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🕉️ भगवान महाविष्णु ऋग्वेद (मंडल 1, सूक्त 154) ऋषि: दीर्घतमा औचथ्य छंद: त्रिष्टुप्

विष्णु सूक्तं

Vishnu Suktam

भगवान विष्णु के तीन पदों (त्रिविक्रम रूप) द्वारा तीनों लोकों को नापने और परम पद की महिमा का गान करने वाला सर्वोत्कृष्ट सूक्त।

फॉन्ट आकार:
॥ वेदोक्त मूल ऋचाएं ॥

विष्णु सूक्तं मूल पाठ व भावार्थ

ऋचा 1 वेदमंत्र
विष्णो॒र्नु कं॑ वी॒र्या॑णि॒ प्र वो॑चं॒ यः पार्थि॑वानि विम॒मे रजां॑सि । यो अस्क॑भाय॒दुत्त॑रं स॒धस्थं॑ विचक्रमा॒णस्त्रे॒धोरु॑गा॒यः ॥ १ ॥
Viṣṇornu kaṃ vīryāṇi pra vocaṃ yaḥ pārthivāni vimame rajāṃsi | Yo askabhāyaduttaraṃ sadhasthaṃ vicakramāṇastredhorugāyaḥ || 1 ||
सरल भावार्थ: मैं अब विष्णु के पराक्रमों का गान करता हूँ, जिन्होंने पार्थिव लोकों को रचा; जिन्होंने तीन पदों में विचरण कर उच्च द्युलोक को स्थिर किया।
English Translation: I will now proclaim the heroic deeds of Vishnu, who measured out the terrestrial spaces, who established the high realm above, striding three times, wide-stepping.
॥ विधि एवं नियम ॥

पाठ विधि, शुभ समय एवं नियम

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सर्वोत्तम शुभ समय: गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा

🪔 क्रमबद्ध पाठ विधि:

  1. भगवान विष्णु को तुलसी पत्र और पीले पुष्प अर्पित करें।
  2. विष्णु सूक्त का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।

✨ दिव्य फलश्रुति एवं लाभ:

  • ✔ वैकुंठ धाम की प्राप्ति और जीवन में पूर्ण सुरक्षा का आश्वासन।
  • ✔ समस्त ग्रह-दोषों का समूल निवारण होता है।
Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विष्णु सूक्तं का पाठ करने का सबसे शुभ समय क्या है?
विष्णु सूक्तं का पाठ सामान्यतः गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा के समय सर्वाधिक फलदायी माना गया है। शुद्ध होकर शांत मन से पाठ करें।
विष्णु सूक्तं का मूल वेद स्रोत क्या है?
विष्णु सूक्तं का पावन स्रोत ऋग्वेद (मंडल 1, सूक्त 154) है। इसके ऋषि दीर्घतमा औचथ्य तथा छंद त्रिष्टुप् है।
विष्णु सूक्तं का पाठ करने से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से वैकुंठ धाम की प्राप्ति और जीवन में पूर्ण सुरक्षा का आश्वासन। तथा समस्त ग्रह-दोषों का समूल निवारण होता है। होती है।

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