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गोष्ठ देवता / पशु समृद्धि
अथर्ववेद (कांड 2)
ऋषि: अथर्वा
छंद: अनुष्टुप्
गोष्ठ सूक्तं
Goshtha Suktam
गोशाला, पशुधन और कृषि संपदा की रक्षा व वृद्धि के लिए अथर्ववेदीय अभिमंत्रित सूक्त।
फॉन्ट आकार:
॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥
गोष्ठ सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ
ऋचा १
वेदमंत्र
सं वो गोष्ठेन सुषदा सं रायः सं सुभूतयः ।
सम् वो देवा अकर्मभिः सं वो गावः पतिर्युनक्तु ॥ १ ॥
सरल भावार्थ:
गौएं अपने सुखद गोष्ठ में भली-भांति एकत्रित हों। ऐश्वर्य और उत्तम पोषण हमारे घर में सदा बना रहे।
English Translation:
goshtha-suktam sacred verse
ऋचा २
वेदमंत्र
इहैव गावो नि षीदत वत्सेन सह कामदुघाः ।
ऊर्जं दधाना अमृतं घृतं च मयि पुष्टिं नयन्तु ॥ २ ॥
सरल भावार्थ:
कामधेनु स्वरूप गौएं अपने बछड़ों के साथ यहीं निवास करें और दुग्ध, घृत, अमृत व पुष्टि से हमें संपन्न बनाएं।
English Translation:
goshtha-suktam sacred verse
ऋचा ३
वेदमंत्र
गोष्ठे गावो बहुला मे भवन्तु हविर्धानाय देवेभ्यः ।
पुष्टिरस्तु मे सततं सुखं च ॥ ३ ॥
सरल भावार्थ:
हमारे गोष्ठ में विपुल गायें हों, जो देवों के यज्ञ हेतु हवि प्रदान करें और हमारे घर में निरंतर सुख और समृद्धि रहे।
English Translation:
goshtha-suktam sacred verse
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
प्रतिदिन गोधूलि वेला, शनिवार अथवा सोमवार
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- गोशाला में धूप, दीप और गुग्गुल का धूमन करें।
- पवित्र जल छिड़ककर गोष्ठ सूक्त का पाठ करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:
- ✔ पशुधन में संक्रामक रोगों और अनहोनी से रक्षा होती है।
- ✔ कृषि और डेयरी व्यवसाय में भारी लाभ प्राप्त होता है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोष्ठ सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
गोष्ठ सूक्तं का पाठ सामान्यतः प्रतिदिन गोधूलि वेला, शनिवार अथवा सोमवार के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
गोष्ठ सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
गोष्ठ सूक्तं का पावन स्रोत अथर्ववेद (कांड 2) है। इसके ऋषि अथर्वा तथा छंद अनुष्टुप् है।
गोष्ठ सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से पशुधन में संक्रामक रोगों और अनहोनी से रक्षा होती है। तथा कृषि और डेयरी व्यवसाय में भारी लाभ प्राप्त होता है। होती है।