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नाग देवता / तक्षक, वासुकि
अथर्ववेद (कांड 8 व 10)
ऋषि: गरुड़ / कश्यप
छंद: अनुष्टुप्
सर्प सूक्तम्
Sarpa Suktam
सर्प दंश से रक्षा, विष-निवारण तथा भूमिगत भय के शमन हेतु अथर्ववेदीय सर्प सूक्त।
फॉन्ट आकार:
॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥
सर्प सूक्तम् मूल पाठ व भावार्थ
ऋचा 1
वेदमंत्र
अहिमेतं विषं मन्तु सर्पाः शम्वन्त्वस्रिकाः ।
अदन्तास्ते भविष्यन्ति विषं हन्म्यहं त्वया ॥ १ ॥
Ahimetaṃ viṣaṃ mantu sarpāḥ śamvantvasrikāḥ |
Adantāste bhaviṣyanti viṣaṃ hanmyahaṃ tvayā || 1 ||
सरल भावार्थ:
सभी सर्पों का विष प्रभावहीन हो; वे हमारे लिए शांत और कल्याणकारी हों। उनका विष नष्ट हो जाए।
English Translation:
May the venom of serpents be neutralized; may they become harmless and peaceful towards us. Their poison is completely extinguished.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
नागपंचमी, मंगलवार
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- नाग देवता का स्मरण कर दुग्ध अर्पित करें और पाठ करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:
- ✔ घर में सर्प या विषैले जीवों के भय से रक्षा होती है।
- ✔ राहु-केतु जनित पीड़ा शांत होती है।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सर्प सूक्तम् का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
सर्प सूक्तम् का पाठ सामान्यतः नागपंचमी, मंगलवार के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
सर्प सूक्तम् का मूल वेद स्रोत क्या है?
सर्प सूक्तम् का पावन स्रोत अथर्ववेद (कांड 8 व 10) है। इसके ऋषि गरुड़ / कश्यप तथा छंद अनुष्टुप् है।
सर्प सूक्तम् का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से घर में सर्प या विषैले जीवों के भय से रक्षा होती है। तथा राहु-केतु जनित पीड़ा शांत होती है। होती है।