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वेदोक्त सर्प देव / नागराज
कृष्ण यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता 4.2.8)
ऋषि: वैदिक ऋषि
छंद: यजुष्
सर्प सुक्तम् (वेदोक्त)
Sarpa Suktam (Vedokta)
नागदोष, कालसर्प योग शमन और विष-बाधा से रक्षा हेतु वेदोक्त प्रामाणिक सर्प सूक्त।
फॉन्ट आकार:
॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥
सर्प सुक्तम् (वेदोक्त) मूल पाठ व भावार्थ
ऋचा १
वेदमंत्र
ॐ नमो अस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथिवीमनु ।
ये अन्तरिक्षे ये दिवि तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः ॥ १ ॥
Om namo astu sarpebhyo ye ke ca pṛthivīmanu | ye antarikṣe ye divi tebhyaḥ sarpebhyo namaḥ || 1 ||
सरल भावार्थ:
पृथ्वी पर विचरने वाले समस्त नागों व सर्पों को हमारा नमस्कार है। जो अन्तरिक्ष में और जो द्युलोक में स्थित हैं, उन सभी दिव्य सर्पों को हमारा नमन है।
English Translation:
Salutations to all the serpents that dwell upon the earth, in the atmosphere, and in the celestial heavens.
ऋचा २
वेदमंत्र
ये वा सूर्यस्य रश्मिषु ये वा अप्सु सदस्कृतम् ।
ये वा वनस्पतिष्वनु तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः ॥ २ ॥
Ye vā sūryasya raśmiṣu ye vā apsu sadaskṛtam | ye vā vanaspatiṣvanu tebhyaḥ sarpebhyo namaḥ || 2 ||
सरल भावार्थ:
जो सर्प भगवान सूर्य की किरणों में निवास करते हैं, जो जलों में स्थित हैं और जो वनस्पतियों व वृक्षों में वास करते हैं, उन सभी को नमस्कार है।
English Translation:
Obeisance to those serpents who reside within the rays of the sun, in the waters, and amidst the forest trees and herbs.
ऋचा ३
वेदमंत्र
ये वा इषवो यातुधानानां ये वा वनस्पतीँरनु ।
ये वा वटेषु शेरते तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः ॥ ३ ॥
Ye vā iṣavo yātudhānānāṃ ye vā vanaspatī̃ranu | ye vā vaṭeṣu śerate tebhyaḥ sarpebhyo namaḥ || 3 ||
सरल भावार्थ:
जो दैत्यों और नकारात्मक शक्तियों के संहारक हैं और जो वटवृक्षों आदि की जड़ों में निवास करते हैं, वे सभी सर्पदेव शांत होकर हमारा कल्याण करें।
English Translation:
Salutations to the protective serpents who dispel malevolent forces and dwell in sacred banyan groves.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
नागपंचमी, पंचमी तिथि, शनिवार
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- शिवलिंग पर या नाग प्रतिमा पर कच्चा दूध और दूर्वा अर्पित करें।
- वेदोक्त सर्प सूक्त का पाठ करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:
- ✔ कालसर्प दोष और नागदोष से पूर्ण मुक्ति मिलती है।
- ✔ संतान प्राप्ति में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सर्प सुक्तम् (वेदोक्त) का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
सर्प सुक्तम् (वेदोक्त) का पाठ सामान्यतः नागपंचमी, पंचमी तिथि, शनिवार के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
सर्प सुक्तम् (वेदोक्त) का मूल वेद स्रोत क्या है?
सर्प सुक्तम् (वेदोक्त) का पावन स्रोत कृष्ण यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता 4.2.8) है। इसके ऋषि वैदिक ऋषि तथा छंद यजुष् है।
सर्प सुक्तम् (वेदोक्त) का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से कालसर्प दोष और नागदोष से पूर्ण मुक्ति मिलती है। तथा संतान प्राप्ति में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं। होती है।