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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवान अर्धनारीश्वर (शिव-शक्ति समन्वित रूप) • 9 श्लोक

अर्धनारीश्वर अष्टकम

शिव और शक्ति के अद्वैत एकाकार रूप अर्धनारीश्वर का यह अष्टक दाम्पत्य जीवन में प्रेम, संतुलन, आरोग्य और अद्वैत ज्ञान की सिद्धि कराता है।

रचयिता आदि शंकराचार्य
स्रोत / ग्रन्थ स्तोत्र रत्नावली (आदिशंकराचार्य कृत)
छन्द अनुष्टुप एवं उपजाति छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त सोमवार, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
चाम्पेयगौरार्धशरीरकायै कर्पूरगौरार्धशरीरकाय । धम्मिल्लकायै च जटाधराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनका आधा शरीर चम्पा के पुष्प के समान सुवर्ण-गौर है और आधा शरीर कर्पूर के समान धवल-उज्ज्वल है, जो आधे भाग में सुन्दर जूड़े से युक्त हैं और आधे भाग में जटा धारण किए हुए हैं, उन भगवती शिवा (पार्वती) और भगवान शिव को मेरा बारम्बार प्रणाम है।
English Translation: Salutations to Devi Shiva (Parvati) whose half-body is golden like the Champa flower and to Lord Shiva whose half-body is radiant white like camphor; who has braided hair on one side and matted locks on the other.
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
कस्तूरिकाकुङ्कुमचर्चितायै चितारजःपुञ्जविलेपनाय । कृतस्मरायै विकृतस्मराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनके आधे अंग पर कस्तूरी और कुंकुम का चन्दन लेप लगा है और आधे अंग पर श्मशान की चिता-भस्म का विलेपन है, जो आधे भाग में कामदेव को जगाने वाली हैं और आधे भाग में कामदेव को भस्म करने वाले हैं, उन भगवती शिवा और भगवान शिव को नमन है।
English Translation: Salutations to Goddess Shiva adorned with musk and saffron, and to Lord Shiva smeared with funeral ashes; who inspires cosmic desire on one side and consumed Kamadeva on the other.
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
चलत्क्वणत्कङ्कणनूपुरायै पादाङ्गदाद्युद्गतनूपुराय । नूपुरधरायै फणिभूषिताय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनके आधे अंग में मधुर झंकार करने वाले कंगन और नूपुर शोभित हैं तथा आधे अंग में नागों के आभूषण व कड़े विराजमान हैं, उन भगवती पार्वती और भगवान देवाधिदेव महादेव को मेरा प्रणाम है।
English Translation: Salutations to Mother Parvati adorned with melodiously tinkling bangles and anklets, and to Lord Shiva wearing serpents as ornaments.
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
विशालनीलोत्पललोचनायै विकासिपङ्केरुहलोचनाय । समेक्षणायै विषमेक्षणाय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनके आधे भाग में नीले कमल के समान विशाल सुंदर नेत्र हैं और आधे भाग में खिले हुए कमल व तीसरे अग्नि-नेत्र की प्रभा है, जो आधे में सौम्य दो नेत्रों वाली हैं और आधे में तीन नेत्रों वाले हैं, उन शिवा और शिव को नमस्कार है।
English Translation: Salutations to Her with expansive blue lotus eyes and to Him with three eyes including the fire-eye of wisdom; balanced vision on one side and cosmic trinetra on the other.
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
मन्दारमालाकलितालकायै कपालमालाङ्कितकन्धराय । दिव्याम्बरायै च दिगम्बराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनके आधे भाग के केशों में कल्पवृक्ष के मंदार पुष्पों की माला सुशोभित है और आधे भाग के गले में मुण्डमाला शोभायमान है, जो आधे भाग में दिव्य रेशमी वस्त्र धारण किए हैं और आधे भाग में दिगम्बर (दिशाओं को ही वस्त्र मानने वाले) हैं, उन शिवा और शिव को नमन है।
English Translation: Salutations to Her adorned with celestial Mandara flowers and to Him wearing a garland of skulls; draped in celestial garments on one side and sky-clad (Digambara) on the other.
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
अम्भोधरश्यामलकुन्तलायै तडित्प्रभाताम्रजटाधराय । निरीश्वरायै निखिलेश्वराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनके आधे भाग में मेघ के समान काले-घुंघराले केश हैं और आधे भाग में विद्युत की कांति के समान तप्त-ताम्र जटाएं हैं, जिनके ऊपर कोई स्वामी नहीं है और जो संपूर्ण ब्रह्माण्ड के एकमात्र ईश्वर हैं, उन भगवती शिवा और भगवान शिव को नमन है।
English Translation: Salutations to Her whose tresses are dark like rain-bearing clouds, and to Him with matted hair flashing like lightning; supreme sovereign without superior and Lord of all existence.
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
प्रपञ्चसृष्ट्युन्मुखलास्यकायै समस्तसंहारकवाण्डवाय । जगज्जनन्यै जगदेकपित्रे नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: जो आधे भाग में संसार की रचना के लिए मधुर लास्य नृत्य में लीन हैं और आधे भाग में संपूर्ण ब्रह्माण्ड के प्रलय के लिए प्रचंड ताण्डव नृत्य करते हैं, जो समस्त जगत की जननी हैं और जगत के एकमात्र परम पिता हैं, उन शिवा और शिव को मेरा प्रणाम है।
English Translation: Salutations to Her performing the graceful Lasya dance of cosmic creation, and to Him dancing the fiery Tandava of dissolution; eternal Mother of the universe and its supreme Father.
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
प्रदीप्तरत्नोज्ज्वलकुण्डलायै स्फुरन्महापन्नगभूषणाय । शिवान्वितायै च शिवान्विताय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: जिनके आधे कान में चमचमाते रत्नों से जड़ा कुण्डल है और आधे कान में फुंकारते हुए महानाग का कुण्डल शोभित है, जो सदा शिव से और शिवा से समन्वित हैं, उन भगवती पार्वती और भगवान महेश्वर को नमन है।
English Translation: Salutations to Her wearing resplendent gem-encrusted earrings, and to Him wearing coiled serpents; perpetually unified in absolute oneness, salutations unto Shiva and Shivaa.
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
एतत्पठेदष्टकमिष्टदं यो भक्त्या स मान्यो भुवि दीर्घजीवी । प्राप्नोति सौभाग्यमनन्तकालं भूयात् सदा तस्य समस्तसिद्धिः ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य भक्तिपूर्वक समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले इस अर्धनारीश्वर अष्टकम का पाठ करता है, वह इस संसार में सम्मानित और दीर्घायु होता है, अनंत काल तक अखंड सौभाग्य प्राप्त करता है तथा उसकी समस्त सिद्धियां सिद्ध हो जाती हैं।
English Translation: Whoever devoutly recites this desire-fulfilling Ardhanarishvara Ashtakam earns earthly honor, longevity, perpetual auspicious fortune, and accomplishes all supreme achievements.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं श्री अर्धनारीश्वर अष्टकम सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 प्रातःकाल या सायं काल स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूर्वाभिमुख बैठें।
  • 2 शिवलिंग अथवा अर्धनारीश्वर विग्रह पर जल, दूध, बेलपत्र, कुमकुम और भस्म अर्पित करें।
  • 3 घी का दीपक प्रज्वलित कर शांत चित्त से इस स्तोत्र का लयबद्ध पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ पति-पत्नी के मध्य आपसी कलह शांत होकर प्रेम, सामंजस्य और अखण्ड दाम्पत्य सुख की वृद्धि होती है।
  • ✔ शरीर के भीतर इड़ा और पिंगला नाड़ियों का संतुलन होकर आंतरिक शांति और यौगिक शक्ति जागृत होती है।
  • ✔ समस्त प्रकार के भय, रोग और ग्रह दोषों का निवारण होकर दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: सोमवार, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि