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BHAKTI KI SHAKTI
📜 माता भवानी (दुर्गा) • 8 श्लोक

भवानी अष्टकम्

आदि शंकराचार्य कृत यह स्तोत्र अनन्य शरणागति का शिखर है। इसमें साधक संसार के सभी संबंधों को त्यागकर केवल मां भवानी को ही अपनी एकमात्र गति स्वीकार करता है ("गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि")।

रचयिता जगद्गुरु आदि शंकराचार्य
स्रोत / ग्रन्थ शाक्त आगम व स्तोत्र साहित्य
छन्द भुजङ्गप्रयात छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त शुक्रवार, अष्टमी, नवमी, नवरात्रि
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
न तातो न माता न बन्धुर्न दाता न पुत्रो न पुत्री न भृत्यो न भर्ता । न जाया न विद्या न वृत्तिर्ममैव गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: न पिता हैं, न माता, न भाई-बंधु, न कोई दाता, न पुत्र, न पुत्री, न सेवक और न कोई स्वामी; न पत्नी है, न विद्या और न कोई आजीविका का साधन; हे भवानी! केवल आप ही मेरी एकमात्र गति हैं, आप ही मेरी शरण हैं।
English Translation: Neither father, nor mother, nor kin, nor benefactor, nor son, nor daughter, nor servant, nor master, nor spouse, nor learning, nor livelihood do I possess; You alone are my refuge, You alone are my refuge, O Mother Bhavani!
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
भवाब्धावपारे महादुःखभीरुः पपात प्रकामी प्रलोभी प्रमत्तः । संसारपाशप्रबद्धः सदाहं गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: इस अपार संसार-सागर में महादुःखों से भयभीत होकर मैं गिर पड़ा हूँ। मैं कामी, लोभी, अहंकारी और सांसारिक मोह-पाश में सदा जकड़ा हुआ हूँ; हे भवानी! आप ही मेरी एकमात्र गति हैं।
English Translation: Drowning in this boundless ocean of existence, terrified of immense sufferings, filled with lust, greed, and intoxication, bound tight by worldly fetters—You alone are my refuge, You alone are my refuge, O Bhavani!
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
न जानामि दानं न च ध्यानयोगं न जानामि तन्त्रं न च स्तोत्रमन्त्रम् । न जानामि पूजां न च न्यासयोगं गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: मैं न दान देना जानता हूँ, न ध्यान और योग; न तन्त्र जानता हूँ, न स्तोत्र और मन्त्र; न पूजा जानता हूँ और न न्यास विधि; हे भवानी! केवल आप ही मेरी एकमात्र शरण हैं।
English Translation: I know neither charity, nor meditation, nor Tantric rites, nor hymns, nor mantras; I know neither worship nor ritual Nyasa—You alone are my refuge, You alone are my refuge, O Bhavani!
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
न जानामि पुण्यं न जानामि तीर्थं न जानामि मुक्तिं लयं वा कदाचित् । न जानामि भक्तिं व्रतं वापि मातर्गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: मैं न पुण्य जानता हूँ, न तीर्थयात्रा; न मोक्ष जानता हूँ और न लय; हे माँ! मैं न भक्ति जानता हूँ और न कोई व्रत-उपवास; हे भवानी! केवल आप ही मेरी गति हैं।
English Translation: I know neither religious merit, nor pilgrimages, nor liberation, nor cosmic absorption; O Mother, I know neither devotional love nor sacred vows—You alone are my refuge, You alone are my refuge, O Bhavani!
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
कुकर्मी कुसङ्गी कुबुद्धिः कुदासः कुलाचारहीनः कदाचारलीनः । कुदृष्टिः कुवाक्यप्रबन्धः सदाहं गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: मैं बुरे कर्म करने वाला, कुसंगति में रहने वाला, दुर्बुद्धि, अधम दास, कुल की मर्यादा से हीन, दुराचार में लीन, कुदृष्टि रखने वाला और कटु वचन बोलने वाला हूँ; हे भवानी! केवल आप ही मेरी एकमात्र गति हैं।
English Translation: A committer of wrong deeds, keeper of bad company, ill-minded, wretched servant, bereft of righteous family traditions, indulging in vices, of malicious glance, speaker of harsh words—You alone are my refuge, You alone are my refuge, O Bhavani!
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
प्रजेशं रमेशं महेशं सुरेशं दिनेशं निशीथेश्वरं वा कदाचित् । न जानामि चान्यं सदाहं शरण्ये गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: मैं न ब्रह्मा को जानता हूँ, न विष्णु को, न शिव को, न इन्द्र को, न सूर्य को और न चन्द्रमा को; हे शरणागतवत्सला! मैं किसी अन्य को नहीं जानता, केवल आप ही मेरी एकमात्र गति हैं।
English Translation: I know neither Brahma, nor Vishnu, nor Shiva, nor Indra, nor the Sun, nor the Moon; O haven of the surrendered, I know no other deity—You alone are my refuge, You alone are my refuge, O Bhavani!
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
विवादे विषादे प्रमादे प्रवासे जले चानले पर्वते शत्रुमध्ये । अरण्ये शरण्ये सदा मां प्रपाहि गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: विवाद में, विषाद (दुःख) में, प्रमाद (भूल) में, परदेस में, जल में, अग्नि में, पर्वत पर, शत्रुओं के बीच और घने जंगल में सदा मेरी रक्षा करें; हे भवानी! आप ही मेरी एकमात्र गति हैं।
English Translation: In disputes, in sorrow, in negligence, in foreign lands, in water, in fire, upon mountains, amidst enemies, and in desolate wilderness—protect me always, O haven! You alone are my refuge, You alone are my refuge, O Bhavani!
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
अनाथो दरिद्रो जरारोगयुक्तो महाक्षीणदीनः सदा जाड्यवक्त्रः । विपत्तौ प्रविष्टः प्रणष्टः सदाहं गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: मैं अनाथ हूँ, दरिद्र हूँ, बुढ़ापे और रोगों से ग्रस्त हूँ, अत्यंत क्षीण और दीन हूँ, मुख पर सदा जड़ता छाई रहती है, विपत्तियों में फंसा हूँ और नष्ट हो चुका हूँ; हे भवानी! केवल आप ही मेरी एकमात्र गति हैं, आप ही मेरी शरण हैं।
English Translation: Orphaned, destitute, stricken by old age and illness, utterly depleted, poor, stunned into silence, plunged into catastrophe and ruined—You alone are my refuge, You alone are my refuge, O Mother Bhavani!
✨ समाप्ति
।। इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं भवान्यष्टकं सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 स्नान कर स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करें।
  • 2 माता दुर्गा/भवानी के सम्मुख घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
  • 3 लाल पुष्प, कुंकुम, अक्षत और मिष्ठान्न का भोग लगाएं।
  • 4 करबद्ध होकर आर्तभाव और अनन्य शरणागति से पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ घोर संकट, विपत्ति, अज्ञात भय और अकेलापन से तत्काल मुक्ति।
  • ✔ माता भवानी का वात्सल्यपूर्ण मातृ-आशीर्वाद और सुरक्षा कवच।
  • ✔ चित्त की शुद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: शुक्रवार, अष्टमी, नवमी, नवरात्रि