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BHAKTI KI SHAKTI
🕉️ नीला देवी (भगवान विष्णु की तृतीया शक्ति) यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता) ऋषि: वैदिक ऋषि छंद: अनुष्टुप्

नील सूक्तं

Neela Suktam

श्रीदेवी व भूदेवी के साथ पूजित भगवान विष्णु की लीला-शक्ति नीला देवी का मंगलमय सूक्त।

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॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥

नील सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ

ऋचा 1 वेदमंत्र
स्तृणामि बर्हिरमृताय धात्रे । विष्णुर्यत्पत्न्युपशृणोतु मेदम् । नीलां देवीं शरणमहं प्रपद्ये । सुप्रीता भवतु मे ॥ १ ॥
Stṛṇāmi barhiramṛtāya dhātre | Viṣṇuryatpatnyupaśṛṇotu medam | Nīlāṃ devīṃ śaraṇamahaṃ prapadye | Suprītā bhavatu me || 1 ||
सरल भावार्थ: मैं अमृतस्वरूप धाता के लिए दर्भ बिछाता हूँ। भगवान विष्णु की पत्नी नीला देवी हमारी इस प्रार्थना को सुनें; मैं उनकी शरण लेता हूँ।
English Translation: I spread the sacred grass for the immortal Creator; may the beloved consort of Lord Vishnu hear my supplication. I take refuge in Neela Devi.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय: शुक्रवार, एकादशी

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. भगवान विष्णु एवं नीला देवी का अर्चन करें।
  2. नीले या पीले पुष्प अर्पित कर सूक्त का पाठ करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:

  • ✔ पारिवारिक जीवन में मधुरता, प्रेम और आनंद का संचार होता है।
  • ✔ समस्त विघ्न और दुर्भाग्यों का निवारण होता है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नील सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
नील सूक्तं का पाठ सामान्यतः शुक्रवार, एकादशी के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
नील सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
नील सूक्तं का पावन स्रोत यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता) है। इसके ऋषि वैदिक ऋषि तथा छंद अनुष्टुप् है।
नील सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से पारिवारिक जीवन में मधुरता, प्रेम और आनंद का संचार होता है। तथा समस्त विघ्न और दुर्भाग्यों का निवारण होता है। होती है।

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