Bhakti Ki Shakti Vedic Lotus Logo
BHAKTI KI SHAKTI
🕉️ मेधा देवी / सरस्वती यजुर्वेद (तैत्तिरीय आरण्यक) ऋषि: वैदिक ऋषि छंद: त्रिष्टुप् / गायत्री

मेधा सूक्तं

Medha Suktam

स्मरण शक्ति, कुशाग्र बुद्धि, वाक्पटुता और विद्या में श्रेष्ठता प्रदान करने वाला प्रसिद्ध सूक्त।

फॉन्ट आकार:
॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥

मेधा सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ

ऋचा 1 वेदमंत्र
Medha Suktam सदसस्पतिमद्भुतं प्रियमिन्द्रस्य काम्यम् । सनिं मेधामयासिषं स्वाहा ॥ १ ॥
सरल भावार्थ: यज्ञगृह के पालक, अचिन्त्य शक्ति से सम्पन्न, परमेश्वर की प्रिय कमनीय शक्ति अग्निदेव से मैं धन-ऐश्वर्य की तथा धारणावती मेधा की याचना करता हूँ । उसके निमित्त यह श्रेष्ठ आहुति गृहीत हो ॥ १ ॥
English Translation: मेधा सूक्तं (ऋचा 1): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 2 वेदमंत्र
यां मेधां देवगणाः पितरश्चोपासते । तया मामद्य मेधयाऽग्ने मेधाविनं कुरु स्वाहा ॥ २ ॥
सरल भावार्थ: हे अग्निदेव ! आप मुझे आज उस मेधा के द्वारा मेधावी बनाइये, जिस मेधा का देव-समूह और पितृ-गण सेवन करते हैं । आपके लिये यह श्रेष्ठ आहुति समर्पित है ॥ २ ॥
English Translation: मेधा सूक्तं (ऋचा 2): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 3 वेदमंत्र
मेधां मे वरुणो ददातु मेधामग्निः प्रजापतिः । मेधामिन्द्रश्च वायुश्च मेधां धाता ददातु मे स्वाहा ॥ ३ ॥
सरल भावार्थ: वरुणदेव मुझे तत्त्वज्ञान को समझने में समर्थ मेधा पर्दान करें, अग्नि और प्रजापति मुझे मेधा प्रदान करें, इन्द्र और वायु मुझे मेधा प्रदान करें । हे धाता ! आप मुझे मेधा प्रदान करें । आप सब देवताओं के लिये मेरी यह श्रेष्ठ आहुति समर्पित है ॥ ३ ॥
English Translation: मेधा सूक्तं (ऋचा 3): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 4 वेदमंत्र
इदं मे ब्रह्म च क्षत्रं चोभे श्रियमश्नुताम् । मयि देवा दधतु श्रियमुत्तमां तस्यै ते स्वाहा ॥ ४ ॥
सरल भावार्थ: ब्राह्मण एवं क्षत्रिय – दोनों मेरी सम्पत्ति का उपभोग करें । देवगण मुझे उत्तम लक्ष्मी प्रदान करें । लक्ष्मी के निमित्त मेरे द्वारा दी गयी यह श्रेष्ठ आहुति समर्पित हो ॥ ४ ॥
English Translation: मेधा सूक्तं (ऋचा 4): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 5 वेदमंत्र
मेधादेवी जुषमाणा न आगाद्विश्वाची भद्रा सुमनस्य माना । त्वया जुष्टा नुदमाना दुरुक्तान् बृहद्वदेम विदथे सुवीराः । त्वया जुष्ट ऋषिर्भवति देवि त्वया ब्रह्माऽऽगतश्रीरुत त्वया । त्वया जुष्टश्चित्रं विन्दते वसु सा नो जुषस्व द्रविणो न मेधे ॥ ५ ॥
सरल भावार्थ: प्रसन्न होती हुई देवी मेधा और सुन्दर मनवाली कल्याणकारिणी देवी विश्वाची हमारे पास आयें । आपसे अनुगृहित तथा प्रेरित होते हुए हम असद्भाषीजनों से श्रेष्ठ वचन बोलें और महापराक्रमी बनें । हे देवि ! आपका कृपा-पात्र व्यक्ति ऋषि (मन्त्र-द्रष्टा) हो जाता है, वह ब्रह्न-ज्ञानी और श्री-सम्पन्न हो जाता है । आप जिस पर कृपा करती हैं, उसे अद्भुत सम्पत्ति प्राप्त हो जाती है । ऐसी हे मेधे ! आप हम पर प्रसन्न होवो और हमें द्रव्य से सम्पन्न करें ॥ ५ ॥
English Translation: मेधा सूक्तं (ऋचा 5): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 6 वेदमंत्र
मेधां म इन्द्रो दधातु मेधां देवी सरस्वती । मेधां मे अश्विनावुभावाधत्तां पुष्करस्रजा । अप्सरासु च या मेधा गन्धर्वेषु च यन्मनः । दैवीं मेधा सरस्वती सा मां मेधा सुरभिर्जुषतां स्वाहा ॥ ६ ॥
सरल भावार्थ: इन्द्र हमें मेधा प्रदान करें, देवी सरस्वती हमें मेधा-सम्पन्न करें, कमल की माला धारण करने वाले दोनों अश्विनीकुमार हमें मेधा-युक्त करें । अप्सराओं में जो मेधा प्राप्त होती है, गन्धर्वों के चित्त में जो मेधा प्रकाशित होती है, सुगन्ध की तरह व्यापिनी भगवती सरस्वती की वह दैवी मेधा-शक्ति मुझपर प्रसन्न हों ॥ ६ ॥
English Translation: मेधा सूक्तं (ऋचा 6): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 7 वेदमंत्र
आ मां मेधा सुरभिर्विश्वरुपा हिरण्यवर्णा जगती जगम्या । ऊर्जस्वती पयसा पिन्वमाना सा मां मेधा सुप्रतीका जुषन्ताम् ॥ ७ ॥
सरल भावार्थ: अनेक रुपों में प्रकट सुरभि-रुपिणी, स्वर्ण के समान तेजोमयी, जगत् में सर्व-व्यापिनी, ऊर्जा-मयी और सुन्दर चिह्नों से सुसज्जित देवी मेधा ज्ञानरुपी दुग्ध का पान कराती हुई मुझपर प्रसन्न हों ॥ ७ ॥
English Translation: मेधा सूक्तं (ऋचा 7): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय: बुधवार, वसंत पंचमी, परीक्षा दिवस

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. मां सरस्वती को श्वेत पुष्प और केसर का तिलक लगाएं।
  2. विद्यार्थी पूर्वाभिमुख होकर प्रतिदिन इस सूक्त का 3 बार पाठ करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:

  • ✔ स्मरण शक्ति में तीव्र वृद्धि होती है और भूलने की समस्या दूर होती है।
  • ✔ प्रतियोगी परीक्षाओं और शोध कार्यों में सफलता मिलती है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेधा सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
मेधा सूक्तं का पाठ सामान्यतः बुधवार, वसंत पंचमी, परीक्षा दिवस के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
मेधा सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
मेधा सूक्तं का पावन स्रोत यजुर्वेद (तैत्तिरीय आरण्यक) है। इसके ऋषि वैदिक ऋषि तथा छंद त्रिष्टुप् / गायत्री है।
मेधा सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से स्मरण शक्ति में तीव्र वृद्धि होती है और भूलने की समस्या दूर होती है। तथा प्रतियोगी परीक्षाओं और शोध कार्यों में सफलता मिलती है। होती है।

संबंधित अन्य वैदिक स्तोत्र, स्तुतियां व दैनिक पंचांग