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BHAKTI KI SHAKTI
📜 भगवती दुर्गा (आपदुद्धारिणी) • 9 श्लोक

श्री दुर्गा आपदुद्धाराष्टकम

जीवन के घोर संकट, विपत्ति, अकाल, रोग, कारागार भय और आर्थिक तबाही से रक्षा करने वाला यह अष्टक साक्षात् संजीवनी के समान है।

रचयिता महर्षि दुर्वासा / सिद्ध परम्परा
स्रोत / ग्रन्थ सिद्ध सारस्वत मन्त्र महोदधि
छन्द भुजङ्गप्रयात एवं उपजाति छन्द
शुभ दिन / मुहूर्त मंगलवार, शुक्रवार, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी
श्लोक 1 ॥ श्री ॥
नमस्ते शरण्ये शिवे सानुकम्पे नमस्ते जगद्व्यापिके विश्वरूपे । नमस्ते जगद्वन्द्यपादारविन्दे नमस्ते जगत्तारिणि त्राहि दुर्गे ॥ १ ॥
हिंदी भावार्थ: शरणागतों की रक्षक, परम कल्याणमयी और करुणा से परिपूर्ण हे देवि! आपको नमस्कार है। संपूर्ण ब्रह्माण्ड में व्याप्त विश्वरूपा! आपको प्रणाम है। जगत द्वारा पूजित चरणकमल वाली और संसार-सागर से तारने वाली हे माँ दुर्गे! मेरी रक्षा कीजिए।
English Translation: Salutations to the compassionate refuge of all beings, all-pervading Mother of cosmic form! Revering Your world-honored lotus feet, O deliverer of the universe, protect me, Mother Durga!
श्लोक 2 ॥ श्री ॥
नमश्चण्डिके चण्डदोर्दण्डलीला-समुत्खण्डिताखण्डलोद्भूतदर्पे । सुराणां विमर्देष्वभीष्टप्रदे त्वं प्रसीद प्रपन्ने च त्राहि दुर्गे ॥ २ ॥
हिंदी भावार्थ: अपनी प्रचण्ड भुजाओं की लीला मात्र से असुरों के घमण्ड को चूर्ण करने वाली हे चण्डिके! आपको नमस्कार है। देवताओं के संकट के समय उनका मनोरथ सिद्ध करने वाली हे माँ! मुझ शरणागत पर प्रसन्न होइए और मेरी रक्षा कीजिए।
English Translation: Salutations to Chandika, who shattered demons' vanity through the sport of Her mighty arms. Bestower of victory in times of celestial crisis, be pleased with me and protect me, Mother Durga!
श्लोक 3 ॥ श्री ॥
भवभ्रंशभीतेन लोके समस्तान् विहाय प्रभो पादपद्मं प्रपन्नः । परं त्राणमापन्ननष्टस्य देहि प्रसीद प्रपन्ने च त्राहि दुर्गे ॥ ३ ॥
हिंदी भावार्थ: इस संसार चक्र के पतन और कष्टों से भयभीत होकर, अन्य सभी सांसारिक आश्रयों को छोड़कर मैं केवल आपके चरण कमलों की शरण में आया हूँ। संकट से नष्ट होते हुए मुझ दीन को परम रक्षा प्रदान कीजिए और रक्षा कीजिए, हे दुर्गे!
English Translation: Terrified of worldly downfalls and sorrows, forsaking all worldly attachments, I surrender solely at Your lotus feet. Grant supreme salvation to this afflicted soul; be gracious and protect me, Durga!
श्लोक 4 ॥ श्री ॥
न मन्त्रं न यन्त्रं न जाने स्तुतिं वा न चाह्वानविद्यां न च ध्यानयोगम् । न जाने च पूजां न जाने विलापं परं त्वामहं संश्रये त्राहि दुर्गे ॥ ४ ॥
हिंदी भावार्थ: मैं न तो कोई मन्त्र जानता हूँ, न यन्त्र, न स्तुति पाठ, न आवाहन की विधि और न ही ध्यान-योग। मैं न विधिपूर्वक पूजा जानता हूँ और न ही प्रार्थना। मैं केवल निष्कपट भाव से आपकी शरण में हूँ, हे माँ दुर्गे! रक्षा कीजिए।
English Translation: I know neither mystical spells nor sacred diagrams, nor hymns of invocation, nor meditational absorption. Knowing nothing of formal worship, I merely take refuge in You. Protect me, Mother Durga!
श्लोक 5 ॥ श्री ॥
अनाथस्य दीनस्य तृष्णाकुलस्य प्रपन्नस्य दारिद्र्यदुःखप्लुतस्य । कृपापाङ्गवृष्ट्या समुद्धारय त्वं प्रसीद प्रपन्ने च त्राहि दुर्गे ॥ ५ ॥
हिंदी भावार्थ: अनाथ, असहाय, चिंताओं और तृष्णा से व्याकुल, घोर दरिद्रता और दुःख के सागर में डूबे मुझ शरणागत पर अपनी कृपामयी करुणामय दृष्टि की वर्षा कीजिए और मेरा उद्धार कीजिए। हे दुर्गे! रक्षा कीजिए।
English Translation: Upon this helpless, distressed, anxiety-ridden soul submerged in the ocean of poverty and sorrow, shower Your compassionate glance and elevate me. Be pleased and deliver me, Mother Durga!
श्लोक 6 ॥ श्री ॥
कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति प्रपन्नाखिलक्लेशहन्त्र्यम्बिके त्वम् । निमग्नस्य घोरेऽतिसंसारसिन्धौ कृपां कुरु देवि प्रसीद प्रपन्ने ॥ ६ ॥
हिंदी भावार्थ: संसार में पुत्र कुपुत्र हो सकता है, किन्तु माता कभी कुमाता नहीं होती। आप शरणागतों के समस्त क्लेशों का नाश करने वाली जगदम्बा हैं। इस भयंकर संसार-सिन्धु में डूबे मुझ पर कृपा कीजिए और रक्षा कीजिए।
English Translation: A child may turn unfilial, but a mother never ceases to be maternal. You are the vanquisher of all sorrows of the surrendered. On this soul sinking in the fierce cosmic ocean, show mercy, Mother Durga!
श्लोक 7 ॥ श्री ॥
विपत्तिप्रसङ्गे भये सङ्कटे वा स्मृता संहरस्यम्बिके सर्वदुःखम् । जनस्त्वत्पदाब्जं न चेत्संश्रयेता भवेत्कस्य त्राणं जगत्तारि दुर्गे ॥ ७ ॥
हिंदी भावार्थ: विपत्ति, भय या भयंकर संकट के समय केवल स्मरण करने मात्र से ही आप सब दुःखों का हरण कर लेती हैं। यदि कोई मनुष्य आपके चरण कमलों का आश्रय न ले, तो इस संसार में उसका उद्धार कौन कर सकता है? हे दुर्गे! रक्षा कीजिए।
English Translation: Remembered during adversity, fear, or peril, You dissolve all suffering instantly. If a person does not hold onto Your lotus feet, who else can deliver them? O rescuer of the universe, protect me!
श्लोक 8 ॥ श्री ॥
शरण्ये वरेण्ये महोत्साहदात्रि दयाशीलिके देवि कारुण्यमूर्ते । प्रपन्नं ममेदं वचः श्रूयतां वै प्रसीद प्रपन्ने च त्राहि दुर्गे ॥ ८ ॥
हिंदी भावार्थ: शरण देने वाली, सर्वश्रेष्ठा, भक्तों को महान उत्साह प्रदान करने वाली, दया की मूर्ति और असीम करुणामयी हे देवि! मुझ शरणागत की इस आर्त पुकार को सुनिए और मुझ पर प्रसन्न होकर मेरी रक्षा कीजिए।
English Translation: O supreme refuge, adorable bestower of fortitude, embodiment of compassion! Hear this fervent prayer of Your surrendered devotee; be gracious and protect me, Mother Durga!
फलश्रुति 9 ॥ श्री ॥
इदं दुर्गे आपदुद्धाराष्टकं यः पठेन्नित्यमेकाग्रचेताः । स मुच्येत सर्वैर्भयैर्घोररोगैस्तथा सर्वदा मोदते मुक्तिभाग् वा ॥ ९ ॥
हिंदी भावार्थ: जो मनुष्य एकाग्रचित्त होकर प्रतिदिन इस दुर्गा आपदुद्धाराष्टकम का पाठ करता है, वह समस्त प्रकार के भय, राजभय, शत्रु बाधा और घोर रोगों से मुक्त होकर इस लोक में सुख भोगता है तथा अंत में मोक्ष प्राप्त करता है।
English Translation: Whoever regularly recites this Durga Apaduddhara Ashtakam with focused devotion is emancipated from all perils, terrors, and severe ailments, living joyfully and attaining liberation.
✨ समाप्ति
।। इति श्रीदुर्गा आपदुद्धाराष्टकम् सम्पूर्णम् ।।

🪔 प्रामाणिक पाठ विधि एवं नियम

  • 1 संकट के समय स्नान कर शुद्ध लाल वस्त्र पहनकर पूर्वाभिमुख बैठें।
  • 2 माता दुर्गा के चित्र अथवा यंत्र के समक्ष घी का दीपक जलाएं और लाल पुष्प अर्पित करें।
  • 3 हाथ में जल लेकर संकट-मुक्ति का संकल्प लें और इस अष्टक का ३, ७ या ११ बार पाठ करें।

✨ फलश्रुति एवं अलौकिक लाभ

  • ✔ असाध्य संकट, आकस्मिक दुर्घटना, राजभय और कोर्ट-कचहरी के विवादों से मुक्ति मिलती है।
  • ✔ गंभीर रोगों और प्राणघातक व्याधियों का निवारण होकर शरीर में नवजीवन का संचार होता है।
  • ✔ घोर दरिद्रता और ऋण (कर्ज) के भार से मुक्ति मिलकर समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
🗓️ शुभ वार व मुहूर्त: मंगलवार, शुक्रवार, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी