🕉️
परब्रह्म श्रीनारायण
यजुर्वेद (तैत्तिरीय आरण्यक, महानारायणोपनिषद्)
ऋषि: नारायण
छंद: त्रिष्टुप् / अनुष्टुप्
नारायण सूक्तं
Narayana Suktam
हृदय-कमल में स्थित अंतर्यामी परमात्मा नारायण का अनुपम ध्यान सूक्त, जो समस्त वेदों का परम सार है।
फॉन्ट आकार:
॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥
नारायण सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ
ऋचा 1
वेदमंत्र
Narayan
Suktam
१.अभ्यः सम्भृतः पृथिव्यै रसाच्च विश्वकर्मणः समवर्तताग्रे ।
तस्य त्वष्टा विदधद्रूपमेति तन्मर्त्यस्य देवत्वमाजानमग्रे ॥ १ ॥
सरल भावार्थ:
पृथ्वी आदि की सृष्टि के लिये अपने प्रेम के कारण वह पुरुष जल आदि से परिपूर्ण होकर पूर्व ही छा गया । उस पुरुष के रूप को धारण करता हुआ सूर्य उदित होता है, जिसका मनुष्य के लिये प्रधान देवत्व है ॥ १ ॥
English Translation:
नारायण सूक्तं (ऋचा 1): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 2
वेदमंत्र
२.वेदाहमेतं पुरुषं महान्तमादित्यवर्णं तमसः परस्तात् ।
तमेव विदित्वाति मृत्युमेति नान्यः पन्था विद्यतेऽयनाय ॥ २ ॥
सरल भावार्थ:
मैं अज्ञानान्धकार से परे आदित्य-प्रतीकात्मक उस सर्वोत्कृष्ट पुरुष को जानता हूँ । मात्र उसे जानकर ही मृत्यु का अतिक्रमण होता है । शरण के लिये अन्य कोई मार्ग नहीं ॥ २ ॥
English Translation:
नारायण सूक्तं (ऋचा 2): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 3
वेदमंत्र
३.प्रजापतिश्चरति गर्भे अन्तरजायमानो बहुधा वि जायते ।
तस्य योनिं परि पश्यन्ति धीरास्तस्मिन् ह तस्थुर्भुवनानि विश्वा ॥ ३ ॥
सरल भावार्थ:
वह परमात्मा आभ्यन्तर में विराजमान हैं । उत्पन्न न होनेवाला होकर भी नाना प्रकार से उत्पन्न होता है । संयमी पुरुष ही उसके स्वरूप का साक्षात्कार करते हैं । सम्पूर्ण भूत उसी में सन्निविष्ट हैं ॥ ३ ॥
English Translation:
नारायण सूक्तं (ऋचा 3): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 4
वेदमंत्र
४.यो देवेभ्य आतपति यो देवानां पुरोहितः ।
पूर्वो यो देवेभ्यो जातो नमो रुचाय ब्राह्मये ॥ ४ ॥
सरल भावार्थ:
जो देवताओं के लिये सूर्यरूप से प्रकाशित होता है, जो देवताओं का कार्यसाधन करनेवाला है और जो देवताओं से पूर्व स्वयं भूत है, उस देदीप्यमान ब्रह्म को नमस्कार है ॥ ४ ॥
English Translation:
नारायण सूक्तं (ऋचा 4): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 5
वेदमंत्र
५.रुचं ब्राह्म जनयन्तो देवा अग्रे तदब्रुवन् ।
यस्त्वैवं ब्राह्मणो विद्यात्तस्य देवा असन् वशे ॥ ५ ॥
सरल भावार्थ:
उस शोभन ब्रह्म को प्रथम प्रकट करते हुए देवता बोले– जो ब्राह्मण तुम्हें इस स्वरूप में जाने, देवता उसके वश में हों ॥ ५ ॥
English Translation:
नारायण सूक्तं (ऋचा 5): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 6
वेदमंत्र
६.श्रीश्च ते लक्ष्मीश्च पल्यावहोरात्रे पाश्र्वे नक्षत्राणि रूपमश्विनौ व्यात्तम् ।
इष्णनिषाणामुं म इषाण सर्वलोकं म इषाण ॥ ६ ॥
सरल भावार्थ:
समृद्धि और सौन्दर्य तुम्हारी पत्नी के रूप में हैं, दिन तथा रात तुम्हारे अगल-बगल हैं, अनन्त नक्षत्र तुम्हारे रूप हैं, द्यावा-पृथिवी तुम्हारे मुख स्थानीय हैं । इच्छा करते समय परलोक की इच्छा करो । मैं सर्वलोकात्मक हो जाऊँ-ऐसी इच्छा करो, ऐसी इच्छा करो ॥ ६ ॥
English Translation:
नारायण सूक्तं (ऋचा 6): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय:
गुरुवार, एकादशी, द्वादशी
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- हृदय कमल पर ध्यान केंद्रित कर शांत प्राणायाम करें।
- भगवान नारायण का नीले मेघ समान रूप का ध्यान करें।
- सस्वर नारायण सूक्त का जप करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:
- ✔ हृदय की ग्रंथियां खुलती हैं और आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है।
- ✔ समस्त भयों और मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नारायण सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
नारायण सूक्तं का पाठ सामान्यतः गुरुवार, एकादशी, द्वादशी के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
नारायण सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
नारायण सूक्तं का पावन स्रोत यजुर्वेद (तैत्तिरीय आरण्यक, महानारायणोपनिषद्) है। इसके ऋषि नारायण तथा छंद त्रिष्टुप् / अनुष्टुप् है।
नारायण सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से हृदय की ग्रंथियां खुलती हैं और आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है। तथा समस्त भयों और मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। होती है।