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वाग्देवी (वाणी व सरस्वती)
ऋग्वेद (मंडल 10, सूक्त 71)
ऋषि: बृहस्पति अंगिरस
छंद: त्रिष्टुप्
वक् सूक्तं
Vak Suktam
वाणी के दिव्य रहस्य, शब्दों की शक्ति और सत्य ज्ञान की अभिव्यक्ति का उद्घोष करने वाला सूक्त।
फॉन्ट आकार:
॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥
वक् सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ
ऋचा 1
वेदमंत्र
बृह॑स्पते प्रथ॒मं वा॒चो अग्रं॒ यत्प्रै॑रत नाम॒धेयं॒ दधा॑नाः ।
यदे॑षां॒ श्रेष्ठं॒ यद॑रि॒प्रमासी॒त्प्रेणा॒ तदे॑षां॒ निहि॑तं॒ गुहा॒विः ॥ १ ॥
Bṛhaspate prathamaṃ vāco agraṃ yatprairata nāmadheyaṃ dadhānāḥ |
Yadeṣāṃ śreṣṭhaṃ yadari pramāsītpreṇā tadeṣāṃ nihitaṃ guhāviḥ || 1 ||
सरल भावार्थ:
हे बृहस्पति! ज्ञानियों ने पदार्थों को नाम देते हुए जब वाणी का सर्वप्रथम प्रयोग किया, तब उनका जो सर्वश्रेष्ठ और निष्पाप ज्ञान था, वह प्रेमपूर्वक गुहा से प्रकट हुआ।
English Translation:
O Brihaspati, when the wise first sent forth speech giving names to objects, that which was their best and purest knowledge hidden in mystery was revealed through devotion.
॥ विधि एवं नियम ॥
पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम
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सर्वोत्तम शुभ समय:
गुरुवार, वसंत पंचमी
🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:
- पूर्वाभिमुख बैठकर वाणी की शुद्धता का संकल्प लें और पाठ करें।
✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:
- ✔ वक्तृत्व कला, लेखन और संगीत में असाधारण सिद्धि मिलती है।
- ✔ वाणी दोष शांत होते हैं।
Frequently Asked Questions
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वक् सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
वक् सूक्तं का पाठ सामान्यतः गुरुवार, वसंत पंचमी के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
वक् सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
वक् सूक्तं का पावन स्रोत ऋग्वेद (मंडल 10, सूक्त 71) है। इसके ऋषि बृहस्पति अंगिरस तथा छंद त्रिष्टुप् है।
वक् सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से वक्तृत्व कला, लेखन और संगीत में असाधारण सिद्धि मिलती है। तथा वाणी दोष शांत होते हैं। होती है।