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BHAKTI KI SHAKTI
🕉️ भगवान सूर्य नारायण ऋग्वेद (मंडल 1, सूक्त 50) ऋषि: प्रस्कण्व काण्व छंद: गायत्री / अनुष्टुप्

सूर्य सूक्तं

Surya Suktam

नेत्र ज्योति, आरोग्य, हृदय रोग निवारण और आत्मबल के प्रदाता प्रत्यक्ष देव सूर्य नारायण का पावन सूक्त (उदु त्यं जातवेदसं...)।

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॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥

सूर्य सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ

ऋचा 1 वेदमंत्र
उदु॒ त्यं जा॒तवे॑दसं दे॒वं व॑हन्ति के॒तवः॑ । दृ॒शे विश्वा॑य॒ सूर्य॑म् ॥ १ ॥
Udu tyaṃ jātavedasaṃ devaṃ vahanti ketavaḥ | Dṛśe viśvāya sūryam || 1 ||
सरल भावार्थ: प्रकाश की किरणें उस सर्वज्ञ देव सूर्य को संपूर्ण विश्व के देखने के लिए ऊपर आकाश में ले जा रही हैं।
English Translation: His radiant rays bear on high the all-knowing deity, the Sun, that all creation may look upon His illuminating majesty.
ऋचा 2 वेदमंत्र
अदृ॑श्रन्नस्य के॒तवो॒ वि र॒श्मयो॒ जनाँ॒ अनु॑ । भ्राज॑न्तो अ॒ग्नयो॑ यथा ॥ २ ॥
Adṛśrannasya ketavo vi raśmayo janām̐ anu | Bhrājanto agnayo yathā || 2 ||
सरल भावार्थ: उस सूर्य की किरणें प्रज्वलित अग्नियों के समान समस्त लोकों में प्रदीप्त होकर स्पष्ट दिखाई दे रही हैं।
English Translation: His luminous rays are seen extending unto all living beings, shining forth brilliantly like blazing fires.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

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सर्वोत्तम शुभ समय: रविवार, मकर संक्रांति, छठ पर्व, प्रतिदिन प्रातःकाल

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, गुड़ और लाल पुष्प मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें।
  2. सूर्याभिमुख होकर सूर्य सूक्त का 3 बार पाठ करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:

  • ✔ नेत्र रोग, चर्म रोग और हृदय रोग में चमत्कारी लाभ होता है।
  • ✔ तेज, सरकारी नौकरी, मान-सम्मान और दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूर्य सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
सूर्य सूक्तं का पाठ सामान्यतः रविवार, मकर संक्रांति, छठ पर्व, प्रतिदिन प्रातःकाल के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
सूर्य सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
सूर्य सूक्तं का पावन स्रोत ऋग्वेद (मंडल 1, सूक्त 50) है। इसके ऋषि प्रस्कण्व काण्व तथा छंद गायत्री / अनुष्टुप् है।
सूर्य सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से नेत्र रोग, चर्म रोग और हृदय रोग में चमत्कारी लाभ होता है। तथा तेज, सरकारी नौकरी, मान-सम्मान और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। होती है।

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