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विराट पुरुष / परमेश्वर
ऋग्वेद (मंडल 10, सूक्त 90) / शुक्लयजुर्वेद (अध्याय 31)
ऋषि: नारायण ऋषि
छंद: अनुष्टुप् / त्रिष्टुप्
पुरुष सूक्तम्
Purusha Suktam
वेदों का सार्वभौमिक मुकुटमणि सूक्त, जो संपूर्ण दृश्य-अदृश्य ब्रह्मांड को एक ही परमात्मा के दिव्य शरीर के रूप में प्रतिपादित करता है।
फॉन्ट आकार:
॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥
पुरुष सूक्तम् मूल पाठ व भावार्थ
ऋचा 1
वेदमंत्र
स॒हस्र॑शीर्षा॒ पुरु॑षः सहस्रा॒क्षः स॒हस्र॑पात् ।
स भूमिं॑ वि॒श्वतो॑ वृ॒त्वात्य॑तिष्ठद्दशाङ्गु॒लम् ॥ १ ॥
Sahasraśīrṣā puruṣaḥ sahasrākṣaḥ sahasrapāt |
Sa bhūmiṃ viśvato vṛtvātyatiṣṭhaddaśāṅgulam || 1 ||
सरल भावार्थ:
उस विराट पुरुष के सहस्रों सिर, सहस्रों नेत्र और सहस्रों चरण हैं। वह संपूर्ण ब्रह्मांड को सब ओर से व्याप्त करके दस अंगुल ऊपर भी स्थित है।
English Translation:
The Cosmic Being has a thousand heads, a thousand eyes, and a thousand feet. Pervading the earth on every side, He extends beyond it by ten finger-breadths.
ऋचा 2
वेदमंत्र
पुरु॑ष ए॒वेदं सर्वं॒ यद्भू॒तं यच्च॒ भव्य॑म् ।
उ॒तामृ॑त॒त्वस्येशा॑नो॒ यदन्ने॑नाति॒रोह॑ति ॥ २ ॥
Puruṣa evedaṃ sarvaṃ yadbhūtaṃ yacca bhavyam |
Utāmṛtatvasyeśāno yadannenātirohati || 2 ||
सरल भावार्थ:
जो कुछ बीत चुका है और जो कुछ आगे होगा, वह सब पुरुष ही है। वह अमरत्व का भी स्वामी है, जो अन्न द्वारा निरंतर बढ़ता है।
English Translation:
The Purusha is indeed all this universe, whatever has been and whatever is yet to be. He is the master of immortality.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
प्रतिदिन, पूर्णिमा, एकादशी, अभिषेक व यज्ञ काल
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- भगवान विष्णु अथवा शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करते हुए पाठ करें।
- षोडशोपचार सामग्री अर्पित करें।
- समस्त सृष्टि में एकात्म भाव का ध्यान करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:
- ✔ मोक्ष, आत्मज्ञान और तीनों तापों से मुक्ति मिलती है।
- ✔ सर्वतोमुखी सफलता, समाज में प्रतिष्ठा और शांति प्राप्त होती है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पुरुष सूक्तम् का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
पुरुष सूक्तम् का पाठ सामान्यतः प्रतिदिन, पूर्णिमा, एकादशी, अभिषेक व यज्ञ काल के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
पुरुष सूक्तम् का मूल वेद स्रोत क्या है?
पुरुष सूक्तम् का पावन स्रोत ऋग्वेद (मंडल 10, सूक्त 90) / शुक्लयजुर्वेद (अध्याय 31) है। इसके ऋषि नारायण ऋषि तथा छंद अनुष्टुप् / त्रिष्टुप् है।
पुरुष सूक्तम् का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से मोक्ष, आत्मज्ञान और तीनों तापों से मुक्ति मिलती है। तथा सर्वतोमुखी सफलता, समाज में प्रतिष्ठा और शांति प्राप्त होती है। होती है।