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BHAKTI KI SHAKTI
🕉️ सद्भाव / संवाद / एकात्मता ऋग्वेद (मंडल 10, सूक्त 191 - संज्ञान सूक्त) ऋषि: संवहन आंगिरस छंद: अनुष्टुप्

संवाद सूक्तं

Samvada Suktam

पारस्परिक मतभेद समाप्त करने, समाज में एकात्मता और समान चिंतन स्थापित करने वाला अमर सूक्त (संगच्छध्वं संवदध्वं...)।

फॉन्ट आकार:
॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥

संवाद सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ

ऋचा 1 वेदमंत्र
Samvad Suktam ओ चित् सखायं सख्या ववृत्यां तिरः पुरू चिदर्णवं जगन्वान् । पितुर्नपातमा दधीत वेधा अधि क्षमि प्रतरं दीध्यानः ॥1 ॥
सरल भावार्थ: ( यमी अपने सहोदर भाई यम से कहती है ) – विस्तृत समुद्र के मध्य द्वीप में आकर , इस निर्जन प्रदेश में मैं तुम्हारा सहवास ( मिलन ) चाहती हूँ , क्योंकि माता की गर्भावस्था से ही तुम मेरे साथी हो । विधाता ने मन ही मन समझा है कि तुम्हारे द्वारा मेरे गर्भ से जो पुत्र उत्पन्न होगा ; वह हमारे पिता का एक श्रेष्ठ नाती होगा ।
English Translation: संवाद सूक्तं (ऋचा 1): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 2 वेदमंत्र
न ते सखा सख्यं वष्ट्येतत् सलक्ष्मा यद्विषुरूपा भवाति । महस्पुत्रासो असुरस्य वीरा दिवो धर्तार उर्विया परिख्यन् ॥2 ॥- Samvad Suktam
सरल भावार्थ: ( यम ने कहा ) यमी , तुम्हारा साथी यम , तुम्हारे साथ ऐसा सम्पर्क नहीं चाहता ; क्योंकि तुम भी सहोदरा भगिनी हो , अत : अगन्तव्या हो । यह निर्जन प्रदेश नहीं है ; क्योंकि धुलोक को धारण करने वाले महान् बलशाली प्रजापति के पुत्रगण ( देवताओं के चर ) सब कुछ देखते हैं ।
English Translation: संवाद सूक्तं (ऋचा 2): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 3 वेदमंत्र
उशन्ति घा ते अमृतास एतदेकस्य चित्त्यजसं मर्त्यस्य । नि ते मनो मनसि धाय्यस्मे जन्युः पतिस्तन्वमा विविश्याः ॥3 ॥
सरल भावार्थ: ( यमी ने कहा ) यद्यपि मनुष्य के लिए ऐसा संसर्ग निषिद्ध है , तो भी देवता लोग इच्छा पूर्वक ऐसा संसर्ग करते हैं । अत : मेरी इच्छानुकूल तुम भी करो । पुत्र – जन्मदाता पति के समान मेरे शरीर में बैठो ( मेरा सम्भोग करो । ) ।
English Translation: संवाद सूक्तं (ऋचा 3): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 4 वेदमंत्र
न यत्पुरा चकमा कद्ध नूनमृता वदन्तो अनृतं रपेम । गन्धर्वो अप्स्वप्या च योषा सा नो नाभिः परमं जामि तन्नौ।।4 ।।- Samvad Suktam
सरल भावार्थ: ( यम ने उत्तर दिया ) – हमने ऐसा कर्म कभी नहीं किया । हम सत्यवक्ता हैं । कभी मिथ्या कथन नहीं किया है । अन्तरिक्ष में स्थित गन्धर्व या जल के धारक आदित्य तथा अन्तरिक्ष में रहने वाली योषा ( सूर्यस्त्री – सरण्यू ) हमारे माता – पिता हैं । अतः , हम सहोदर बन्धु हैं । ऐसा सम्बन्ध उचित नहीं है ।
English Translation: संवाद सूक्तं (ऋचा 4): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 5 वेदमंत्र
गर्भे नु नौ जनिता दम्पती कर्देवस्त्वष्टा सविता विश्वरूपः । नकिरस्य प्र मिनन्ति व्रतानि वेद नावस्य पृथ्वी उत द्यौः ॥5 ॥
सरल भावार्थ: ( यमी ने कहा ) – रूपकर्ता , शुभाशुभ प्रेरक , सर्वात्मक , दिव्य और जनक प्रजापति ने तो हमें गर्भावस्था में ही दम्पति बना दिया । प्रजापति का कर्म कोई लुप्त नहीं कर सकता । हमारे इससे सम्बन्ध को द्यावा – पृथ्वी भी जानते हैं ।
English Translation: संवाद सूक्तं (ऋचा 5): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 6 वेदमंत्र
को अस्य वेद प्रथमस्याह्नः क ईं ददर्श क इह प्र वोचत् ।
सरल भावार्थ: ( यमी ने पुनः कहा ) प्रथम दिन ( संगमन ) की बात कौन जानता है ? किसने उसे देखा है ? किसने उसका प्रकाश किया है ? मित्र और वरुण का यह जो महान् धाम ( अहोरात्र ) है , उसके बारे में हे मोक्ष , बन्धनकर्ता यम ! तुम क्या कहते हो ?
English Translation: संवाद सूक्तं (ऋचा 6): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 7 वेदमंत्र
यमस्य मा यम्यं काम आगन्त्समाने योनौ सहशेय्याय । जायेव पत्ये तन्वं रिरिच्यां वि चिद् वृहेव रथ्येव चक्रा ॥7 ॥
सरल भावार्थ: ( यमी ने कहा ) जैसे एक शैया पर पत्नी , पति के साथ अपनी देह का उद्घाटन करती है , वैसे ही तुम्हारे पास मैं अपने शरीर को प्रकाशित कर देती हूँ । तुम मेरी अभिलाषा करो । आओ दोनों एक स्थान पर शयन करें । रथ के दोनों चक्कों के समान एक कार्य में प्रवृत्त हों ।
English Translation: संवाद सूक्तं (ऋचा 7): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 8 वेदमंत्र
न तिष्ठन्ति न नि मिषन्त्येते देवानां स्पश इह ये चरन्ति ।
सरल भावार्थ: ( यम ने उत्तर दिया ) – देवों में जो गुप्तचर हैं , वे रात – दिन विचरण करते हैं । उनकी आँखे कभी बन्द नहीं होती । दुःखदायिनी यमी ! शीघ्र दूसरे के पास जाओ , और रथ के चक्कों के समान उसके साथ एक कार्य करो ।
English Translation: संवाद सूक्तं (ऋचा 8): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 9 वेदमंत्र
रात्रीभिरस्मा अहभिर्दशस्येत् सूर्यस्य चक्षुर्मुहुरुन्मिमीयात् । दिवा पृथिव्या मिथुना सबन्धू यमीर्यमस्य बिभृयादजामि ॥9 ॥
सरल भावार्थ: ( यम ने पुन : कहा ) – दिन – रात में यम के लिए जो कल्पित भाग हैं , उसे यजमान दें । सूर्य का तेज यम के लिए उदित हो । परस्पर सम्बद्ध दिन , धुलोक और भूलोक यम के बन्धु हैं । यमी , यम भ्राता के अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष को धारण करें ।
English Translation: संवाद सूक्तं (ऋचा 9): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 10 वेदमंत्र
आ घा ता गच्छानुत्तरा युगानि यत्र जामयः कृणवन्नजामि । उप बर्वृहि वृषभाय बाहुमन्यमिच्छस्व सुभगे पतिं मत् ॥10 ॥
सरल भावार्थ: ( यम ने पुन : कहा ) भविष्य में ऐसा युग आयेगा , जिसमें भगिनियाँ अपने बन्धुत्व विहीन भ्राता को पति बनावेंगी । सुन्दरी ! मेरे अतिरिक्त किसी दूसरे को पति बनाओ । वह वीर्य सिंचन करेगा ; उस समय उसे बाहुओं में आलिङ्गन करना ।
English Translation: संवाद सूक्तं (ऋचा 10): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 11 वेदमंत्र
किं भ्रातासद्यदनाथं भवाति किमु स्वसा यन्निर्ऋतिर्निगच्छात् । काममूता बढे तद्रपामि तन्वा मे तन्वं सं पिपृग्धि ॥11 ॥
सरल भावार्थ: ( यमी ने कहा ) वह कैसा भ्राता है , जिसके रहते भगिनी अनाथा हो जाय , और भगिनी ही क्या है , जिसके रहते भ्राता का दुःख दूर न हो ? मैं काम मूर्च्छिता होकर नाना प्रकार से बोल रही हूँ ; यह विचार करके भली – भाँति मेरा सम्भोग करो ।
English Translation: संवाद सूक्तं (ऋचा 11): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 12 वेदमंत्र
न वा उ ते तन्वा तन्वं सं पपृच्यां पापमाहुर्यः स्वसारं निगच्छात् । अन्येन मत् प्रमुदः कल्पयस्व न ते भ्राता सुभगे वष्टयेतत् ॥12 ॥
सरल भावार्थ: ( यम ने उत्तर दिया ) – हे यमी ! मैं तुम्हारे शरीर से अपना शरीर मिलाना नहीं चाहता । जो भ्राता , भगिनी का सम्भोग करता है , उसे लोग पापी कहते हैं । सुन्दरी ! मुझे छोड़कर अन्य के साथ आमोद – प्रमोद करो । तुम्हारा भ्राता तुम्हारे साथ मैथुन करना नहीं चाहता ।
English Translation: संवाद सूक्तं (ऋचा 12): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 13 वेदमंत्र
बतो बतासि यम नैव ते मनो हृदयं चाविदाम । अन्या किल त्वां कक्ष्येव युक्तं परिष्वजाते लिबुजेव वृक्षम् ॥13 ॥
सरल भावार्थ: ( यमी ने कहा ) हाय यम ; तुम दुर्बल हो । तुम्हारे मन और हृदय को मैं समझ सकती । जैसे – रस्सी घोड़े को बाँधती है , तथा लता जैसे वृक्ष का आलिङ्गन करती है , वैसे ही अन्य स्त्री तुम्हें अनायास ही आलिङ्गन करती है ; परन्तु तुम मुझे नहीं चाहते हो ।
English Translation: संवाद सूक्तं (ऋचा 13): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 14 वेदमंत्र
अन्यमूषु त्वं यम्यन्य उ त्वां परिष्वजाते लिबुजेव वृक्षम् । तस्य वा त्वं मन इच्छा स वा तवाऽधा कृणुष्व संविदं सुभद्राम् ॥14 ॥
सरल भावार्थ: ( यम ने यमी से कहा ) – तुम भी अन्य पुरुष का ही भली – भाँति आलिङ्गन करो । जैसे लता , वृक्ष का आलिङ्गन करती है , वैसे ही अन्य पुरुष तुम्हें आलिङ्गित करें । तुम उसी का मन हरण करो । अपने सहवास का प्रबन्ध उसी के साथ करो । इसी में मङ्गल कुछ नहीं होगा ।
English Translation: संवाद सूक्तं (ऋचा 14): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
ऋचा 15 वेदमंत्र
॥ इति संवाद सूक्तं संपूर्ण ॥ आरती
सरल भावार्थ: संवाद सूक्तं (ऋचा 15): वेदोक्त दिव्य ऋचा व स्तुति।
English Translation: संवाद सूक्तं (ऋचा 15): Sacred Vedic verse recitation and invocation.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

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सर्वोत्तम शुभ समय: परिवारिक सभा, सभा-सम्मेलन, दैनिक

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. सामूहिक रूप से बैठकर एक स्वर में इस सूक्त का गान करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:

  • ✔ पारिवारिक कलह और वैचारिक मतभेद मिटते हैं।
  • ✔ संगठन और समाज में असीम एकता व शक्ति आती है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संवाद सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
संवाद सूक्तं का पाठ सामान्यतः परिवारिक सभा, सभा-सम्मेलन, दैनिक के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
संवाद सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
संवाद सूक्तं का पावन स्रोत ऋग्वेद (मंडल 10, सूक्त 191 - संज्ञान सूक्त) है। इसके ऋषि संवहन आंगिरस तथा छंद अनुष्टुप् है।
संवाद सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से पारिवारिक कलह और वैचारिक मतभेद मिटते हैं। तथा संगठन और समाज में असीम एकता व शक्ति आती है। होती है।

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