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मन्यु (भगवान नृसिंह / रुद्र / पराक्रम)
ऋग्वेद (मंडल 10, सूक्त 83 व 84)
ऋषि: मन्यु तापस
छंद: त्रिष्टुप्
मन्यु सूक्तं
Manyu Suktam
शत्रुओं के संहार, आंतरिक क्रोध के रूपांतरण और अपार आत्मबल के जागरण हेतु भगवान नृसिंह का पावन सूक्त।
फॉन्ट आकार:
॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥
मन्यु सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ
ऋचा 1
वेदमंत्र
यस्ते॑ म॒न्योऽवि॑धद्वज्र सायक॒ सह॒ ओजः॑ पुष्यति॒ विश्व॑मानु॒षक् ।
सा॒ह्याम॒ दास॒मार्यं॒ त्वया॑ यु॒जा सह॑स्कृतेन॒ सह॑सा॒ सह॑स्वता ॥ १ ॥
Yaste manyo'vidhadvajra sāyaka saha ojaḥ puṣyati viśvamānuṣak |
Sāhyāma dāsamāryaṃ tvayā yujā sahaskṛtena sahasā sahasvatā || 1 ||
सरल भावार्थ:
हे वज्रधारी मन्यु! जो आपकी उपासना करता है, वह संपूर्ण बल और ओज प्राप्त करता है। आपकी सहायता से हम सभी शत्रुओं को पराजित करें।
English Translation:
He who worships You, O Manyu, wielder of the thunderbolt, nourishes boundless vigor and heroic power. United with You, may we overpower all adversaries.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
मंगलवार, शनिवार, नृसिंह जयंती
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- भगवान नृसिंह के सम्मुख घी का दीपक प्रज्वलित करें।
- लाल पुष्प अर्पित कर मन्यु सूक्त का पाठ करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:
- ✔ भय, संकोच, अवसाद और तांत्रिक बाधाएं नष्ट होती हैं।
- ✔ शत्रुओं पर अकाट्य विजय प्राप्त होती है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मन्यु सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
मन्यु सूक्तं का पाठ सामान्यतः मंगलवार, शनिवार, नृसिंह जयंती के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
मन्यु सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
मन्यु सूक्तं का पावन स्रोत ऋग्वेद (मंडल 10, सूक्त 83 व 84) है। इसके ऋषि मन्यु तापस तथा छंद त्रिष्टुप् है।
मन्यु सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से भय, संकोच, अवसाद और तांत्रिक बाधाएं नष्ट होती हैं। तथा शत्रुओं पर अकाट्य विजय प्राप्त होती है। होती है।