आदि शंकराचार्य कृत यह स्तोत्र अनन्य शरणागति का शिखर है। इसमें साधक संसार के सभी संबंधों को त्यागकर केवल मां भवानी को ही अपनी एकमात्र गति स्वीकार करता है ("गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि")।
प्रतिदिन प्रातः अपनी राशि का सटीक दैनिक राशिफल, आज का शुभ चौघड़िया व राहुकाल समय की सूचना सीधे अपने कंप्यूटर पर प्राप्त करें।