Bhakti Ki Shakti Vedic Lotus Logo
BHAKTI KI SHAKTI
🕉️ पितृगण / अर्यमा ऋग्वेद (मंडल 10, सूक्त 15) ऋषि: शंख यामायन छंद: त्रिष्टुप्

पितृ सूक्तं

Pitri Suktam

पूर्वजों को तृप्त करने, पितृदोष शमन और कुल-वंश की वृद्धि हेतु सर्वाधिक प्रामाणिक वैदिक सूक्त।

फॉन्ट आकार:
॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥

पितृ सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ

ऋचा 1 वेदमंत्र
उदिताम् अवर उत्परास उन्मध्यमाः पितरः सोम्यासः । असुम् यऽ ईयुर-वृका ॠतज्ञास्ते नो ऽवन्तु पितरो हवेषु ॥1॥
सरल भावार्थ: पितृ सूक्तं (ऋचा 1): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: पितृ सूक्तं (ऋचा 1): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 2 वेदमंत्र
अंगिरसो नः पितरो नवग्वा अथर्वनो भृगवः सोम्यासः । तेषां वयम् सुमतो यज्ञियानाम् अपि भद्रे सौमनसे स्याम् ॥2॥
सरल भावार्थ: पितृ सूक्तं (ऋचा 2): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: पितृ सूक्तं (ऋचा 2): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 3 वेदमंत्र
ये नः पूर्वे पितरः सोम्यासो ऽनूहिरे सोमपीथं वसिष्ठाः । तेभिर यमः सरराणो हवीष्य उशन्न उशद्भिः प्रतिकामम् अत्तु ॥3॥
सरल भावार्थ: पितृ सूक्तं (ऋचा 3): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: पितृ सूक्तं (ऋचा 3): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 4 वेदमंत्र
त्वं सोम प्र चिकितो मनीषा त्वं रजिष्ठम् अनु नेषि पंथाम् । तव प्रणीती पितरो न देवेषु रत्नम् अभजन्त धीराः ॥4॥
सरल भावार्थ: पितृ सूक्तं (ऋचा 4): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: पितृ सूक्तं (ऋचा 4): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 5 वेदमंत्र
त्वया हि नः पितरः सोम पूर्वे कर्माणि चक्रुः पवमान धीराः । वन्वन् अवातः परिधीन् ऽरपोर्णु वीरेभिः अश्वैः मघवा भवा नः ॥5॥
सरल भावार्थ: पितृ सूक्तं (ऋचा 5): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: पितृ सूक्तं (ऋचा 5): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 6 वेदमंत्र
त्वं सोम पितृभिः संविदानो ऽनु द्यावा-पृथिवीऽ आ ततन्थ । तस्मै तऽ इन्दो हविषा विधेम वयं स्याम पतयो रयीणाम् ॥6॥
सरल भावार्थ: पितृ सूक्तं (ऋचा 6): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: पितृ सूक्तं (ऋचा 6): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 7 वेदमंत्र
बर्हिषदः पितरः ऊत्य-र्वागिमा वो हव्या चकृमा जुषध्वम् । तऽ आगत अवसा शन्तमे नाथा नः शंयोर ऽरपो दधात ॥7॥
सरल भावार्थ: पितृ सूक्तं (ऋचा 7): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: पितृ सूक्तं (ऋचा 7): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 8 वेदमंत्र
आहं पितृन्त् सुविदत्रान् ऽअवित्सि नपातं च विक्रमणं च विष्णोः । बर्हिषदो ये स्वधया सुतस्य भजन्त पित्वः तऽ इहागमिष्ठाः ॥8॥
सरल भावार्थ: पितृ सूक्तं (ऋचा 8): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: पितृ सूक्तं (ऋचा 8): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 9 वेदमंत्र
उपहूताः पितरः सोम्यासो बर्हिष्येषु निधिषु प्रियेषु । तऽ आ गमन्तु तऽ इह श्रुवन्तु अधि ब्रुवन्तु ते ऽवन्तु-अस्मान् ॥9॥
सरल भावार्थ: पितृ सूक्तं (ऋचा 9): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: पितृ सूक्तं (ऋचा 9): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 10 वेदमंत्र
आ यन्तु नः पितरः सोम्यासो ऽग्निष्वात्ताः पथिभि-र्देवयानैः । अस्मिन् यज्ञे स्वधया मदन्तो ऽधि ब्रुवन्तु ते ऽवन्तु-अस्मान् ॥10॥
सरल भावार्थ: पितृ सूक्तं (ऋचा 10): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: पितृ सूक्तं (ऋचा 10): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 11 वेदमंत्र
अग्निष्वात्ताः पितर एह गच्छत सदःसदः सदत सु-प्रणीतयः । अत्ता हवींषि प्रयतानि बर्हिष्य-था रयिम् सर्व-वीरं दधातन ॥11॥
सरल भावार्थ: पितृ सूक्तं (ऋचा 11): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: पितृ सूक्तं (ऋचा 11): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 12 वेदमंत्र
येऽ अग्निष्वात्ता येऽ अनग्निष्वात्ता मध्ये दिवः स्वधया मादयन्ते । तेभ्यः स्वराड-सुनीतिम् एताम् यथा-वशं तन्वं कल्पयाति ॥12॥
सरल भावार्थ: पितृ सूक्तं (ऋचा 12): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: पितृ सूक्तं (ऋचा 12): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 13 वेदमंत्र
अग्निष्वात्तान् ॠतुमतो हवामहे नाराशं-से सोमपीथं यऽ आशुः । ते नो विप्रासः सुहवा भवन्तु वयं स्याम पतयो रयीणाम् ॥13॥
सरल भावार्थ: पितृ सूक्तं (ऋचा 13): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: पितृ सूक्तं (ऋचा 13): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 14 वेदमंत्र
आच्या जानु दक्षिणतो निषद्य इमम् यज्ञम् अभि गृणीत विश्वे । मा हिंसिष्ट पितरः केन चिन्नो यद्व आगः पुरूषता कराम ॥14॥
सरल भावार्थ: पितृ सूक्तं (ऋचा 14): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: पितृ सूक्तं (ऋचा 14): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 15 वेदमंत्र
आसीनासोऽ अरूणीनाम् उपस्थे रयिम् धत्त दाशुषे मर्त्याय । पुत्रेभ्यः पितरः तस्य वस्वः प्रयच्छत तऽ इह ऊर्जम् दधात ॥15॥
सरल भावार्थ: पितृ सूक्तं (ऋचा 15): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: पितृ सूक्तं (ऋचा 15): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 16 वेदमंत्र
॥ ॐ शांति: शांति:शांति:॥
सरल भावार्थ: पितृ सूक्तं (ऋचा 16): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: पितृ सूक्तं (ऋचा 16): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

⏱️
सर्वोत्तम शुभ समय: श्राद्ध पक्ष, अमावस्या, पितृ तर्पण काल

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. दक्षिण दिशा की ओर मुख कर कुशा के आसन पर बैठें।
  2. ताम्रपात्र में जल, दूध, काले तिल और कुश लेकर पितरों का आह्वान करें।
  3. श्रद्धापूर्वक पितृ सूक्त का पाठ कर तर्पण अर्पित करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:

  • ✔ भयंकर पितृदोष, वंश-वृद्धि में बाधा और संतान-कष्ट दूर होते हैं।
  • ✔ पितरों के आशीर्वाद से कुल में सुख-शांति और ऐश्वर्य फलता है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पितृ सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
पितृ सूक्तं का पाठ सामान्यतः श्राद्ध पक्ष, अमावस्या, पितृ तर्पण काल के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
पितृ सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
पितृ सूक्तं का पावन स्रोत ऋग्वेद (मंडल 10, सूक्त 15) है। इसके ऋषि शंख यामायन तथा छंद त्रिष्टुप् है।
पितृ सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से भयंकर पितृदोष, वंश-वृद्धि में बाधा और संतान-कष्ट दूर होते हैं। तथा पितरों के आशीर्वाद से कुल में सुख-शांति और ऐश्वर्य फलता है। होती है।

संबंधित अन्य वैदिक स्तोत्र, स्तुतियां व दैनिक पंचांग