं (ऋचा 4): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 5 वेदमंत्र
न ता अर्वा रेणुककाटोऽश्नुते न संस्कृतत्रमुप यन्ति ता अभि । उरूगायमभयं तस्य ता अनु गावो मर्तस्य वि चरन्ति यज्वनः ॥ ४ ॥
सरल भावार्थ: पाँवों से धूलि उड़ानेवाला घोड़ा इन गौओं की योग्यता प्राप्त नहीं कर सकता। वे गौएँ पाकादि संस्कार करनेवाले के पास भी नहीं जातीं । वे गौएँ उस यज्ञकर्ता मनुष्य की बड़ी प्रशंसनीय निर्भयता में विचरती हैं ॥ ४ ॥
English Translation: गौ सूक्तं (ऋचा 5): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 6 वेदमंत्र
गावो भगो गाव इन्द्रो म इच्छाद्गावः सोमस्य प्रथमस्य भक्षः । इमा या गावः स जनास इन्द्र इच्छामि हृदा मनसा चिदिन्द्रम् ॥ ५ ॥
सरल भावार्थ: गौएँ धन हैं, गौएँ प्रभु हैं, गौएँ पहले सोमरस का अन्न हैं, यह मैं जानता हूँ । ये जो गौएँ हैं, हे लोगो! वही इन्द्र है । हृदय से और मन से निश्चयपूर्वक मैं इन्द्र को प्राप्त करने की इच्छा करता हूँ ॥ ५ ॥
English Translation: गौ सूक्तं (ऋचा 6): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 7 वेदमंत्र
यूयं गावो मेदयथा कृशं चिदश्रीरं चित्कृणुथा सुप्रतीकम् । भद्रं गृहं कृणुथ भद्रवाचो बृहद्वो वय उच्यते सभासु ॥ ६ ॥
सरल भावार्थ: हे गौओं! तुम दुर्बल को भी पुष्ट करती हो, निस्तेज को भी सुन्दर बनाती हो । उत्तम शब्दवाली गौओ! घर को कल्याण रूप बनाती हो, इसलिये सभाओं में तुम्हारा बड़ा यश गाया जाता है ॥ ६ ॥
English Translation: गौ सूक्तं (ऋचा 7): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 8 वेदमंत्र
प्रजावतीः सूयवसे रूशन्तीः शुद्धा अपः सुप्रपाणे पिबन्तीः । मा व स्तेन ईशत माघशंसः परि वो रूद्रस्य हेतिर्वृणक्तु ॥ ७ ॥
सरल भावार्थ: उत्तम बच्चोंवाली, उत्तम घास के लिये भ्रमण करनेवाली, उत्तम जल स्थान में शुद्ध जल पीनेवाली गौओ! चोर और पापी तुमपर अधिकार न करें । तुम्हारी रक्षा रुद्र के शस्त्र से चारों ओर से हो ॥ ७ ॥
English Translation: गौ सूक्तं (ऋचा 8): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 9 वेदमंत्र
गौ सूक्तं- अथर्ववेद का वह अंश जिसमें ब्रह्माण्ड की रचना का गौ के रूप में वर्णन किया गया है। गोदान के समय इसका पाठ किया जाता है। ॥ इति गौ सूक्तं संपूर्ण ॥ आरती
सरल भावार्थ: गौ सूक्तं (ऋचा 9): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: गौ सूक्तं (ऋचा 9): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

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सर्वोत्तम शुभ समय: गोपाष्टमी, शुक्रवार, पूर्णिमा

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. गोशाला में जाकर अथवा गोमाता की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
  2. गोमाता को हरा चारा, गुड़ और अक्षत अर्पित करें।
  3. गौ सूक्त का सस्वर पाठ कर गोमाता की प्रदक्षिणा करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:

  • ✔ समस्त पापों, वास्तु दोषों और पितृ दोषों का निवारण होता है।
  • ✔ घर में कभी अन्न, धन और पुष्टि की कमी नहीं होती।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौ सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
गौ सूक्तं का पाठ सामान्यतः गोपाष्टमी, शुक्रवार, पूर्णिमा के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
गौ सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
गौ सूक्तं का पावन स्रोत ऋग्वेद (मंडल 6, सूक्त 28) है। इसके ऋषि भरद्वाज बार्हस्पत्य तथा छंद त्रिष्टुप् / जगती है।
गौ सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से समस्त पापों, वास्तु दोषों और पितृ दोषों का निवारण होता है। तथा घर में कभी अन्न, धन और पुष्टि की कमी नहीं होती। होती है।

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